ग्वालियर

सावन का सोमवार : शहर के इन मंदिरों में उमड़ी शिव भक्तों की भीड़, ऐसा है इन मंदिरों का इतिहास

शहर के मंदिरों में दो दिन पहले ही हो गई तैयारी, इस बार की गई है विद्युत सजावट
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Jul 22, 2019
Sawan Shiv Worship
सावन का सोमवार : शहर के इन मंदिरों में उमड़ी शिव भक्तों की भीड़, ऐसा है इन मंदिरों का इतिहास

जयदीप सिकरवार/ ग्वालियर। श्रावण मास का आज पहला सोमवार है, शिवालयों में सुबह से श्रद्धालुओं की भारी संख्या में भीड़ देखी गई। बाबा के भक्त बिल्व पत्र,फूल,दूध,दही,घी एवं जल से भगवान का अभिषेक कर रहे हैं। सावन के पहले सोमवार को लेकर भक्तों के लिए शहरभर के मंदिरों में तैयारियां दो दिन पहले ही शुरू कर दी गई थी।

साथ ही मंदिरों में विशेष विद्युत सजावट भी की गई। सभी मंदिरों में भक्त बिना परेशानी के पूजा-अर्चना कर सकें, इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। पत्रिका ने अंचल में प्रसिद्ध शहर के प्रमुख शिवालयों अचलेश्वर महादेव, कोटेश्वर महादेव, गुप्तेश्वर महादेव और चकलेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना और उसके महत्व के बारे में जानकारी एकत्रित की है, जो हम आपको बताने जा रहे हैं।

चकलेश्वर मंदिर
चकलेश्वर का शिवलिंग काफी पुराना है। यह गुप्तेश्वर मंदिर नीचे स्थापित है। मंदिर का निर्माण भरत ब्रजवासी ने 1982 में कराया। गुप्तेश्वर मंदिर के दर्शन करने के बाद चकलेश्वर मंदिर भी भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सावन के पूरे महीने में यहां भक्तों का आना जाना लगा रहता है।

भूतेश्वर मंदिर
शब्द प्रताप आश्रम के सामने स्थित मंदिर का निर्माण 1937-38 के बीच जयाजीराव सिंधिया द्वारा कराया गया था। जहां मंदिर है वहां पहले मरघट था। यहां हर सोमवार को भगवान शिव का विशेष अभिषेक किया जाता है। सावन मास में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।

अचलेश्वर महादेव मंदिर
श्री अचलनाथ का स्वयंभू शिवलिंग लश्कर में सनातन धर्म मंदिर मार्ग पर स्थित है। इनके प्राकट्य की अनेक किवदंतियां हैं। राजमार्ग के बीच भगवान अचलनाथ का शिवलिंग एक कच्चे मिट्टी के चबूतरे पर स्थित था, उस जमाने में यह क्षेत्र वीरान वन्य क्षेत्र था। शिवलिंग को यहां से हटाने के लिए हाथियों द्वारा चेन से खींचने का प्रयास किया, लेकिन शिवलिंग नहीं निकला। इसके बाद जियाजी राव सिंधिया ने मंदिर बनवाया। अब यह मंदिर विशाल आकार ले चुका है। वर्तमान में यहां मंदिर के जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विशेष व्यवस्था की गई है, जिसके तहत पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग लाइनें लगाई जाएंगी।

कोटेश्वर महादेव मंदिर
किले की तलहटी में इस मंदिर का निर्माण महायोद्धा श्रीनाथ महादजी शिन्दे महाराज द्वारा करवाया गया था। इसके 100 वर्षों बाद इसका जीर्णोद्धार एवं नवीनीकरण जयाजीराव शिन्दे द्वारा किया गया। कोटेश्वर में स्थापित शिवलिंग ग्वालियर दुर्ग पर स्थित शिवमंदिर में स्थापित था। यह तोमर वंश के आराध्य एवं पूजा का केंद्र था। बाद में ग्वालियर दुर्ग मुगलों के अधीन आया। औरंगजेब के शासन काल में इस देवस्थान को तोड़ कर तहस नहस कर शिवलिंग को किले से नीचे परकोटे की खाई में फेंक दिया गया। वर्तमान में मंदिर की देखरेख सिंधिया देव स्थान ट्रस्ट द्वारा की जाती है। सावन मास के अतिरिक्त शिवरात्रि पर यहां मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शिवदर्शन के लिए पहुंचते हैं।

गुप्तेश्वर मंदिर
गुप्तेश्वर शिवलिंग 300-400 वर्ष पुराना है। तिघरा रोड पर जहां मंदिर स्थापित है, वह जगह बरागांव अमरा पहाड़ी के नाम से जानी जाती थी। वर्तमान में यह मंदिर माफी औकाफ में है।

Published on:
22 Jul 2019 01:51 pm