ग्वालियर

ग्वालियर : हजार बिस्तर अस्पताल में एक्स-रे के लिए 6 मंजिल की दौड़

जयारोग्य अस्पताल के हजार बिस्तर वाले हाईटेक अस्पताल में इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्थाएं खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रही हैं। सरकार ने दावा किया था कि इस नए अस्पताल में मरीजों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
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Jun 09, 2026
X-ray
हजार बिस्तर अस्पताल

ग्वालियर . जयारोग्य अस्पताल के हजार बिस्तर वाले हाईटेक अस्पताल में इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्थाएं खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रही हैं। सरकार ने दावा किया था कि इस नए अस्पताल में मरीजों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों के परिजनों (तीमारदारों) को एक अदद एक्स-रे फिल्म के लिए अस्पताल की छठी मंजिल से लेकर ग्राउंड फ्लोर तक की अग्नि परीक्षा देनी पड़ रही है। करोड़ों रुपये की आधुनिक मशीनें जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण शो-पीस बनकर रह गई हैं।

टेक्नीशियन थमा देते हैं कैसेट, दौड़ती है जनता…

अस्पताल के वार्डों में ड्यूटी पर तैनात एक्स-रे टेक्नीशियन घोर लापरवाही बरत रहे हैं। टेक्नीशियन वार्ड या आइसीयू में आकर मरीज का डिजिटल एक्स-रे तो कर देता है, लेकिन फिल्म निकालने की जहमत नहीं उठाता। वह एक्स-रे की भारी-भरकम कैसेट सीधे मरीज के रोते-बिलखते परिजनों के हाथ में थमा देता है।

करोड़ों की आधुनिक मशीनें, फिर भी तीमारदार परेशान
गंभीर और आइसीयू में भर्ती मरीजों को वार्ड से बाहर न ले जाना पड़े, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन ने करोड़ों रुपए खर्च कर आधुनिक डिजिटल पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें खरीदी थीं। नियम और तकनीक यह कहती है कि टेक्नीशियन मरीज के बेड पर जाकर एक्स-रे करेगा और उसकी फिल्म तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि डॉक्टर जल्द से जल्द इलाज शुरू कर सकें। लेकिन हजार बिस्तर अस्पताल में जिम्मेदारों ने अपनी सुविधा के लिए एक नया और अमानवीय नियम बना लिया है।

मजबूरी…
अपने मरीज की जान बचाने के लिए परेशान अटेंडर उस कैसेट को हाथ में लेकर अस्पताल की पांचवीं और छठवीं मंजिल से नीचे ग्राउंड फ्लोर पर स्थित मुख्य रेडियोलॉजी विभाग की तरफ बदहवास होकर दौड़ता है। कई बार लिफ्ट खराब होने पर सीढ़ियों से भागने को मजबूर होते हैं।

एक्स-रे रीडर मशीन मुख्य रेडियोलॉजी विभाग (ग्राउंड फ्लोर) में ही स्थापित है। यही कारण है कि फिल्म ङ्क्षप्रट कराने के लिए परिजनों को वहां जाना पड़ता है। इस व्यवस्था में मरीजों की सुविधा के लिए और क्या बेहतर बदलाव किए जा सकते हैं, इस पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
डॉ. मनीष चतुर्वेदी, प्रवक्ता, जीआरएमसी

Updated on:
09 Jun 2026 06:18 pm
Published on:
09 Jun 2026 06:18 pm