ग्वालियर

जिले के स्कूलों को तीन साल से नहीं मिल रहा खेलों के लिए पर्याप्त बजट, नई सामग्री भी नहीं खरीद पा रहे

ग्वालियर. जिले के शासकीय स्कूलों में खेल गतिविधियों की स्थिति कमजोर होती जा रही है। पर्याप्त बजट न मिलने से प्रतिभाओं का विकास प्रभावित हो रहा है। हालात यह हैं कि स्कूल खेल सामग्री, मैदान की देखरेख और प्रतियोगिताओं में भागीदारी तक के लिए छात्र-छात्राओं से ली जाने वाली फीस पर निर्भर हैं। डीपीआइ से […]

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Mar 19, 2026
स्कूलों में खेल सामग्री पुरानी और अनुपयोगी

ग्वालियर. जिले के शासकीय स्कूलों में खेल गतिविधियों की स्थिति कमजोर होती जा रही है। पर्याप्त बजट न मिलने से प्रतिभाओं का विकास प्रभावित हो रहा है। हालात यह हैं कि स्कूल खेल सामग्री, मैदान की देखरेख और प्रतियोगिताओं में भागीदारी तक के लिए छात्र-छात्राओं से ली जाने वाली फीस पर निर्भर हैं। डीपीआइ से जो बजट आता है वह र्प्याप्त नहीं है। स्कूलों में खेलों के संचालन के लिए अलग से पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं कराई जा रही। 9वीं-10वीं कक्षा के विद्यार्थियों से 72 और 11वीं-12वीं कक्षा के विद्यार्थियों से 120 रुपए तक फीस ली जाती है, उससे ही खेल गतिविधियां किसी तरह संचालित की जा रह हंै। यह राशि बेहद कम है, जिससे खेल सामग्री भी पूरी नहीं हो पाती।

कई स्कूलों में खेल सामग्री अनुपयोगी हुई

पिछले तीन वर्षों से स्कूल स्तर पर खेलों के लिए कोई नियमित बजट जारी नहीं हुआ है। इससे वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताएं भी औपचारिकता बनकर रह गई हैं। कई स्कूलों में खेल सामग्री पुरानी और अनुपयोगी हो चुकी है, लेकिन नई सामग्री खरीदने के लिए राशि नहीं है। मैदानों की स्थिति भी खराब होती जा रही है।

गिनती के बचे पीटीआइ

स्कूल शिक्षा विभाग में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों (पीटीआइ) की भारी कमी है। लंबे समय से नई नियुक्तियां नहीं होने से स्कूलों में खेल गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। जिले में कुल पांच पीटीआइ पदस्थ हैं, जिनमें से दो कार्यालय में तैनात हैं और केवल तीन ही स्कूलों में बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इन तीन में से दो पीटीआइ अगले वर्ष सेवानिवृत्त हो जाएंगे। ऐसे में स्कूलों में खेल सिखाने वाले शिक्षकों की संख्या और घट जाएगी। कई स्कूलों में बच्चे बिना प्रशिक्षक के अपने स्तर पर ही खेलते हैं, जिससे उनकी प्रतिभा सही दिशा में विकसित नहीं हो पाती। बेहतर प्रशिक्षण के लिए अनेक छात्र निजी खेल अकादमियों का सहारा ले रहे हैं और वहीं अभ्यास कर बाद में स्कूल टीम में चयन पाते हैं। यदि जल्द नई नियुक्तियां नहीं हुईं तो स्कूल खेल व्यवस्था और कमजोर हो सकती है।

स्थिति उत्साहजनक नहीं

बताया जा रहा है कि दो वर्ष बाद ही एक बार प्रशिक्षण शिविर के लिए सीमित बजट मिलता है, जिससे केवल चुङ्क्षनदा खिलाड़ियों को ही लाभ मिल पाता है। नियमित प्रशिक्षण के अभाव में ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ी पीछे रह जाते हैं।

कई स्कूल स्पोर्ट्स फीस नहीं जमा कराते हैं, इसलिए उन स्कूलों के बच्चे प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाते हैं। प्रतियोगिता आयोजित कराने के लिए समय पर बजट उपलब्ध नहीं होता है, जिससे परेशानी होती है। संभाग स्तरीय टीम ले जाने वाले कोच और मैनेजर को पिछले साल का भुगतान नहीं हो सका है। स्कूलों में पीटीआइ की नियुक्तियां नहीं होने से स्कूलों में नियमित खेल पीरिएड नहीं लग पा रहा है।
आरके सिंह, जिला क्रीड़ा अधिकारी, शिक्षा विभाग, ग्वालियर

Updated on:
19 Mar 2026 05:43 pm
Published on:
19 Mar 2026 05:42 pm
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