25 अक्टूबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Gwalior… उद्घाटन के 13 महीने बीते, एक ट्रायल भी हुआ, लेकिन नहीं शुरू हो सकी बसें

शहर को एयरपोर्ट की तर्ज पर आधुनिक इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आइएसबीटी) की सौगात मिले एक साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन जिस टर्मिनल से ग्वालियर सहित कई राज्यों के शहरों के लिए बस सेवा संचालित करने की योजना थी, वह अब भी यात्रियों और बसों का इंतजार कर रहा
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

ग्वालियर

•

image

Rizwan Khan

•

Updated: 2 Sep 2026, 5:51 PM IST

gwalior isbt

gwalior isbt

ग्वालियर. शहर को एयरपोर्ट की तर्ज पर आधुनिक इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आइएसबीटी) की सौगात मिले एक साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन जिस टर्मिनल से ग्वालियर सहित कई राज्यों के शहरों के लिए बस सेवा संचालित करने की योजना थी, वह अब भी यात्रियों और बसों का इंतजार कर रहा है। करीब 77 करोड़ रुपए की लागत से तैयार आइएसबीटी का उद्घाटन 5 जुलाई-2025 को मुख्यमंत्री ने किया था, लेकिन इसके बाद निजी बस ऑपरेटरों ने यहां से दूरी बना ली। अब स्थिति यह है कि करोड़ों रुपए का यह टर्मिनल अधिकांश समय वीरान नजर आता है।

आइएसबीटी को तैयार करने के पीछे उद्देश्य था कि ग्वालियर, मुरैना और ङ्क्षभड के साथ राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और दिल्ली सहित दूसरे राज्यों के प्रमुख शहरों के लिए बसें एक ही स्थान से मिल सकें। इससे शहर के अलग-अलग हिस्सों में संचालित बस अड्डों का दबाव कम होने और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन बस ऑपरेटरों के यहां से बसें नहीं चलाने के कारण योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।

ट्रायल भी हुई, लेकिन नहीं बनी बात

आइएसबीटी पर बस संचालन को लेकर करीब एक साल बाद ट्रायल भी कराई गई, लेकिन यह व्यवस्था आगे नहीं बढ़ सकी। निजी ऑपरेटरों का तर्क है कि शहर से आइएसबीटी की दूरी यात्रियों के लिए बड़ी समस्या है। यात्रियों को पहले शहर से टर्मिनल तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय और किराया खर्च करना पड़ेगा। इसके बाद उन्हें अपने गंतव्य की बस पकडऩी होगी।

मप्र रोडवेज यूनियन बस ऑपरेटर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बलवीर ङ्क्षसह तोमर का कहना है कि वर्तमान बस स्टैंड रेलवे स्टेशन के नजदीक होने से यात्रियों को आसानी रहती है। यात्री ट्रेन से उतरने के बाद आसानी से बस पकड़ लेते हैं। इसके विपरीत नया आइएसबीटी शहर से काफी दूर है। ऐसे में वहां पहुंचने का अतिरिक्त खर्च यात्रियों पर पड़ेगा।