एक भाई अपनी बहन की डिग्री लेने के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटता रहा, लेकिन कुलपति सचिवालय में व्यस्त रहने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। पीडि़त का कहना था कि उसे डिग्री न सही पर कोई प्रूफ मिल जाता, जिससे वेरीफिकेशन होने में आसानी हो।
ग्वालियर.जीवाजीयूनिवर्सिटी डेढ़ साल बाद भीसत्र 2015-16 केछात्रों को डिग्री उपलब्धनहीं करा पाया है। दिल्ली सेआए सौरभ तिवारी अपनी बहन कीडिग्री लेने के लिए गुरुवारदोपहर अधिकारियों के दफ्तरोंके चक्कर काटते रहे, लेकिनउनके कुलपति सचिवालय मेंव्यस्त रहने के कारण सुनवाईनहीं हो सकी। पीडि़त का कहनाथा कि उसे डिग्री न सही पर कोईप्रूफ मिल जाता, जिससेवेरीफिकेशन होने में आसानीहो। वह अफसरों के सामने खूबगिड़गिड़ाया, लेकिन सौरभ को राहत नहीं मिल सकी।
दिल्लीनिवासी सौरभ तिवारी अपनी बहनजिसका दिल्ली के जल प्रदायबोर्ड में हाल में नौकरी केलिए सिलेक्शन हुआ है। उनकोवेरीफिकेशन के लिए एमबीए कीडिग्री चाहिए थी। बहन केप्रेंगनेंट होने के कारण सौरभखुद जेयू आए, लेकिनउन्हें किसी भी अधिकारी नेकोई रिस्पोंस नहीं दिया। अंतमें वे रजिस्ट्रार डॉ.आनंदमिश्रा के दफ्तर भी गए,लेकिन वेकुलपति सचिवालय में मीटिंगमें बिजी थे, इसलिएकर्मचारियों ने उनकी बात सुनेबिना चलता कर दिया। सूत्रोंके अनुसार फिलहाल जेयू के पाससत्र 2015-16 मेंपास आउट छात्रों की डिग्रियांनासिक से प्रिंट होकर नहींआई हैं, जिससेआवेदकों की नौकरी दांव पर लगीहै। ऐसे छात्रों की संख्या55 हजारके आसपास है।
डाटा उपलब्धन होने से आ रही दिक्कत
अधिकारियोंके अनुसार कॉलेज द्वारा डाटासमय पर न भेजने से यह दिक्कतआ रही है। सूत्रों का कहना हैसबसे ज्यादा दिक्कत सत्र2016-17 मेंपास आउट होने वाले छात्रोंको होने वाली है, क्योंकिपरीक्षा चार्टों में भारीगड़बड़ होने के कारण उनका डाटातैयार नहीं हो पा रहा है। विविजो प्रोविजनल सर्टिफिकेट भीदेता है तो उसकी अवधि छह माहहोती है। ऐसे में छात्र अपनीजॉब लेकर बेहद परेशान हैं।
बहन प्रेगनेंटहै इसलिए मैं डिग्री लेने आया
& बहन कोजॉब में वेरीफिकेशन के लिएडिग्री की जरूरत है। वह प्रेगनेंटहै इसलिए मैं दिल्ली से यहांआया हूं, लेकिनसंबंधित विभाग और अधिकारीडिग्री उपलब्ध कराने से इनकारकर रहे हैं। कुलसचिव कार्यालयगया तो वहीं भी राहत नहीं मिली।-सौरभतिवारी, पीडि़त