जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में शुक्रवार को शहर की बदहाल सडक़ों और धीमी विकास योजनाओं को लेकर अधिकारियों की कड़ी क्लास लगी। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सागरताल रोड का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसा कोई दिन नहीं बचा है, जब यहां सडक़ न टूटती हो। कभी पानी […]
जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में शुक्रवार को शहर की बदहाल सडक़ों और धीमी विकास योजनाओं को लेकर अधिकारियों की कड़ी क्लास लगी। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सागरताल रोड का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसा कोई दिन नहीं बचा है, जब यहां सडक़ न टूटती हो। कभी पानी की लाइन फूट जाती है तो कभी सीवर लाइन। इन हालातों में हमें सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा होना पड़ता है। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार से फंड बड़ी मुश्किल से मिल रहा है, लेकिन उसका उपयोग जिस गंभीरता से होना चाहिए, वैसा नहीं हो रहा।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद भारत सिंह कुशवाह ने वर्ष 2022 में स्वीकृत सडक़ों के अब तक पूरे न होने पर सवाल खड़े किए। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि इन सडक़ों का निर्माण आखिर कब तक पूरा होगा और देरी के लिए जिम्मेदार कौन है। सांसद और ऊर्जा मंत्री दोनों ने विभिन्न योजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए कार्य एजेंसियों को समय-सीमा तय कर काम पूरा करने के निर्देश दिए।
चंबल पेयजल परियोजना को लेकर सांसद ने साफ निर्देश दिए कि पाइपलाइन बिछाने के काम में तेजी लाई जाए। उन्होंने कार्य एजेंसी को 15-15 दिन की कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने और दो शिफ्ट में काम कराने को कहा, ताकि शहरवासियों को जल्द से जल्द शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। ग्वालियर रेलवे स्टेशन के उन्नयन और सौंदर्यीकरण कार्य की धीमी रफ्तार पर भी सांसद ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि रेलवे के डायरेक्टर जनरल ऑफ ऑडिट को पत्र लिखकर बताया जाए कि काम की गति बेहद धीमी है और गुणवत्ता से भी समझौता किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कलेक्ट्रेट सभागार में हुई इस बैठक में अमृत भारत योजना के तहत रेलवे स्टेशन उन्नयन, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की निर्माणाधीन सडक़ें, ठाठीपुर पुनर्घनत्वीकरण योजना, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम, अटल स्मारक, प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना तथा एमपीआरडीसी और लोक निर्माण विभाग की सडक़ों की विस्तार से समीक्षा की गई।
अमृत 2.0 की प्रस्तावित कार्ययोजना की समीक्षा के दौरान निर्देश दिए गए कि पूरे ग्वालियर शहर की बस्तियों में पेयजल और सीवर लाइनों का समग्र नक्शा तैयार किया जाए। सांसद ने कहा कि सडक़ निर्माण से पहले सभी तरह की पाइपलाइन डालने का काम पूरा कर लिया जाए, ताकि बार-बार सडक़ खोदने की नौबत न आए।
इसके अलावा आगरा-ग्वालियर 6 लेन एक्सप्रेस-वे के काम में तेजी लाने, मुरार नदी उन्नयन की धीमी प्रगति पर कार्रवाई प्रस्ताव भेजने, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहर के चारों ओर नए आवासीय प्रोजेक्ट लेने, डामरीकृत की बजाय सीमेंट-कंक्रीट सडक़ों के प्रस्ताव तैयार करने, ग्रामीण सडक़ों के दोनों ओर सुनियोजित वृक्षारोपण कराने और जलभराव वाली बस्तियों में स्थायी समाधान के निर्देश भी बैठक में दिए गए।
-भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा बनाए जा रहे आगरा-ग्वालियर 6 लेन एक्सप्रेस-वे के काम में तेजी लाने के लिए वरिष्ठ अधिकारी उत्तरप्रदेश व राजस्थान के अधिकारियों से समन्वय बनाकर एक्सप्रेस-वे के काम को गति दें। भू-अर्जन की वजह से काम प्रभावित नहीं होना चाहिए।
-मुरार नदी उन्नयन कार्य की धीमी प्रगति सामने आने पर कार्य एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए।
-प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहर के चारों ओर आवासीय प्रोजेक्ट हाथ में लें, जिससे सम्पूर्ण शहर का विकास हो।
- डामरीकृत सडक़ों की बजाय सीमेंट-कंक्रीट की सडक़ों के प्रस्ताव तैयार कराएं।
- कार्य एजेंसियों को निर्देश दिए कि जिले में बनाई जा रहीं ग्रामीण सडक़ों के दोनों ओर सुनियोजित वृक्षारोपण कराया जाए।
-इस साल की बरसात में जिन बस्तियों में जल भराव की स्थिति बनी हैं वहां ऐसे इंतजाम करें, जिससे अगली बारिश में यह स्थिति न बने।