
Ready-Made Garment Park gwalior
ग्वालियर. ग्वालियर के कपड़ा कारोबार को नई उड़ान देने के लिए मुरैना रोड पर तैयार किया गया रेडीमेड गारमेंट पार्क का सपना 10 साल बाद भी बदहाली के आंसू रो रहा है। सरकार के 20 करोड़ रुपए और 10 हेक्टेयर जमीन तैयार कर दी, लेकिन पार्क की 224 में से 190 यूनिट्स का आज भी कहीं अता-पता नहीं है। आलम यह है कि जो 104 प्लॉट्स आवंटित हुए, उनमें से आधे से ज्यादा पर ईंट तक नहीं रखी गई। मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एमपीआइडीसी) की ओर से इस संबंध में कई बार प्रयास भी किए गए लेकिन शायद कारोबारी यहां जाना ही नहीं चाहते। देश के अलग-अलग शहरों के कारोबारियों सहित ग्वालियर के कारोबारियों को गारमेंट पार्क तक लाने के प्रयास किए गए लेकिन उसमें सफलता हासिल नहीं हो पाई। वहीं शहर में भर में रेडीमेड गारमेंट के कई छोटे-बड़े उद्योग काम कर रहे हैं, हालांकि कुछ कारोबारियों का मानना है कि रेडीमेड गारमेंट पार्क के विकसित होने में सबसे बड़ी परेशानी यहां कनेक्टिविटी का न होना है।
रेडीमेड गारमेंट पार्क में के प्रारंभिक दिनों में 129 कारोबारियों ने यहां प्लॉट बुक किए थे, उनमें से 79 ने 25 फीसदी पेनल्टी चुकाकर अपने-अपने प्लॉट सरेंडर भी कर दिए थे। गारमेंट पार्क को बसाने के लिए चैंबर और व्यापारियों के बीच बैठक भी हुई थी, इसके बाद व्यापारियों को नोटिस भी दिए गए थे। रेडीमेड कारोबारी मुकेश सांघी ने बताया, मैंनेे भी रेडीमेड गारमेंट पार्क में प्लॉट लिया था, लेकिन काफी समय तक वहां कुछ नहीं दिखा तो इसे बेच दिया।
रेडीमेड गारमेंट पार्क में काम करने वाले कारोबारी काफी समय तक यहां बिजली को लेकर भी परेशान हो चुके हैं। पूर्व में हर छोटी यूनिट्स को ट्रांसफॉर्मर लगाने के निर्देश दिए गए थे, बाद में इसे वापस ले लिया गया था। करीब पांच साल परेशानी झेलने के बाद यहां ट्रांसफॉर्मर लगने की परेशान दूर हो सकी थी।
रेडीमेड गारमेंट पार्क पर पूरा फोकस है। यहां बड़ी यूनिट्स लाने की मंशा है। हाल ही में मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली में हुए वस्त्र एवं गारमेंट निवेश आउटरीच कार्यक्रम में एमपीआइडीसी की ओर से ग्वालियर एवं चंबल संभाग में वस्त्र एवं गारमेंट क्षेत्र में उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी प्रदान की गई थी। उद्यमियों ने यहां यूनिट्स लगाने में रुचि दिखाई है। शहर के जितने कारोबारी यहां आना थे, वो आ चुके हैं, अब हम दिल्ली-नोएडा के लोगों को यहां लाना चाहते हैं।
ग्वालियर में करीब 300 छोटी-बड़़ी यूनिट्स काम कर रही हैं। गारमेंट पार्क में लोगों के नहीं पहुंचने के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां कनेक्टिविटी की समस्या है। यहां तक पहुंचने वाले रास्ते भीड़भाड़ वाले हैं। एलिवेटेड रोड बनने के बाद लोग यहां पहुंचने लगेंगे। मुझे लगता है एलिवेटेड रोड बनने के बाद वहां कोई भी यूनिट नहीं मिलेगी। 10 साल से अधिक का समय हो चुका है लेकिन अभी तक रेडीमेड गारमेंट पार्क पूरी तरह फुल नहीं हो पाया है।
Published on:
11 May 2026 05:35 pm
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