
Gwalior News :मध्य प्रदेश के ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहा कानूनी संघर्ष अब तीखे मोड़ पर पहुंच गया है। सोमवार को अतिरिक्त सत्र न्यायालय में सुनवाई हुई तो केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की तीनों बुआओं वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने अपनी बड़ी बहन (दिवंगत पद्मावती राजे) की बेटी प्रतिमा देवी राना के दावों को सिरे से खारिज कर दिया।
बुआओं ने अदालत में बंद लिफाफे में अपना जवाब पेश कर आरोप लगाया कि, प्रतिमा देवी ने पहली बार कोर्ट में उपस्थित हुईं प्रतिमा देवी राना संपत्ति बंटवारे की प्रक्रिया से खुद को दूर रखने के लिए पूर्व में लिखित सहमति दी थी। अब वे उस सहमति से मुकर रही हैं, जो सीधे तौर पर अदालत को गुमराह करने और धोखाधड़ी का मामला है। इसलिए उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण चलाया जाना चाहिए।
कानूनी जानकारों का मानना है कि कोर्ट ने प्रतिमा देवी के सहमति पत्र को किसी कारणवश विवादास्पद पाया, तो आपसी सहमति से हुआ करोड़ों का यह पूरा राजीनामा निरस्त हो सकता है। फिलहाल, कोर्ट ने सभी को जवाब का अवलोकन करने का समय दिया है और अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की गई है।
सुनवाई के दौरान प्रतिमा देवी राना खुद भी न्यायालय में उपस्थित हुईं। चूंकि वे सिंधिया परिवार की सबसे बड़ी बेटी (पद्मावती राजे) की वारिस हैं, इसलिए उनका दावा पूरे बंटवारे को चुनौती देने की ताकत रखता है। हालांकि, मौसियों के कड़े रुख और उन पर आपराधिक कार्रवाई की मांग इस मामले को एक नई कानूनी दिशा दे दी है। दोनों पक्ष अब एक-दूसरे के जवाब की कॉपी मांग रहे हैं, जिससे साफ है कि यह लड़ाई लंबी खिंचेगी।
मूल रूप से वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ पैतृक संपत्ति में अपना न्यायसंगत हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था। लंबे कानूनी संघर्ष और विचार-विमर्श के बाद सभी मुख्य पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर अदालत में पेश किया गया था, जिससे ये उम्मीद जागी थी कि, विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकलेगा। हालांकि, कानूनी पेंच उस समय फंस गया, जब मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों—कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार तो बनाया गया, लेकिन पूर्व की सुनवाइयों के दौरान उनके उपस्थित न होने पर अदालत ने उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।
जैसे ही संपत्ति के इस समझौता प्रस्ताव पर सकारात्मक दिशा में बात आगे बढ़ी तो वैसे ही प्रतिमा देवी ने अदालत में एक नया आवेदन दाखिल कर दिया। उन्होंने कानूनी प्रक्रिया में दोबारा शामिल होने और इस समझौते में अपने हिस्से का अधिकार पाने की पुरजोर गुहार लगा दी। चूंकि दिवंगत पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, इसलिए उनकी बेटियों को शुरुआती दौर में कानूनी प्रक्रिया से बाहर रखने और अब उनके द्वारा हक मांगने से ये पूरा राजीनामा कानूनी रूप से काफी पैचीदा हो गया, जिसे लेकर अब न्यायालय में तीखी कानूनी बहस चल रही है।