
ग्वालियर. ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों पर नकेल कसने के लिए राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। जीआरपी के सुरक्षा दस्ते में पहली बार विशेष रूप से प्रशिक्षित नारकोटिक डॉग 'चिंकी प्रो. को तैनात किया गया है। यह डॉग गांजा, अफीम, चरस और स्मैक जैसे मादक पदार्थों की गंध पहचानने में प्रशिक्षित है। जीआरपी के पास अब तक केवल 'डेक्सी' नाम का डॉग था, जो बम डिस्पोजल और सुरक्षा जांच में इस्तेमाल किया जाता है। साढ़े पांच साल का डेक्सी लंबे समय से स्टेशन पर चेकिंग के दौरान तैनात रहा है। अब चिंकी प्रो के शामिल होने से मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ जांच और प्रभावी होने की उम्मीद है।
चिंकी प्रो की हैंडलिंग और देखरेख की जिम्मेदारी जीआरपी के आरक्षक संदीप सिंह परिहार को सौंपी गई है। प्रशिक्षण के बाद से ही दोनों के बीच बेहतर तालमेल है। यह जोड़ी स्टेशन के प्लेटफॉर्म, अराइवल-डिपार्चर क्षेत्र और लंबी दूरी की ट्रेनों में नियमित जांच कर रही है।
अचूक सूंघने की क्षमता
चिंकी प्रो को मादक पदार्थों की गंध पहचानने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। बंद सूटकेस, पार्सल या ट्रेन की बोगियों में छिपाकर रखे गए नशीले पदार्थों का भी यह पता लगा सकता है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म, पार्सल घर और ट्रेनों में सघन जांच अभियान के दौरान इसकी मदद ली जा रही है।
60 हजार से ज्यादा यात्रियों का आना-जाना
ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन 60 हजार से अधिक यात्रियों का आना-जाना होता है। त्योहारी सीजन में यह संख्या और बढ़ जाती है। ऐसे में नारकोटिक डॉग की तैनाती से यात्रियों के सामान की जांच और मादक पदार्थों की तस्करी रोकने में जीआरपी को मदद मिलेगी।
जांच मजबूत होगी
भोपाल से प्रशिक्षण लेने के बाद हमें चिंकी प्रो मिला है। यह विशेष रूप से मादक पदार्थों की गंध पहचानने के लिए प्रशिक्षित है। अब यह हमारी चेकिंग का अहम हिस्सा बन गया है और आने वाले दिनों में स्टेशन की सुरक्षा व जांच व्यवस्था को और मजबूत करेगा।
दीपशिखा सिंह तोमर, टीआइ, जीआरपी