जिला उपभोक्ता आयोग ने माना सेवा में कमी
ग्वालियर. मरीज का इलाज तो पूरा हुआ, लेकिन बीमा कंपनी ने सिर्फ कागजों में लिखे समय के फर्क को आधार बनाकर दावा खारिज कर दिया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, ग्वालियर ने स्वास्थ्य बीमा दावा अस्वीकार करना सेवा में कमी मानते हुए बीमा कंपनी को 45 दिन के भीतर पूरी राशि चुकाने के आदेश दिए हैं। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद स्पष्ट कहा कि इलाज के दौरान अस्पताल द्वारा बनाए गए दस्तावेजों पर उपभोक्ता का कोई नियंत्रण नहीं होता। यदि अस्पताल की ओर से कोई त्रुटि हुई है, तो उसका दंड उपभोक्ता को नहीं दिया जा सकता। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने इलाज और खर्च को नकारा नहीं है, केवल तकनीकी आधार पर दावा खारिज किया गया, जो अनुचित है।
राजेश शर्मा ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। पॉलिसी अवधि के दौरान 26 अगस्त 2023 को गिरने से वे घायल हो गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराया गया। 28 अगस्त 2023 को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद इलाज पर कुल 20,400 रुपये खर्च हुए। परिवादी राजेश शर्मा का कहना था कि उन्होंने बीमा पॉलिसी की सभी शर्तों का पालन किया है। इलाज वास्तविक था और खर्च भी प्रमाणित है। अस्पताल की ओर से तैयार किए गए दस्तावेजों में यदि समय को लेकर कोई त्रुटि है, तो इसके लिए वे जिम्मेदार नहीं हो सकते।
बीमा कंपनी का पक्ष
बीमा कंपनी ने अपने जवाब में कहा कि अस्पताल के दस्तावेजों में भर्ती समय अलग-अलग दर्शाया गया है। डिस्चार्ज समरी में समय 4:30 बजे और फाइनल बिल में 11:30 बजे अंकित था। दस्तावेजों में इस तरह की विसंगति होने के कारण पॉलिसी की शर्तों के तहत दावा देय नहीं बनता, इसलिए दावा अस्वीकार किया गया और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं है।
-आयोग ने बीमा कंपनी के दावा निरस्तीकरण आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिए कि परिवादी को 20,400 रुपए की राशि 45 दिनों के भीतर अदा की जाए। तय समय में भुगतान नहीं होने पर राशि पर भुगतान की तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इसके अलावा मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 2,000 रुपए और प्रकरण व्यय के लिए 2,000 रुपए भी देने के आदेश दिए गए हैं।