
ग्वालियर. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते युद्ध और तनाव का असर अब पर्यटन उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। इस सीजन में जहां पहले दुबई, अरब देशों और यूरोप जाने वाली फ्लाइट्स हाउसफुल रहती थीं, वहीं अब इन रूट्स पर यात्रियों की संख्या तेजी से घट गई है। ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार पहले इंटरनेशनल ट्रैफिक का करीब 60 फीसदी हिस्सा अरब देशों और यूरोप के लिए होता था, लेकिन मौजूदा तनावपूर्ण हालात के चलते यह आंकड़ा घटकर महज 8 से 10 फीसदी तक पहुंच गया है।
सुरक्षित विकल्प…
पर्यटक अब इसके उलट सुरक्षित और नए विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। जापान, वियतनाम और सिंगापुर जैसे देशों के साथ घरेलू पर्यटन में अंडमान-निकोबार, लेह-लद्दाख, केरल और गंगटोक-दार्जलिंग जैसी जगहें तेजी से पहली पसंद बन रही हैं। खासतौर पर जापान जाने वाले पर्यटकों की संख्या में बड़ा उछाल आया है।
तेल की महंगाई ने उड़ानों को किया महंगा
जनवरी 2026 में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमत करीब 90,520 रुपए प्रति किलोलीटर से बढ़कर 1.27 लाख पहुंच चुकी है। एयरलाइंस इस बढ़ी हुई लागत को यात्रियों पर डाल रही हैं। इंडिगो और एयर इंडिया ने 180 सीटर विमानों में प्रति सीट करीब 399 रुपए तक अतिरिक्त शुल्क बढ़ाया है। एक ट्रिप पर एयरलाइंस का खर्च लगभग 72 हजार रुपए तक बढ़ गया है, जिसका असर टिकट कीमतों में साफ दिखाई दे रहा है।
अमेरिका की टिकट एक महीने में 1.20 लाख महंगी
एडवोकेट केएन शर्मा ने फरवरी में अमेरिका के लिए प्रीमियम इकोनॉमी टिकट 2.20 लाख रुपए में बुक की थी। ठीक एक महीने बाद उसी सीट का किराया बढ़कर 3.40 लाख रुपए पहुंच गया। यानी करीब 50 फीसदी की सीधी बढ़ोतरी। हालांकि छुट्टियां महंगी होने के बावजूद पर्यटक नए और सुरक्षित टूरिस्ट डेस्टिनेशन की तरफ रुख कर रहे हैं, जिसे पर्यटन उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
घरेलू पर्यटन भी महंगाई की चपेट में अंडमान और लेह के किराए में 50 से 65% तक उछाल
रूट पहले का किराया अब का किराया बढ़ोतरी
अंडमान-निकोबार 20-24 हजार 35-40 हजार 65%
लेह-लद्दाख 20 हजार 30 32 हजार 50%
दिल्ली-बेंगलुरु 5-6 हजार 8-9 हजार 40%
केरल 7-7.5 हजार 9-10 हजार 30%
गंगटोक-दार्जलिंग 5,550 6.5 7 हजार 20%
एक्सपर्ट : पर्यटन उद्योग पर भी संकट
टूर एवं ट्रैवल ऑपरेटर छवि सिंघल के मुताबिक यदि एटीएफ की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो ट्रैवल इंडस्ट्री गंभीर संकट में आ सकती है। उनका कहना है कि इसका असर केवल यात्रियों की जेब तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रैवल एजेंसियों, होटल कारोबार, टूर ऑपरेटर्स और इस सेक्टर से जुड़े लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर भी पड़ रहा है।
पत्रिका व्यू: जंग सीमाओं पर, असर आम आदमी की छुट्टियों पर
वैश्विक तनाव और तेल की बढ़ती कीमतों ने यह साबित कर दिया है कि युद्ध का असर सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। महंगे हवाई किराए ने अब आम परिवारों के घूमने-फिरने के बजट को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हालांकि पर्यटकों का सुरक्षित और नए डेस्टिनेशंस की ओर बढ़ता रुझान यह संकेत भी देता है कि पर्यटन की चाह खत्म नहीं हुई है, बस उसकी दिशा बदल गई है।