ग्वालियर

रिटायरमेंट के बाद भी ज्ञान बांटने का जुनून, मुफ्त में पढ़ा रहे गुरुजी, जरूरतमंद बच्चों की कॉपी-किताब का खर्च उठाते हैं, फीस भी नहीं लेते

आमतौर पर नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद लोग आराम की जिंदगी बिताते हैं। लेकिन शहर के कुछ रिटायर्ड गुरुजी ऐसे हैं, जिनके लिए रिटायरमेंट का मतलब बच्चों से दूरी नहीं, बल्कि उन्हें अधिक समय देना है। शिक्षक, प्राचार्य और बैंक अधिकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद भी पिछले छह साल से बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहे हैं। जरूरतमंद बच्चों की कॉपी-किताब और पढ़ाई से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं पर अपनी जेब से खर्च भी कर रहे हैं।
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Sep 03, 2026
छह साल से बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहे हैं
छह साल से बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहे हैं

ग्वालियर. आमतौर पर नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद लोग आराम की जिंदगी बिताते हैं। लेकिन शहर के कुछ रिटायर्ड गुरुजी ऐसे हैं, जिनके लिए रिटायरमेंट का मतलब बच्चों से दूरी नहीं, बल्कि उन्हें अधिक समय देना है। शिक्षक, प्राचार्य और बैंक अधिकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद भी पिछले छह साल से बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहे हैं। जरूरतमंद बच्चों की कॉपी-किताब और पढ़ाई से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं पर अपनी जेब से खर्च भी कर रहे हैं। शिक्षक दिवस 5 सितंबर को है, पत्रिका ने दो दिन पूर्व से ही मेरा गुरु मेरी सीख अभियान से शिक्षकों के जुनून पर प्रकाश डालना शुरू किया है। आज ऐसे शिक्षकों और समाजसेवियों से मिलवा रहे हैं, जिन्होंने नौकरी खत्म होने के बाद भी शिक्षा देने का काम नहीं छोड़ा। इनके लिए न वेतन है, न फीस और न किसी सम्मान की अपेक्षा। मकसद सिर्फ इतना है कि आर्थिक तंगी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई न रुके।

इनका रिटायरमेंट, बच्चों के भविष्य की शुरुआत
इन सभी की खासियत है कि वे बच्चों से कोई फीस नहीं लेते। इनका मानना है कि ज्ञान जितना बांटा जाए, उतना बढ़ता है। नौकरी के दौरान यह उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन अब बच्चों को पढ़ाना उनका जुनून बन गया है। बच्चों की सफलता ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है।

शिक्षा के बाजार में निस्वार्थ सेवा की मिसाल हैं ये चेहरे

  • राकेश कुमार पांडेय (सेवानिवृत्त प्राचार्य): सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए कभी हौव्वा रहे अंग्रेजी विषय को पांडेय आसान बना रहे हैं। वर्ष 2020 में रिटायर होने के बाद से वे बच्चों को मुफ्त में अंग्रेजी पढ़ा रहे हैं।
  • वेदरतन कुलश्रेष्ठ और मोहनलाल अहिरवार (सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी): शिक्षा सिर्फ शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं है, इसका उदाहरण ये दोनों हैं। वेदरतन बैंक मैनेजर के पद से रिटायर होने के बाद बिरला नगर स्टेशन के पास बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं। वहीं, यूको बैंक से सीनियर मैनेजर रहे मोहनलाल अहिरवार वर्ष 2023 से बच्चों की पाठशाला चला रहे हैं।
  • ओपी दीक्षित (सेवानिवृत्त व्याख्याता, डाइट): शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान से रिटायर होने के बाद दीक्षित ने जनवरी 2020 से बच्चों को पढ़ाने का संकल्प लिया, जिस पर वे आज भी कायम हैं।
  • हरिचरण प्रजापति (सेवानिवृत्त प्राथमिक शिक्षक): प्राथमिक शिक्षक के पद से रिटायर होने के बाद पिछले तीन साल से वे गरीब बच्चों की शिक्षा की नींव मजबूत कर रहे हैं।-कमल राठौर और कल्पना राठौर: कमल स्टोन पार्क वाली गली में बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जबकि कल्पना बदनापुरा क्षेत्र में छात्र-छात्राओं को शिक्षा देकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं।
Updated on:
03 Sept 2026 06:04 pm
Published on:
03 Sept 2026 06:02 pm