
Compassionate Appointment (Photo Source - Patrika)
Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने भादरा के अधिवक्ता अदरीश अली की याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस प्रशासन को कड़े निर्देश जारी किए है। जिनमें न्यायमूर्ति फरजंद अली ने कहा कि जिस दिन अधिवक्ता के साथ कथित उत्पीड़न हुआ, उस दिन का सीसीटीवी फुटेज हर हाल में सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि रिपोर्ट में फुटेज उपलब्ध नहीं पाया जाता है तो हनुमानगढ़ के पुलिस अधीक्षक प्रतिवर्ती उत्तरदायी माने जाएंगे और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 (अब धारा 119) के तहत यह प्रतिकूल अनुमान लगाया जाएगा कि सबूत जानबूझकर नष्ट किया गया। जिससे पुलिस प्रशासन की जवाबदेही सीधे कठघरे में खड़ी हो जाएगी।
राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी दमनात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए एसएचओ भादरा को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए और नोटिस दस्ती देने का आदेश दिया ताकि सेवा में कोई देरी न हो।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई 6 मई को होगी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनजीत गोदारा ने पैरवी करते हुए अदालत के समक्ष सीसीटीवी संरक्षण, पुलिस की जवाबदेही, उत्पीड़न के आरोपों की गंभीरता और प्रशासनिक दायित्वों को मजबूती से रखा। जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने यह आदेश पारित किया।
बताया जा रहा है कि गत 26 फरवरी को एक मामले में सुपुर्दगी लेने गए याचिकाकर्ता अधिवक्ता के सहयोगी के साथ कथिततौर पर अभद्र व्यवहार किया गया और धमकाया गया। इस घटना के विरोध में 27 फरवरी को भादरा बार संघ ने बैठक कर थानाधिकारी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित कर भादरा के समस्त न्यायालयों में कार्य स्थगित भी रखा था। जिसका कई अन्य बार संघ ने भी समर्थन किया था।
एक अन्य केस में हाईकोर्ट ने करौली जिले के पांचना बांध से जुड़ी नहरों में तीन सप्ताह के भीतर बांध का पानी छोड़ने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने अदालती आदेश की पालना के बजाय अधिकारियों के और समय मांगने पर फटकार लगाते हुए चेतावनी दी कि न्यायालय के धैर्य की परीक्षा न लें, आदेश की तीन सप्ताह में पालना की जाए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने कांग्रेस विधायक रामकेश मीना की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पानी न खोलने का कारण पूछा, तो विभाग ने कोई ठोस जवाब देने के बजाय पालना के लिए चार माह का समय मांगा। सरकार की ओर से नहरों की सफाई के लिए समय देने का आग्रह किया। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास सैनी ने समय देने का विरोध किया।
कोर्ट ने समय देने के सरकार के आग्रह को सिरे से खारिज कर दिया, वहीं कहा कि अब समय नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि 26 मई, 2026 तक आदेश की पालना नहीं हुई, तो कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
02 May 2026 10:35 am
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