
नाप-तौल के नियमों में बदलाव के साथ प्रस्तावित शुल्क वृद्धि ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। मध्यप्रदेश में विधिक माप विज्ञान से जुड़े रजिस्ट्रेशन के लिए प्रस्तावित नई फीस को लेकर व्यापारियों ने सवाल उठाए हैं।
ग्वालियर. नाप-तौल के नियमों में बदलाव के साथ प्रस्तावित शुल्क वृद्धि ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। मध्यप्रदेश में विधिक माप विज्ञान से जुड़े रजिस्ट्रेशन के लिए प्रस्तावित नई फीस को लेकर व्यापारियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश में प्रस्तावित शुल्क कई गुना अधिक है, ऐसे में इसका सीधा असर कारोबार की लागत पर पड़ेगा। इसी मुद्दे पर मंगलवार शाम ‘चैंबर भवन’ में व्यापारियों के साथ परिचर्चा आयोजित की गई। बैठक में मध्यप्रदेश विधिक मापविज्ञान नियम, 2011 में प्रस्तावित संशोधनों के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा हुई और व्यापारियों से आपत्तियां व सुझाव लिए गए। संचालन मानसेवी सचिव दीपक अग्रवाल ने किया। संयुक्त अध्यक्ष सुरेश बंसल, उपाध्यक्ष संदीप नारायण अग्रवाल सहित कार्यकारिणी समिति के सदस्य और व्यापारी मौजूद रहे।
निर्माता से व्यापारी तक… प्रस्तावित फीस ने बढ़ाई चिंता
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा रजिस्ट्रेशन शुल्क को लेकर रही। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार विनिर्माता के लिए 1.50 लाख रुपए, व्यापारी के लिए 1 लाख रुपए और मरम्मतकर्ता के लिए 50 हजार रुपए शुल्क प्रस्तावित किया गया है। व्यापारियों ने इसे अत्यधिक बताते हुए पड़ोसी राज्यों की फीस से तुलना की। व्यापारियों के मुताबिक उत्तरप्रदेश में यही शुल्क विनिर्माता के लिए 7,500 रुपए तथा व्यापारी और मरम्मतकर्ता के लिए 1,500 रुपए है। छत्तीसगढ़ में विनिर्माता के लिए 10 हजार तथा व्यापारी और मरम्मतकर्ता के लिए 1,000 रुपए निर्धारित हैं। राजस्थान में विनिर्माता के लिए 25 हजार और व्यापारी व मरम्मतकर्ता के लिए 10 हजार रुपए फीस बताई गई। व्यापारियों का तर्क था कि जब आसपास के राज्यों में शुल्क इतना कम है तो मध्यप्रदेश में कई गुना अधिक फीस प्रस्तावित करने का औचित्य क्या है? उनका कहना था कि प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करने से पहले इसके आर्थिक प्रभाव पर भी विचार किया जाना चाहिए।
30 दिन में आपत्तियां, चैंबर्स भी होंगे साथ
बैठक में अध्यक्ष डॉ.प्रवीण अग्रवाल ने बताया कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, मध्यप्रदेश ने 31 जुलाई को मध्यप्रदेश राजपत्र में संशोधन का प्रारूप प्रकाशित कर 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसी के मद्देनजर व्यापारियों के सुझावों को संकलित किया गया। बैठक में तय किया गया कि रजिस्ट्रेशन फीस सहित अन्य प्रस्तावित प्रावधानों में संशोधन की मांग को लेकर विभाग को शीघ्र आपत्तियां भेजी जाएंगी। साथ ही प्रदेश के अन्य चैंबर्स के माध्यम से भी इन आपत्तियों को भेजने का आव्हान किया जाएगा।
Updated on:
18 Aug 2026 07:31 pm
Published on:
18 Aug 2026 07:30 pm
