
ग्वालियर. बच्चों के हाथों में पहुंचने वाले खिलौने अब ग्वालियर की औद्योगिक पहचान को भी नया आकार दे सकते हैं। खिलौना निर्माण के क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं तलाशने के लिए टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया से जुड़ी 50 उद्योगों का प्रतिनिधि मंडल शहर पहुंचा। मकसद साफ है-ग्वालियर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में टॉय क्लस्टर की संभावनाएं परखना और यहां खिलौना निर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए अनुकूल जमीन तलाशना। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2028 के तहत हुई इस पहल से क्षेत्र में नए उद्योगों और रोजगार के अवसरों की उम्मीद जगी है।
तीन औद्योगिक क्षेत्रों पर निवेशकों की नजर
टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय अग्रवाल के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद निवेशकों ने मुरैना जिले के मावई, ग्वालियर के मोहना और शिवपुरी जिले के गुरावल औद्योगिक क्षेत्रों का भ्रमण किया। यहां उपलब्ध औद्योगिक भूमि, आधारभूत सुविधाओं और निवेश की संभावनाओं को करीब से देखा। निवेशकों के लिए सबसे अहम सवाल जमीन की उपलब्धता, उसकी दरें, विकास शुल्क और सरकारी प्रोत्साहन रहे। इन मुद्दों पर अधिकारियों ने जानकारी साझा की, ताकि कंपनियां संभावित निवेश को लेकर व्यावहारिक आकलन कर सकें।
प्लास्टिक पार्क से लेकर सब्सिडी तक की जानकारी
निजी होटल में आयोजित बैठक में एमपीआईडीसी की कार्यकारी संचालक अनिशा श्रीवास्तव ने प्रस्तुतीकरण के जरिए मावई, मोहना और गुरावल के औद्योगिक क्षेत्रों के साथ ग्वालियर जिले के बिलौआ स्थित प्लास्टिक पार्क की जानकारी दी। प्रतिनिधियों को उपलब्ध भूमि, दरों, विकास शुल्क और मध्यप्रदेश शासन की औद्योगिक नीतियों से अवगत कराया गया। खिलौना उद्योग के लिए उपलब्ध प्रोत्साहनों और सब्सिडी पर भी चर्चा हुई। श्रीवास्तव ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि ग्वालियर क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों को एमपीआइडीसी की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
प्लास्टिक, सॉफ्ट और इलेक्ट्रिक टॉय कंपनियों की भागीदारी
प्रतिनिधि मंडल में एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विपिन निझावन, महासचिव शरद कपूर और गवर्निंग बॉडी सदस्य आशीष अग्रवाल सहित विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल रहे। डैश फनराइड, अंकित टॉयज एंड गेम्स, लिटिल जीनियस, केस्पा टॉयज एंड स्पोट्र्स प्राइवेट लिमिटेड, नटखट और डिम्पी स्टफ जैसी कंपनियों ने भी भाग लिया।
क्लस्टर से रोजगार की नई राह
ग्वालियर में टॉय क्लस्टर विकसित होने की स्थिति में खिलौना निर्माण से जुड़ी इकाइयों को एक औद्योगिक ढांचे में विकसित करने का अवसर मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, सहायक उद्योगों और निवेश गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। हालांकि, क्लस्टर की स्थापना अभी संभावनाओं के आकलन के चरण में है। भ्रमण के अंत में निवेशकों की शंकाओं के समाधान के लिए बैठक हुई, जिसमें भूमि आवंटन और सब्सिडी से जुड़े सवालों पर चर्चा की गई। अब नजर इस बात पर रहेगी कि औद्योगिक क्षेत्रों का निरीक्षण और नीतिगत जानकारी कितनी कंपनियों को ग्वालियर में निवेश के लिए आगे बढ़ाती है।