MP News: केंद्र सरकार ने एक अप्रेल से नेशनल हाइवे से गुजरने वाले वाहनों के टोल में बढ़ोत्तरी कर दी है।
MP News: कलेक्टर गाइडलाइन में आज से 1652 लोकेशनों पर जमीनों के रेट 10 से 98 फीसदी तक बढ़ गए हैं। नई गाइडलाइन लागू होने से पहले बीते दिन रजिस्ट्री कराने के लिए पंजीयन कार्यालयों में दिन भर भीड़ रही, एक ही दिन में करीब 700 सौदे दर्ज किए गए, देर रात 12 बजे तक रजिस्ट्री होने से ये आंकड़ा और बढ़ सकता है।
गौरतलब है कि जिले में 2226 लोकेशन हैं, इसमें से साठ फीसदी से ज्यादा लोकेशनों के पर रेट में बदलाव किया गया है। नई गाइडलाइन लागू करने के लिए संपदा के साफ्टवेयर में नए रेट अपडेट किए जाएंगे। इसके चलते 1 और 2 अप्रेल को रजिस्ट्री कार्यालय बंद रहेंगे।
केंद्र सरकार ने देशभर के टोल टैक्स की दरों में 5 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। इसके चलते अब ग्वालियर चंबल के मेहरा, छौंदा से गुजरने पर कार चालकों को 95 रुपए टोल लगता था, वह अब बढ़कर 100 रुपए हो जाएगा। जबकि पनिहार पर अब 120 रुपए का टोल देना होगा। इसके साथ ही 50 एकल यात्रा के लिए बनने वाला मासिक पास भी 360 रुपए महंगा हो जाएगा। केंद्र सरकार ने एक अप्रेल से नेशनल हाइवे से गुजरने वाले वाहनों के टोल में बढ़ोत्तरी कर दी है। इसके चलते अब वाहन चालकों को 5 प्रतिशत अधिक टोल चुकाना होगा।
ग्वालियर में आज से संपत्तिकर डबल हो जाएगा। यदि संपत्तिकर स्वामी ने 31 मार्च तक कर जमा नहीं किया गया तो 2023 के नियम के अनुसार 1 अप्रेल से संपत्तिकर में पैनल्टी लगने से दोगुना हो जाएगा। संपत्तिकर चार तरीके से कर लिया जाता है। इसमें नगरीय विकास कर, शिक्षा उपकर, समेकित कर और अतिरिक्त समेकित शामिल है। इनमें नगरीय विकास कर व शिक्षा उपकर में संपत्तिकर का 1-1 प्रतिशत और समेकित कर में अतिरिक्त संपत्तिकर का 5 प्रतिशत जुड़ता है। जबकि सपत्तिकर वार्षिक भाड़ा मूल्य के अनुसार रहता है। यह आवासीय के लिए है। यदि गैर आवासीय होती है तो नगरीय विकास कर दो प्रतिशत हो जाता है।
ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन के लिए नया नियम एक अप्रेल से लागू हो जाएगा। इसमें चार स्तर (गीला,सूखा कचरा, सेनेटरी व स्पेशल केयर) पर कचरा सेग्रीगेशन नहीं करने पर पहली बार जुर्माना भरना होगा।
नए पैन कार्ड के लिए अब सिर्फ आधार काफी नहीं होगा, 10वीं का सर्टिफिकेट या जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा। सभी डिजिटल पेमेंट के लिए सिर्फ ओटीपी नहीं, बल्कि बायोमेट्रिक जैसे 2एफए (डायनामिक फैक्टर) अनिवार्य कर दिए गए हैं।
अब फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर की जगह केवल एक ही टैक्स ईयर होगा, जिससे टैक्स कैलकुलेशन आसान हो जाएगा। इसके साथ ही आइटीआर फाइलिंग की समय सीमाएं भी तय कर दी गई हैं। सैलरीड लोगों के लिए 31 जुलाई, व्यवसाय/प्रोफेशन वालों के लिए 31 अगस्त और ऑडिट केस में 31 अक्टूबर तक रिटर्न भरा जा सकेगा। जीएसटी की कार्यशैली में दो बड़े बदलाव होने वाले हैं। पहला, एडजुडिकेशन के मामलों में होने वाली सुनवाई का, जो अब सिर्फ ऑनलाइन होगी। विशेष परिस्थिति में ऑफलाइन सुनवाई होगी। दूसरा, सुनवाई करने वाले अधिकारी को लेकर किया गया है। अब ऑडिट करने वाला और फैसला करने वाला अधिकारी एक नहीं, बल्कि दो व्यक्ति होंगे।