https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. मनरेगा में 60 प्रतिशत वहां खर्च कर दिए गए हैं, जिन कार्यों का भविष्य में कोई निशान तक नहीं बचेगा। फिर इन कार्यों की उपयोगिता का अंदाजा तो खुद ही लगाया जा सकता है।
मनरेगा में 200 करोड़ के ऐसे कार्य, जिनके निशान ढूंढऩे में भी छूटेंगे पसीने
-मनरेगा में 60 प्रतिशत ऐसे काम, जिनका भविष्य में कोई सुबूत भी नहीं बचेगा
-जिले में गत बीस महीनों में 370 करोड़ हुए खर्च
हनुमानगढ़. मनरेगा में 60 प्रतिशत वहां खर्च कर दिए गए हैं, जिन कार्यों का भविष्य में कोई निशान तक नहीं बचेगा। फिर इन कार्यों की उपयोगिता का अंदाजा तो खुद ही लगाया जा सकता है। जिले में हालात ऐसे हो रहे हैं कि महात्मा गांधी नरेगा योजना में ग्रामीण विकास से संबंधित सभी प्रकार की रोजगार परक गतिविधियां मार्ग निर्देशिका में साफ तौर पर उल्लेखित हैं। बावजूद गत दो बरसों में जिले में रास्ता दुरुस्तीकरण व जोहड़ खुदाई के नाम पर मिट्टी इधर-उधर करने के कार्यों पर कुल बजट का 60 प्रतिशत खर्च कर दिया गया है। उपयोगिता के हिसाब से यह कार्य ज्यादा कारगर नहीं हैं। आंकड़ों के लिहाज से बात करें तो जिले में गत वित्तीय वर्ष के दौरान मनरेगा में 177 करोड़ रुपए खर्च कर दो लाख सात हजार लोगों को रोजगार दिया गया। इसी तरह चालू वित्तीय वर्ष में अब तक के दस महीनों में 193 करोड़ रुपए खर्च कर दो लाख 17 हजार लोगों को रोजगार दिया गया है। मनरेगा योजना को जिले में उपयोगी बनाने के लिए अब जिला परिषद स्तर से तय किया गया है कि आगामी अप्रेल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष में तीन चौथाई कार्यों के साथ पौधरोपण कार्य को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। सर्वे के बाद पूरे जिले में आठ सौ सरकारी परिसर,सड़कें तथा नहरों के पटड़े चिन्हित किए गए हैं। जहां अगले मानसून तक करीब 5 लाख पौधे लगाकर अगले तीन बरसों तक नरेगा योजना में उनकी सुरक्षा व देखभाल की जाएगी। गांवों की गलियों में अतिक्रमण रोकने के लिए सड़क के दोनों साइड पौधरोपण कार्य को अनिवार्य किया गया है। ग्राम पंचायतों की ओर से लगाए गए पौधों को पंचायत के स्टॉक रजिस्ट्रर में दर्ज करने के निर्देश भी जिला परिषद की ओर से जारी किए गए हैं। जिससे कोई कर्मचारी इनकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं कर सके। साथ मनरेगा के नए वर्ष के प्लान में उपयोगी कार्यों को अधिकतम शामिल करने पर जोर दिया गया है।
जिले में हुए कार्यों पर नजर
मनरेगा में गत वर्ष 3200 काम पूरे किए गए। जबकि इस वर्ष 5500 काम अब तक पूरे हुए हैं। चालू माह में 2100 काम प्रगति पर हैं। दो बरसों में पूरे हुए तथा वर्तमान में चालू कामों में 60 प्रतिशत कार्य रास्ता दुरुस्तीकरण, नहरों पर कचरे की सफाई तथा कच्चे जोहड़ की खुदाई के अस्थाई प्रकृति के कार्य हैं। जाहिर है कि गत 20 महीनों के दौरान इस योजना में खर्च 370 करोड़ में से 200 करोड़ रुपए रोजगार के नाम पर ऐसे कामों पर खर्च कर दिए जिनका एक साल बाद कोई निशान नहीं मिल सकता।
सख्ती का अब असर
जिले में मनरेगा में कच्चे कार्यों को करवाने के पीछे योजना में लगे अभियंताओं तथा ग्राम पंचायतों के सरपंच व सचिवों की ओर से रोजगार देने का लक्ष्य आसानी से पूर्ण करने की सोच रही है। वहीं दूसरी तरफ बात करें तो जिला परिषद व पंचायतीराज विभाग की टीम ने स्थायी तथा उपयोगी परिसंपत्तियों के सृजन का कोई प्रयास नहीं किया। जिला परिषद में गत माह नव नियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से ऐसे कार्यों का सघन निरीक्षण तथा जन उपयोगिता की जांच करवाने पर पाया गया है कि जनवरी के प्रथम पखवाड़े में नियोजित 98 हजार श्रमिकों में से एक तिहाई तो काम पर जाते ही नहीं या हाजरी करवाकर वापिस आ जाते हैं। सघन निरीक्षण करवाने पर 100 अधिक मेटों को फर्जी हाजिरी दर्ज करवाने के आरोप में ब्लैक लिस्टेड किया गया है। इसके बाद फरवरी के द्वितीय पखवाड़े में श्रमिकों की संख्या घटकर 63 हजार रह गई है।
....फैक्ट फाइल...
-मनरेगा में गत वर्ष 3200 काम पूरे किए गए।
-चालू वित्तीय वर्ष में अभी तक 5500 काम पूरे कर लिए गए हैं।
-गत 20 महीनों में मनरेगा में खर्च 370 करोड़ में से 200 करोड़ रुपए ऐसे कार्यों पर खर्च हुए, जिनका भविषय में कोई नामों निशान नहीं बचेगा।
-जनवरी २०२१ के प्रथम पखवाड़े में नियोजित 98 हजार श्रमिकों में से निरीक्षण के दौरान एक तिहाई तो ऐसे मिले, जो काम पर जाते मिले ही नहीं।
नए सिरे से अब बना रहे प्लान
जिले में मनरेगा में हो रहे कार्यों का निरीक्षण करवा रहे हैं। कई जगह फर्जीवाड़ा सामने आने पर तत्काल मैट को ब्लैक लिस्ट भी किया है। मनरेगा में पूर्व में हुए कार्यों के हालात ऐसे हैं कि २०० कार्यों के निशान भी आने वाले समय में नहीं बचेंगे। भविष्य में मनरेगा कार्यों की उपयोगिता बनी रहे, इसके लिए गांवों में सड़कों के किनारे पौधरोपण कार्य को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है। जिससे गांवों को हरा भरा करने के साथ ही मनरेगा का मकसद भी पूरा सकेगा। आगामी वर्ष का प्लान नए सिरे से बनाने का प्रयास है।
-रामनिवास जाट, सीईओ, जिला परिषद हनुमानगढ़