Kota Mandi Bhav : सोयाबीन व लहसुन तेज
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मस्कूलर डिस्टॉफी यानी उठने, बैठने, चलने फिरने से लाचार। बीकॉम करने के बाद वे कई भी जॉब नहीं करने के कारण परेशान थे। क्योंकि वे खुद से कोई भी कार्य नहीं कर सकते है। कपड़े बदलने के लिए भी किसी की सहारा की जरूरत होती है। रोशनी आश्रम ने उन्हें ट्रेनिंग दिया गया। आज वे वहां के एकाउंट का काम बखूबी कर रहे है।
ऐसे बच्चों को कभी हैंडल नहीं किया। शुरु के दिनों में मुझे काफी परेशानी आई। क्योंकि मुझे में पेन्शस कम था। लेकिन इस स्पेशल बच्चों की स्पेशल केयर के लिए मैंने कई कोर्स किए जिससे बाद आज कोई भी परेशानी नहीं है। अगर इनमें थोड़ा से भी सुधार आता है तो लगता है कि मेरा परिश्रम सफल रहा।