ग्वालियर

चीन को हराने का दबाव था, आंखों में ओलंपिक का सपना: इशिका

दबाव बहुत था, लेकिन भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ियों की आंखों में एक ही सपना था—देश के लिए इतिहास रचना। इसी जुनून, आपसी भरोसे और मैदान पर बेहतरीन तालमेल के दम पर भारतीय टीम ने चीन को हराकर 44 साल का इंतजार खत्म किया और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
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Ishika Chaudhary
एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम की सदस्य इशिका चौधरी रविवार को जापान से ग्वालियर पहुंचीं।

ग्वालियर. चीन के खिलाफ एशियन गेम्स का फाइनल... सामने मजबूत प्रतिद्वंद्वी और दांव पर सिर्फ स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि ओलंपिक का टिकट भी। दबाव बहुत था, लेकिन भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ियों की आंखों में एक ही सपना था—देश के लिए इतिहास रचना। इसी जुनून, आपसी भरोसे और मैदान पर बेहतरीन तालमेल के दम पर भारतीय टीम ने चीन को हराकर 44 साल का इंतजार खत्म किया और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। एशियन गेम्स में स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम की सदस्य इशिका चौधरी रविवार को जापान से ग्वालियर पहुंचीं। यहां हॉकी एकेडमी की खिलाड़ियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। घर लौटने के बाद इशिका ने ‘पत्रिका’ से बातचीत में इस ऐतिहासिक जीत के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि फाइनल में दबाव जरूर था, लेकिन टीम के हर खिलाड़ी की नजर ओलंपिक के सपने पर थी।

सवाल : चीन के खिलाफ फाइनल में सबसे ज्यादा दबाव किस बात का था?

इशिका : फाइनल मुकाबले में दबाव बहुत था। चीन जैसी मजबूत टीम के खिलाफ जीतना आसान नहीं था। हम सभी जानती थीं कि यह मुकाबला हमारे लिए कितना अहम है। सिर्फ स्वर्ण पदक ही लक्ष्य नहीं था, बल्कि ओलंपिक का टिकट भी दांव पर था। इसी लक्ष्य के साथ हम मैदान पर उतरीं। हर खिलाड़ी ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और टीम के भरोसे ने हमें जीत तक पहुंचाया।

सवाल : टीम में चयन के समय ही स्वर्ण पदक का सपना देखा था?

इशिका : बिल्कुल। जब एशियन गेम्स के लिए टीम में चयन हुआ, तभी मन में था कि देश के लिए स्वर्ण जीतना है। 44 साल से भारतीय महिला हॉकी जिस उपलब्धि का इंतजार कर रही थी, उसे हासिल करने का मौका हमारे सामने था। यह हमारे लिए सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं था, बल्कि देश और भारतीय महिला हॉकी के लिए इतिहास बनाने का अवसर था। पूरी टीम ने एक-दूसरे पर भरोसा किया। मैदान पर हमारा तालमेल ही सबसे बड़ी ताकत बना।

सवाल : इस स्वर्ण पदक ने टीम के लिए क्या बदला है?

इशिका : इस जीत से ओलंपिक के दरवाजे खुल गए हैं। क्वालीफाइंग मुकाबलों का अतिरिक्त दबाव अब नहीं रहेगा। इससे हमें अपनी तैयारियों के लिए ज्यादा समय मिलेगा। अब हमारा फोकस अपनी कमजोरियों को दूर करने और खेल को अगले स्तर तक ले जाने पर रहेगा। यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है, लेकिन हमें यहीं रुकना नहीं है।

सवाल : अब अगला लक्ष्य क्या है?

इशिका : एशियन गेम्स का स्वर्ण हमारे लिए मंजिल नहीं, नई शुरुआत है। अब सपना ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम को चैंपियन बनाना है। देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे को सबसे ऊंचा लहराते देखना चाहती हूं। इसके लिए पूरी टीम को अभी और मेहनत करनी है। एशियन गेम्स की जीत ने विश्वास दिया है कि हम बड़े मंच पर भी देश का सपना पूरा कर सकते हैं।

Updated on:
05 Oct 2026 09:37 pm
Published on:
05 Oct 2026 09:37 pm