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एमएलबी में अंग्रेजी का सबसे ज्यादा क्रेज, इतिहास ने भी तोड़े दाखिले के आंकड़े

14 अगस्त तक कॉलेज के विभिन्न पाठ्यक्रमों में कुल 3503 सीटों में से 3336 सीटों पर प्रवेश हो चुका है। अब केवल 169 सीटें रिक्त हैं। विषयवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पारंपरिक विषयों में विद्यार्थियों की रुचि अब भी मजबूत बनी हुई है। खास तौर पर अंग्रेजी ने विद्यार्थियों को सबसे अधिक आकर्षित किया है, जबकि इतिहास में निर्धारित क्षमता से भी अधिक प्रवेश दर्ज किए गए हैं।
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महारानी लक्ष्मीबाई कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय (एमएलबी) में सत्र 2026-27 के प्रवेश आंकड़ों ने विद्यार्थियों की विषय पसंद का दिलचस्प ट्रेंड सामने रखा है। (पत्रिका सोर्स)

3503 में से 3336 सीटें फुल; बीए अंग्रेजी-हिंदी की सभी सीटें भरीं, इतिहास में क्षमता से दो अधिक प्रवेश

ग्वालियर. महारानी लक्ष्मीबाई कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय (एमएलबी) में सत्र 2026-27 के प्रवेश आंकड़ों ने विद्यार्थियों की विषय पसंद का दिलचस्प ट्रेंड सामने रखा है। 14 अगस्त तक कॉलेज के विभिन्न पाठ्यक्रमों में कुल 3503 सीटों में से 3336 सीटों पर प्रवेश हो चुका है। अब केवल 169 सीटें रिक्त हैं। विषयवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पारंपरिक विषयों में विद्यार्थियों की रुचि अब भी मजबूत बनी हुई है। खास तौर पर अंग्रेजी ने विद्यार्थियों को सबसे अधिक आकर्षित किया है, जबकि इतिहास में निर्धारित क्षमता से भी अधिक प्रवेश दर्ज किए गए हैं।

अंग्रेजी-हिंदी की सभी सीटें फुल

बीए में अंग्रेजी और हिंदी दोनों विषयों की सभी सीटों पर प्रवेश हो चुका है। अंग्रेजी की 140 में से 140 और हिंदी की 140 में से 140 सीटें भर चुकी हैं। इसके अलावा भूगोल की 100, मिलिट्री साइंस की 100, दर्शनशास्त्र की 50, राजनीति विज्ञान की 165 और समाजशास्त्र की 120 सीटों पर भी शत-प्रतिशत प्रवेश हो चुका है। इन आंकड़ों से साफ है कि रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ पारंपरिक सामाजिक विज्ञान विषयों में भी विद्यार्थियों की रुचि बनी हुई है। कॉलेज में बीए के कई अन्य विषयों में भी प्रवेश लगभग पूरा हो चुका है।

इतिहास में क्षमता से दो अधिक दाखिले

प्रवेश आंकड़ों में सबसे रोचक स्थिति इतिहास विषय की है। यहां निर्धारित 190 सीटों के मुकाबले 192 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। यानी स्वीकृत सीट क्षमता से दो अधिक प्रवेश दर्ज हुए हैं। इसके अलावा अर्थशास्त्र, फंक्शनल इंग्लिश सहित कई अन्य विषयों में भी उपलब्ध सीटों पर प्रवेश पूरा हो चुका है। इतिहास में सीटों से अधिक प्रवेश का आंकड़ा इस बात का संकेत है कि विद्यार्थियों के बीच इस विषय की मांग बनी हुई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए इतिहास महत्वपूर्ण विषय माना जाता है, जिसका असर प्रवेश के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है।

कॉमर्स में 1215 सीटें भरीं, लॉजिस्टिक्स पीछे

कॉमर्स संकाय में कुल 1270 सीटों में से 1215 सीटें भर चुकी हैं। हालांकि सभी पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की समान रुचि नहीं दिखाई दी। बीकॉम और बीकॉम कंप्यूटर की सभी सीटें भर गई हैं, जबकि बीकॉम लॉजिस्टिक्स में 100 सीटों में से सिर्फ 46 पर प्रवेश हुआ है। इस पाठ्यक्रम में 54 सीटें रिक्त हैं। बीकॉम बीएफएसआई में भी एक सीट खाली है। इससे पता चलता है कि विद्यार्थियों का झुकाव पारंपरिक कॉमर्स पाठ्यक्रमों की ओर अपेक्षाकृत अधिक रहा है।

एम.लिब में 40 में सिर्फ 10 प्रवेश

स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में एमए की कुल 730 सीटों में से 662 पर प्रवेश हुआ है और 68 सीटें रिक्त हैं। वहीं एम.लिब में विद्यार्थियों की रुचि अपेक्षाकृत कम रही। 40 सीटों में से केवल 10 सीटों पर प्रवेश हुआ है, जबकि 30 सीटें अभी खाली हैं। इसके विपरीत बी.लिब की सभी 60 सीटें भर चुकी हैं।

कुछ विषयों में अब भी मौका

एमएलबी के एडमिशन कोऑर्डिनेटर डॉ. रियाज अली ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया में विद्यार्थियों की विषयवार पसंद में काफी अंतर देखने को मिला है। अंग्रेजी, हिंदी, राजनीति विज्ञान, इतिहास, भूगोल और समाजशास्त्र जैसे विषयों में विद्यार्थियों की अच्छी रुचि रही और अधिकांश सीटें भर गईं। वहीं कुछ नए एवं विशेष पाठ्यक्रमों में अभी सीटें रिक्त हैं। प्रवेश आंकड़े कॉलेज में विद्यार्थियों की बदलती शैक्षणिक प्राथमिकताओं की तस्वीर भी सामने ला रहे हैं।