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सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ की संपत्ति का बंटवारा उलझा, अब 17 अगस्त को होगी सुनवाई

Scindia Royal Family Property Dispute: सिंधिया संपत्ति का बंटवारा ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ की बेटी प्रतिमा देवी राणा की आपत्ति के बाद उलझ गया है, आपत्ति का जवाब देने के लिए वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने मांगा समय।
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Scindia Royal Family Property Dispute

Scindia Royal Family Property Dispute Takes New Turn, सिंधिया राजघराने की संपत्ति का समझौता उलझा (Source-patrika file)

Gwalior Scindia Royal Family Property Dispute: देश के बड़े राजघरानों में शामिल मध्यप्रदेश के ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार हुआ राजीनामा एक बार फिर कानूनी पेच में फंस गया है। अतिरिक्त जिला न्यायालय में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राणा ने समझौते पर आपत्ति दर्ज कराते हुए अपने अधिकार का दावा किया।

जवाब दाखिल करने मांगा वक्त

प्रतिमा देवी राणा की ओर से आपत्ति दर्ज कराने के बाद अब राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने जवाब पेश करने के लिए अदालत से समय मांगा है। मामले पर सुनवाई कर रहे न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि दावे से जुड़े कुछ पुराने रिकॉर्ड मुख्य फाइल में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में न्यायालय अब उन दस्तावेजों की भी तलाश करा रहा है, ताकि मामले के सभी तथ्यों का परीक्षण किया जा सके। रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बाद ही आपत्ति और समझौते के कानूनी पहलुओं पर आगे सुनवाई होगी।

पहले एकपक्षीय घोषित, अब हक के लिए पहुंचीं कोर्ट

बता दें कि इससे पहले वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने सिंधिया राजघराने की संपत्ति में अपने हिस्से के लिए सिविल वाद दायर किया था। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता होने पर राजीनामा अदालत में पेश किया गया। मूल वाद में पद्मावती राजे की दोनों बेटियों प्रतिमा देवी राणा और कनिका देवी सिंह को पक्षकार बनाया गया था, लेकिन तब उनके उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने उन्हें एकपक्षीय (एक्स-पार्टी) घोषित कर दिया था। अब प्रतिमा देवी राणा ने अदालत में आवेदन देकर कहा है कि उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाए और संपत्ति में अपने वैधानिक अधिकार पर विचार किया जाए।

ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ की बेटी हैं प्रतिमा देवी

प्रतिमा देवी राणा केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी हैं। पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा के राज परिवार में हुआ था। उनकी दो बेटियां प्रतिमा देवी राणा और कनिका देवी सिंह हैं। आपसी सहमति से तैयार हुए सिंधिया राजघराने के संपत्ति समझौते में दोनों को शामिल नहीं किए जाने पर प्रतिमा देवी ने आपत्ति दर्ज कराई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि अदालत इस आपत्ति को स्वीकार कर लेती है, तो संपत्ति बंटवारे के राजीनामे की वैधता पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है और पूरे समझौते की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

राजमाता के समय से चल रहा संपत्ति विवाद

दरअसल सिंधिया राजपरिवार के बीच राजमाता के समय से संपत्ति विवाद चल रहा है। केंद्रीय मंत्री सिंधिया की बुआओं ने संपत्ति पर अपना अधिकार जताया है, जबकि सिंधिया का विरोध है कि उनके यहां राजा की गद्दी का कानून चलता है और संपत्ति पर राजा का अधिकार रहता है। इसके चलते बंटवारे के विवाद जिला न्यायालय में पहुंचा। ऊषा राजे, वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे ने वर्ष 2010 में संपत्ति के विवाद को लेकर न्यायालय में एक वाद पत्र पेश किया। उनकी ओर से कहा गया कि पिता की संपत्ति में बेटियों का बराबर का हक है, इसलिए उन्हें भी संपत्ति में हिस्सा दिया जाए। एक अन्य वाद पत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी बुआओं के खिलाफ पेश किया है। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

महल की ये कोठियां और संपत्ति समझौते के दायरे में..

  • जय विलास पैलेस 12.40 लाख वर्गफीट में फैला है। जय विलास पैलेस, ऊषा किरण पैलेस, छोटी विश्रांति, रानी महल शामिल हैं।
  • स्वतंत्रता के समय सिंधिया परिवार के पास 100 से अधिक कंपनियों में शेयर थे। ग्वालियर में विशाल जय विलास पैलेस परिसर। शिवपुरी में माधव विलास पैलेस, हैप्पी विलास और जॉर्ज कैसल जैसी संपत्तियां हैं। उज्जैन में कालियादेह पैलेस भी है। दिल्ली में, परिवार के पास ग्वालियर हाउस, राजपुर रोड पर एक प्लॉट और सिंधिया विला है। पुणे में पद्म विलास पैलेस, वाराणसी में सिंधिया घाट और गोवा में विठोबा मंदिर आदि संपत्तियां है।
  • कई जिलों में कृषि भूमि, शहरी भूखंड, ट्रस्ट और अन्य परिसंपत्तियां भी बताई जाती हैं। स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधार, अधिग्रहण और विभाजन के कारण इन संपत्तियों का स्वरूप समय के साथ बदलता रहा है।
  • ग्वालियर रियासत ब्रिटिश काल की सबसे बड़ी और समृद्ध रियासतों में गिनी जाती थी।