
ग्वालियर. गुणवत्ता के बड़े-बड़े दावों के विपरीत अमानक (घटिया) स्तर का धान बीज बेचकर मेहनत करने वाले किसान को नुकसान पहुंचाना एक बीज निर्माता कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (कंज्यूमर कोर्ट) ने किसान के हक में फैसला सुनाते हुए महाराजपुरा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित उन्नत सीड्स एग्रीटेक को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। 45 दिन में किसान को हर्जाना चुकाना होगा। कोर्ट ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह किसान को बीज की आधी राशि वापस करे और साथ ही मानसिक प्रताड़ना व कानूनी खर्च का हर्जाना भी चुकाए। मामले के अनुसार, पीड़ित किसान दीपेंद्र सिंह कौरव ने उन्नत सीड्स एग्रीटेक से धान की किस्म पीबी 1885 का बीज खरीदा था। बीज बेचते समय कंपनी ने दावा किया था कि खेत में बीज का अंकुरण कम से कम 85 प्रतिशत होगा। लेकिन जब किसान ने खेत में रोपाई की, तो मात्र 50 से 55 फीसदी बीज ही अंकुरित हुए। परेशान होकर किसान ने कृषि विभाग से शिकायत की। विभाग के वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी ने मौके पर जाकर मुआयना किया और पंचनामा बनाया, जिसमें अंकुरण महज 50-55% ही पाया गया। कम अंकुरण से किसान को दोबारा नर्सरी तैयार करनी पड़ी, जिससे उसे भारी आर्थिक चपत लगी।
रसीद नहीं एस्टीमेट था…कंपनी की दलील कोर्ट में ध्वस्त
मामला जब उपभोक्ता आयोग पहुंचा, तो कंपनी ने अपनी गर्दन बचाने के लिए अजीबोगरीब दलील दी। कंपनी के वकीलों ने कहा कि किसान को जो पर्ची दी गई थी, वह सिर्फ एस्टीमेट (अनुमानित बिल) थी, बीज बेचा ही नहीं गया था। हालांकि, आयोग ने जब दस्तावेजों की जांच की, तो पर्ची पर 15,000 नकद प्राप्त साफ-साफ दर्ज था। इसके अलावा, कृषि विभाग द्वारा जारी नोटिस का भी कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया था। आयोग ने कंपनी की दलीलों को अपने दायित्वों से भागने का अनुचित प्रयास माना और कंपनी पर जुर्माना ठोक दिया।
उपभोक्ता आयोग का फैसला
बीज की रकम वापसी: 15,000 का 50% किसान को लौटाए जाएं।
मानसिक क्षतिपूर्ति: मानसिक व शारीरिक कष्ट के 3,000 दिए जाएं।
वाद व्यय (केस खर्च): केस लड़ने में हुए खर्च के तौर पर 1,500 दिए जाएं।