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सरकारी जिद या निवेश की बर्बादी? 224 प्लॉट, 10 साल का इंतजार…पर 190 यूनिट्स का अब भी अता-पता नहीं!, अब दिल्ली-नोएडा के निवेशकों पर ‘डोरे’

ग्वालियर के कपड़ा कारोबार को नई उड़ान देने के लिए मुरैना रोड पर तैयार किया गया रेडीमेड गारमेंट पार्क का सपना 10 साल बाद भी बदहाली के आंसू रो रहा है। सरकार के 20 करोड़ रुपए और 10 हेक्टेयर जमीन तैयार

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Ready-Made Garment Park gwalior

Ready-Made Garment Park gwalior

ग्वालियर. ग्वालियर के कपड़ा कारोबार को नई उड़ान देने के लिए मुरैना रोड पर तैयार किया गया रेडीमेड गारमेंट पार्क का सपना 10 साल बाद भी बदहाली के आंसू रो रहा है। सरकार के 20 करोड़ रुपए और 10 हेक्टेयर जमीन तैयार कर दी, लेकिन पार्क की 224 में से 190 यूनिट्स का आज भी कहीं अता-पता नहीं है। आलम यह है कि जो 104 प्लॉट्स आवंटित हुए, उनमें से आधे से ज्यादा पर ईंट तक नहीं रखी गई। मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एमपीआइडीसी) की ओर से इस संबंध में कई बार प्रयास भी किए गए लेकिन शायद कारोबारी यहां जाना ही नहीं चाहते। देश के अलग-अलग शहरों के कारोबारियों सहित ग्वालियर के कारोबारियों को गारमेंट पार्क तक लाने के प्रयास किए गए लेकिन उसमें सफलता हासिल नहीं हो पाई। वहीं शहर में भर में रेडीमेड गारमेंट के कई छोटे-बड़े उद्योग काम कर रहे हैं, हालांकि कुछ कारोबारियों का मानना है कि रेडीमेड गारमेंट पार्क के विकसित होने में सबसे बड़ी परेशानी यहां कनेक्टिविटी का न होना है।

पूर्व में सरेंडर कर चुके प्लॉट

रेडीमेड गारमेंट पार्क में के प्रारंभिक दिनों में 129 कारोबारियों ने यहां प्लॉट बुक किए थे, उनमें से 79 ने 25 फीसदी पेनल्टी चुकाकर अपने-अपने प्लॉट सरेंडर भी कर दिए थे। गारमेंट पार्क को बसाने के लिए चैंबर और व्यापारियों के बीच बैठक भी हुई थी, इसके बाद व्यापारियों को नोटिस भी दिए गए थे। रेडीमेड कारोबारी मुकेश सांघी ने बताया, मैंनेे भी रेडीमेड गारमेंट पार्क में प्लॉट लिया था, लेकिन काफी समय तक वहां कुछ नहीं दिखा तो इसे बेच दिया।

पांच साल से अधिक ट्रांसफॉर्मर के लिए हुए थे परेशान

रेडीमेड गारमेंट पार्क में काम करने वाले कारोबारी काफी समय तक यहां बिजली को लेकर भी परेशान हो चुके हैं। पूर्व में हर छोटी यूनिट्स को ट्रांसफॉर्मर लगाने के निर्देश दिए गए थे, बाद में इसे वापस ले लिया गया था। करीब पांच साल परेशानी झेलने के बाद यहां ट्रांसफॉर्मर लगने की परेशान दूर हो सकी थी।

रेडीमेड कारोबार का टर्नओवर 300 करोड़

  • शहर में छोटी-बड़ी 300 से अधिक यूनिट कर रहीं काम।
  • रेडीमेड कारोबार का सालाना टर्नओवर करीब 300 करोड़ रुपए।
  • ग्वालियर में बनने वाले कपड़े इंदौर, मुंबई, दिल्ली, मथुरा, आगरा, फरीदाबाद, गुरुग्राम आदि जगहों पर जाते हैं।

रेडीमेड गारमेंट पार्क के हाल

  • कुल प्लॉट : 224 (क्षेत्रफल : 1,97,900 वर्गमीटर)
  • आवंटित प्लॉट : मात्र 104
  • रिक्त प्लॉट : 120 (50 फीसदी से अधिक हिस्सा वीरान)
  • जमीनी स्थिति : जिन 104 उद्यमियों को प्लॉट मिले भी हैं, उनमें से अधिकांश ने अब तक कोई इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा नहीं किया है।

गारमेंट पार्क पर पूरा फोकस, दिल्ली-नोएडा के कारोबारी लाएंगे

रेडीमेड गारमेंट पार्क पर पूरा फोकस है। यहां बड़ी यूनिट्स लाने की मंशा है। हाल ही में मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली में हुए वस्त्र एवं गारमेंट निवेश आउटरीच कार्यक्रम में एमपीआइडीसी की ओर से ग्वालियर एवं चंबल संभाग में वस्त्र एवं गारमेंट क्षेत्र में उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी प्रदान की गई थी। उद्यमियों ने यहां यूनिट्स लगाने में रुचि दिखाई है। शहर के जितने कारोबारी यहां आना थे, वो आ चुके हैं, अब हम दिल्ली-नोएडा के लोगों को यहां लाना चाहते हैं।

  • अनीशा श्रीवास्तव, कार्यकारी निदेशक, एमपीआइडीसी

कनेक्टिविटी की समस्या सबसे बड़ी है

ग्वालियर में करीब 300 छोटी-बड़़ी यूनिट्स काम कर रही हैं। गारमेंट पार्क में लोगों के नहीं पहुंचने के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां कनेक्टिविटी की समस्या है। यहां तक पहुंचने वाले रास्ते भीड़भाड़ वाले हैं। एलिवेटेड रोड बनने के बाद लोग यहां पहुंचने लगेंगे। मुझे लगता है एलिवेटेड रोड बनने के बाद वहां कोई भी यूनिट नहीं मिलेगी। 10 साल से अधिक का समय हो चुका है लेकिन अभी तक रेडीमेड गारमेंट पार्क पूरी तरह फुल नहीं हो पाया है।

  • अशोक चावला, सचिव, रेडीमेड गारमेंट मैन्यूफ्रेक्चरिंग एसोसिएशन ग्रेटर ग्वालियर