
कंपू में संभाग स्तरीय मलखंब प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
ग्वालियर. पारंपरिक भारतीय खेल मलखंब में युवाओं की रुचि बढ़ाने और उनकी प्रतिभा को मंच देने के उद्देश्य से शासकीय भगवत सहाय महाविद्यालय, कंपू में संभाग स्तरीय मलखंब प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में एसओएस जीवाजी विश्वविद्यालय (स्कूल ऑफ स्टडीज) और महारानी लक्ष्मीबाई कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय (एमएलबी कॉलेज) के खिलाड़ियों ने उत्साह के साथ भाग लिया और अपने कौशल का प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों के अभ्यास, संतुलन, शारीरिक क्षमता और बेहतर तालमेल ने प्रतियोगिता को खास बनाया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. रामगोपाल आर्य के आतिथ्य में हुआ। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेल युवाओं के शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मलखंब जैसे खेलों से शरीर में लचीलापन, संतुलन, एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है। ऐसे खेलों को प्रोत्साहन देने से युवा अपनी प्रतिभा को निखारने के साथ भारतीय खेल परंपरा से भी जुड़ते हैं।
एमएलबी कॉलेज में मलखंब को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। यहां विद्यार्थी नियमित अभ्यास के माध्यम से अपनी तकनीक और शारीरिक क्षमता को बेहतर बना रहे हैं। प्रशिक्षण का असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन में भी दिखाई दे रहा है। मलखंब में बेहतर प्रदर्शन के लिए नियमित अभ्यास, शरीर पर नियंत्रण, संतुलन और एकाग्रता बेहद जरूरी हैं। खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान इन पहलुओं पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रतियोगिता में जीवाजी विश्वविद्यालय और एमएलबी कॉलेज के खिलाड़ियों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि युवाओं में पारंपरिक खेलों के प्रति रुचि बढ़ रही है। ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को अपनी तैयारी परखने, दूसरे संस्थानों के खिलाड़ियों से सीखने और आगामी प्रतियोगिताओं के लिए खुद को तैयार करने का अवसर देते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य ने विजेता और प्रतिभागी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने खिलाड़ियों के प्रयासों की सराहना करते हुए नियमित अभ्यास जारी रखने के लिए प्रेरित किया। आयोजन के संयोजक डॉ. लक्ष्मीनारायण ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार खिलाड़ियों के उत्साह और सहभागिता में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि खेल प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ अनुशासन और टीम भावना विकसित करने का अवसर भी देती हैं। इस अवसर पर डॉ. उमाशंकर पाठक ने भी खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण की सराहना की। कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।प्रतियोगिता को क्षेत्र में मलखंब जैसे पारंपरिक खेल को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना गया। ऐसे आयोजनों से न केवल खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धात्मक अनुभव मिलता है, बल्कि कॉलेज स्तर पर खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने और नई प्रतिभाओं को सामने लाने का रास्ता भी खुलता है।
Updated on:
12 Oct 2026 09:12 pm
Published on:
12 Oct 2026 09:12 pm
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