
Child adoption news: अनाथ बच्चों के लिए सात समंदर पार विदेशी दंपत्तियों के दिलों में ममता उमड़ रही है। ग्वालियर के बाल देखभाल गृह में रह रहीं दो अनाथ बेटियों को विदेशी नागरिकों ने गोद लिया है। खास यह कि जहां लोग दिव्यांगों को गोद लेने से बचते हैं, वहां अमरीकी महिला ने बेटी मान लिया। कानूनी प्रक्रिया के बाद एक बच्ची को स्वीडन के दंपती व दूसरी दिव्यांग को अमरीकी महिला को सौंपा। दोनों बेटियां विदेश में नए परिवार संग भविष्य संवारेंगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला अधिकारी उपासना राय ने बताया कि दोनों बच्चियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर गोद दिया है। इंदौर के एक दंपती ने भी ग्वालियर से एक बच्चे को गोद लिया है। अभी बाल देखभाल गृहों में 15 अनाथ बच्चे हैं। दंपती ज्यादातर नवजात और दो वर्ष की उम्र तक के बच्चों को गोद लेना चाहते हैं। ऐसे बच्चों को गोद लेने के लिए दंपत्तियों को 2-3 साल तक इंतजार करना पड़ता है। वहीं, 6 साल से अधिक उम्र के बच्चों को तुरंत गोद दिया जा सकता है।
केंद्र के मिशन वात्सल्य पोर्टल पर आवेदन करना होता है। शुरुआती चरण में बच्चों की दो वर्ष तक फॉस्टर केयर होती है। फिर अभिभावकों को बच्चे पर पूरे अधिकार मिलते हैं।
भारत में अनाथ या बेसहारा बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेने की प्रक्रिया Central Adoption Resource Authority (CARA) द्वारा नियंत्रित की जाती है। इसके लिए सबसे पहले ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है। कई सारे जरूरी डॉक्यूमेंट्स भी लगाने होते है। इसके बाद होम स्टडी पूरी की जाती है। बाद में एजेंसी आपको बच्चे का रेफरल देती है।
बच्चो को गोद लेने से पहले आपको कई मापदंडो पर खरा उतरना होता है…
होम स्टडी रिपोर्ट (HSR) पास होने के बाद, आपको पोर्टल पर कानूनी रूप से गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित किए गए बच्चों के प्रोफाइल दिखाए जाते हैं। आप अपनी पसंद के अनुसार बच्चे को चुन सकते हैं।