
फाइल फोटो: विजय कुमार
हनुमानगढ़। फतेहाबाद जिले का गांव कुम्हारिया एक बार फिर गहरी शोक की लहर में डूब गया है। रूस-यूक्रेन युद्ध ने गांव के एक और युवक, विजय पूनिया की जान ले ली है। करीब 25 दिन पहले इसी गांव के युवक अंकित जांगड़ा का शव घर आया था और अब विजय का पार्थिव शरीर पहुंचा है। विजय के पार्थिव शरीर का बुधवार को गमहीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
मौत की आगोश में गए विजय की कहानी संघर्ष और एजेंटों के धोखे की दर्दनाक दास्तां है। पिता के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी विजय के कंधों पर थी। परिवार ने बेहतर भविष्य की आस में कर्ज उठाकर 15 जुलाई 2025 को उसे बिजनेस वीजा पर रूस भेजा था। वहां एजेंटों ने अच्छी नौकरी का झांसा देकर उसे जबरन रूसी सेना में भर्ती करा दिया और खतरनाक डोनेत्स्क मोर्चे पर तैनात कर दिया।
मुझे युद्ध में ले जा रहे हैं, बचा सकते हो तो बचा लो इन शब्दों पर आधारित एक विडियो सितंबर 2025 में आया विजय का यह आखिरी संदेश परिजनों को आज भी झकझोर रहा है। परिवार ने मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार तक गुहार लगाई और कई सांसदों ने विदेश मंत्री को पत्र भी लिखे, लेकिन विजय की वापसी नहीं हो सकी।
विजय अपने पीछे बूढ़ी मां और छोटे भाई को छोड़ गया है। विजय की यह मौत उन एजेंटों के काले चेहरे को उजागर करती है, जो चंद पैसों के लिए युवाओं को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में भारतीयों की मौत के पहले भी कई मामले सामने आ चुके हैं, इसके बावजूद इन गतिविधियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिख रही है।
Updated on:
30 Apr 2026 07:01 pm
Published on:
30 Apr 2026 06:56 pm
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