
Gwalior Sandstone
ग्वालियर. पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच मचे घमासान और युद्ध के बादलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को भले ही हिलाकर रख दिया हो, लेकिन इस महायुद्ध की तपिश के बीच ग्वालियर के सेंडस्टोन (बलुआ पत्थर) कारोबारियों के लिए एक अप्रत्याशित 'लॉटरी' लग गई है। युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की कीमतों में जो बारूद सी तेजी आई है, उसने ग्वालियर के पत्थर निर्यातकों की तिजोरी में भारी मुनाफा बरसाना शुरू कर दिया है। जहां एक ओर डॉलर मजबूत होने से देश के आयातकों (आयात करने वाली इकाइयों) के पसीने छूट रहे हैं और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर निर्यात की दुनिया में ग्वालियर का 'सेंडस्टोन' पूरी तरह से उत्साह से लबरेज है। डॉलर की यह छलांग ग्वालियर के पत्थर उद्योग के लिए किसी संजीवनी या 'बूस्टर डोज' से कम साबित नहीं हो रही है।
90 का ऑर्डर, 95 पर भुगतान : 5 फीसदी के इस 'खेल' ने बढ़ाया उत्साह
इस मुनाफे के पीछे का गणित बेहद दिलचस्प और मारक है। दरअसल, सेंडस्टोन इंडस्ट्री में निर्यात के ऑर्डर आज के आज पूरे नहीं होते, इनकी बुकिंग करीब 3 से 5 महीने पहले ही शुरू हो जाती है।
-3-4 महीने पहले की स्थिति : जब विदेशी खरीदारों के साथ सौदे तय हुए थे, तब अमेरिकी डॉलर का भाव 90 रुपए के आसपास मंडरा रहा था।
-आज की वर्तमान स्थिति : अब जब माल विदेशी सरजमीं पर पहुंच रहा है और भुगतान का समय आया है, तो युद्ध के चलते डॉलर 95 रुपये के पार जा पहुंचा है।सीधे शब्दों में कहें तो बिना किसी अतिरिक्त लागत के, केवल करेंसी के उतार-चढ़ाव से सेंडस्टोन संचालकों को बैठे-बिठाए लगभग 5 फीसदी का सीधा इजाफा (मुनाफा) मिल रहा है। यही वजह है कि खदानों से लेकर कटर मशीनों तक, हर तरफ उत्साह का माहौल है और कारोबारी अब ज्यादा से ज्यादा माल विदेशों में खपाने की होड़ में जुट गए हैं।
राहत की बात: इस समय निर्यातकों के लिए सोने पर सुहागा यह है कि न तो अंतरराष्ट्रीय कंटेनरों का भाड़ा बढ़ा है और न ही स्थानीय ट्रांसपोर्टेशन की कीमतों में कोई बड़ी वृद्धि हुई है। यानी लागत स्थिर है और मुनाफा आसमान पर।
आंकड़ों की नजर में ग्वालियर का पत्थर साम्राज्य
-वर्तमान निर्यात: लगभग 2 लाख टन सेंडस्टोन प्रतिवर्ष।
-कंटेनरों की रवानगी: करीब 7,200 कंटेनर हर साल विदेशों के लिए रवाना हो रहे हैं।
-विदेशी मुद्रा की आमद : इससे वर्तमान में 150 से 200 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा देश को मिल रही है।
नया लक्ष्य : इस साल 500 करोड़ रुपए का लक्ष्य प्राप्त करना और कंटेनरों की संख्या को 15,000 कंटेनर प्रतिवर्ष तक ले जाना।
एक्सपर्ट व्यू
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती ने ग्वालियर के सेंडस्टोन निर्यातकों के लिए विंडफॉल गेन (अपेक्षित से अधिक मुनाफा) की स्थिति पैदा कर दी है। स्थिर लागत और करेंसी फ्लक्चुएशन से मिला 5 फीसदी का सीधा लाभ इस उद्योग को तेजी से विस्तार करने और 500 करोड़ रुपए के नए निर्यात लक्ष्य को छूने में मदद करेगा।
-सत्यप्रकाश शुक्ला, अध्यक्ष, स्टोन पार्क ग्वालियर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
Published on:
11 Jun 2026 05:42 pm
बड़ी खबरें
View Allग्वालियर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
