
पनीर, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
Gwalior news: होटल में आपने पनीर टिक्का, शाही पनीर या पनीर की सब्जी का ऑर्डर दिया और स्वाद लेकर खा लिया… लेकिन क्या आपको पता है कि आपकी प्लेट में आया पनीर दूध से बना है या सस्ते वनस्पति तेल और स्किम्ड मिल्क पाउडर से ? मध्यप्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री पर रोक के बावजूद ग्वालियर के बाजार में इसका खेल थमा नहीं है। शहर में रोजाना करीब 2 हजार किलो से अधिक एनालॉग पनीर होटल-रेस्टॉरेंट और खासकर पार्सल काउंटरों तक पहुंच रहा है।
सबसे बड़ा खेल कीमत में है। बाजार में शुद्ध दूध से बना पनीर 340 से 360 रुपए किलो बिक रहा है, जबकि एनालॉग पनीर महज 200 से 225 रुपए किलो में आसानी से उपलब्ध है। यानी करीब 120 से 150 रुपए किलो की बचत का लालच कारोबारियों को सस्ते पनीर की ओर खींच रहा है। ग्राहक को इसकी भनक तक नहीं लगती, क्योंकि देखने और कई बार स्वाद में भी दोनों के बीच फर्क करना आसान नहीं है।
एनालॉग पनीर में वास्तविक दूध से बने पनीर जैसा पोषण नहीं होता। इसमें इस्तेमाल होने वाले वनस्पति तेल और ट्रांस फैट की अधिकता स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक खराब गुणवत्ता वाले वसा का सेवन कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है।
ग्वालियर में पनीर की खपत भी इस कारोबार का बड़ा आधार है। सामान्य दिनों में शहर में 5 से 10 हजार किलो पनीर रोजाना खप जाता है। शादी-विवाह और बड़े आयोजनों के सीजन में यही मांग बढ़कर 25 से 30 हजार किलो प्रतिदिन तक पहुंच जाती है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के मानकों के अनुसार दूध से बने पनीर के लिए गाय या भैंस के दूध को गर्म कर नींबू या सिरके जैसे खाद्य अम्ल से फाड़कर छेना तैयार किया जाता है। इसी से वास्तविक पनीर बनता है। दूसरी ओर, पनीर जैसा दिखने वाला उत्पाद स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी), फैट, सोयाबीन ऑयल और अन्य सामग्री से तैयार किया जाता है। इसे एनालॉग कहा जाता है।
शहर में एनालॉग पनीर की सबसे अधिक खपत उन खाद्य पदार्थों में हो रही है, जो पार्सल के जरिए ग्राहकों तक पहुंचते हैं। पनीर की सब्जी, शाही पनीर, पनीर मसाला और पनीर टिक्का जैसे व्यंजनों में इसका इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आ रही है। ग्रेवी और मसालों के बीच ग्राहक के लिए यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि प्लेट में आया पनीर असली है या एनालॉग। प्रदेश में एनालॉग पनीर पर रोक के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने इसके सैंपल भी लिए थे, लेकिन अब बाजार में इसकी उपलब्धता बताती है कि निगरानी की रफ्तार उतनी तेज नहीं है, जितनी इसकी खपत।
एनालॉग पनीर और इससे पनाम वीर और र इसलिए ज्यादा बिक रहे हैं, क्योंकि कहीं न कहीं एफएसएसएआइ के नियमों में शिथिलता का फायदा उठाया जा रहा है। बाजार में बिक रहे पनीर की कीमत ही काफी कुछ बता देती है। यदि कोई पनीर 200 रुपए किलो के आसपास मिल रहा है तो उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।- नरेंद्र मांडिल, राष्ट्रीय महासचिव, दूध डेयरी व्यवसायी संघ (संपूर्ण भारत)
समय-समय पर टीम समय पनीर के सैंपल लेती है। एक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम पांच सैंपल लेने होते हैं। पनीर के सैंपल की जांच रिपोर्ट आने में करीब चार माह लगते हैं। एनालॉग पनीर की जांच भी लगातार की जा रही है। - डॉ. सचिन श्रीवास्तव, खाद्य अभिहित अधिकारी ग्वालियर
Updated on:
12 Oct 2026 08:53 am
Published on:
12 Oct 2026 08:53 am
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