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साइबर फ्रॉड मामले में ‘फ्रीज’ नहीं होगा बैंक खाता, ग्वालियर हाइकोर्ट का आदेश

Cyber crime investigation: साइबर क्राइम से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज करने की मनमानी पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है।

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Cyber crime investigation: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया (Photo Source- freepik)

Cyber crime investigation: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया (Photo Source- freepik)

Cyber ​​crime: साइबर अपराध की जांच के नाम पर बैंकों और पुलिस द्वारा आम उपभोक्ताओं के पूरे बैंक खातों को फ्रीज (लेन-देन बंद) करने की मनमानी पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी बैंक खाते में साइबर धोखाधड़ी या संदिग्ध लेन-देन की कोई राशि आती है, तो बैंक केवल उसी विवादित राशि को होल्ड कर सकता है, न कि उपभोक्ता के पूरे बैंक खाते और उसकी जमा पूंजी को।

जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता रामकुमार सिकरवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनका बैंक खाता तत्काल अनफ्रीज करने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता रामकुमार सिकरवार ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर पुलिस और बैंक की इस तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई को चुनौती दी थी।

नहीं फ्रीज होगा पूरा बैंक खाता

याचिका बताया गया कि उनके बैंक खाते में कुल 9,65,468 रुपये जमा थे। इस खाते में किसी संदिग्ध लेन-देन से जुड़े केवल 2,30,968 रुपये क्रेडिट हुए थे, जो जांच का विषय हो सकते हैं। इसके बावजूद, जांच एजेंसी के इशारे पर बैंक ने उनके पूरे खाते को ही फ्रीज कर दिया, जिससे वे अपनी मेहनत की वैध राशि का उपयोग भी नहीं पा रहे थे। आदेश में साफ है कि खाते में मौजूद कुल राशि में से केवल विवादित राशि (2,30,968 रुपये) को ही अलग करके फिक्स डिपॉजिट (एफडी) में रख दिया जाए, ताकि जांच प्रभावित न हो।

सुनवाई के दौरान क्रिप्टो का दिया तर्क

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि यह मामला पूरी तरह से मैल्कम मुरायिस बनाम भारतीय स्टेट बैंक मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए पूर्व आदेश के समान है, जिसमें क्रिप्टो करेंसी ट्रेडिंग से जुड़े खातों को पूरी तरह फ्रीज करने को गलत माना गया था। हाईकोर्ट ने माना कि पूर्व में दिया गया वह ऐतिहासिक निर्णय इस मामले में भी पूरी तरह लागू होता है।

जमानत लेने का आरोप

वहीं ग्वालियर हाइकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में हत्या के एक मामले में आरोपी को मिली जमानत के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश शासन और संबंधित आरोपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मृतक के पुत्र राजेश सिंह ने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर कर आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपी शिवम तोमर ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर जमानत हासिल की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुशाग्र रघुवंशी ने दलील दी कि मृतक पर गोली चलाने का सीधा और मुख्य आरोप केवल शिवम तोमर पर है।