ग्वालियर

स्टेशनों पर ‘जनता’ ढूंढे अपना खाना, वेंडरों की दबंगई के आगे बेबस रेलवे

रेलवे बोर्ड यात्रियों को किफायती दर पर भोजन उपलब्ध कराने के भले ही बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। झांसी रेल मंडल के प्रमुख स्टेशनों झांसी, ग्वालियर, दतिया
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Updated: 20 May 2026, 5:52 PM IST
janta khana
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ग्वालियर . रेलवे बोर्ड यात्रियों को किफायती दर पर भोजन उपलब्ध कराने के भले ही बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। झांसी रेल मंडल के प्रमुख स्टेशनों झांसी, ग्वालियर, दतिया, डबरा और मुरैना पर इन दिनों एक अजीब सी स्थिति बनी हुई है। यात्रा करने वाली आम जनता अपने हक का किफायती भोजन यानी जनता खाना ढूंढने से भी नहीं पा रही है। रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर छोटे-बड़े स्टेशन के खान-पान स्टॉलों पर 15 रुपए वाला जनता खाना अनिवार्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए। इसके बावजूद महीनों से इन स्टेशनों के वेंडर इस नियम को ठेंगा दिखा रहे हैं और रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। ये स्थिति भोपाल तक के रेलवे स्टेशनों तक बनी हुई है।

लाखों यात्री रोज करते हैं सफर

झांसी मंडल के इन प्रमुख स्टेशनों पर हर दिन करीब डेढ़ से दो लाख यात्रियों का आवागमन होता है। इनमें से एक बड़ी संख्या मध्यम और गरीब वर्ग के यात्रियों की होती है, जो महंगे रेस्टोरेंट या आईआरसीटीसी के महंगे फूड पैकेट्स खरीदने में सक्षम नहीं हैं। जब ये गरीब यात्री स्टेशनों पर उतरकर स्टॉलों पर 15 रुपए वाले जनता खाने के बारे में पूछताछ करते हैं, तो वेंडरों द्वारा उन्हें सीधे मना कर दिया जाता है या फिर स्टॉक न होने का बहाना बनाया जाता है। मजबूरन यात्रियों को जेब ढीली कर महंगा खाना खरीदना पड़ रहा है।

नियमों का पालन कराने में फेल साबित हो रहा रेलवे

रेलवे प्रशासन अपने ही बनाए कड़े नियमों का पालन इन स्टेशनों पर नहीं करा पा रहा है। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण स्टॉल संचालकों की मनमानी चरम पर है। वेंडर अधिक मुनाफे के चक्कर में कम कीमत वाला जनता खाना रखने से बचते हैं और यात्रियों को महंगा फूड आइटम खरीदने पर मजबूर करते हैं। भीषण गर्मी के इस मौसम में जब यात्री पहले से ही सफर की थकान और दिक्कतों से जूझ रहे हैं, भोजन के लिए इस तरह की किल्लत रेलवे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

अधिकारियों के निरीक्षण में अचानक दिखने लगता है खाना

इन सभी स्टेशनों पर आम दिनों में जनता खाना न के बराबर मिलता है। लेकिन जब भी किसी रेलवे अधिकारी का निरीक्षण (विंडो ट्रेलिंग या इंस्पेक्शन) होना होता है, तो इन स्टॉलों पर अचानक जनता खाना स्ट्रॉल पर दिखाई देने लगता है। इस तमाशे की पूरी जानकारी रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को भी है, लेकिन इन वेंडरों पर कोई सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, जिससे इनके हौसले बुलंद हैं।

जनता खाना में मेन्यू और वजन का यह है नियम

  • पूरी -175 ग्राम
  • सब्जी (आलू)- 150 ग्राम
  • अचार -15 ग्राम
  • कुल वजन - 340 ग्राम

यह है इन स्टेशनों की हर दिन की स्थिति (स्टॉल बनाम यात्री संख्या)

  • ग्वालियर - 8 स्टॉल — 62 हजार यात्री
  • झांसी - 21 स्टॉल — 58 हजार यात्री
  • मुरैना - 6 स्टॉल — 14 हजार यात्री
  • दतिया- 5 स्टॉल — 9 हजार यात्री
  • डबरा -5 स्टॉल — 7 हजार यात्री

इनका कहना है

जनता खाना वैसे तो सभी स्टेशनों के स्टॉलों पर उपलब्ध होना चाहिए। हालांकि बेहद छोटे स्टेशनों पर यात्री संख्या कम होने से वहां यह हमेशा उपलब्ध नहीं रहता, लेकिन बड़े स्टेशनों पर इसे रखना अनिवार्य है। इस भीषण गर्मी में यह खाना जल्दी खराब हो जाता है, यह भी एक व्यावहारिक दिक्कत है। हम समय-समय पर नियम तोडने वाले वेंडरों पर जुर्माना लगाकर कार्रवाई करते हैं। इस मामले में एक बार फिर विशेष अभियान चलाकर जांच करवाई जाएगी।
अमन वर्मा, सीनियर डीसीएम

Updated on:
20 May 2026, 5:52 PM IST
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