
हनुमानगढ़ पुलिस की गिरफ्त में हत्या का दोषी (फोटो: पत्रिका)
Husband Killed Wife: चरित्र पर संदेह व गृह क्लेश के चलते पत्नी की हत्या करने के मामले में आरोपी पति को जिला एवं सेशन न्यायाधीश तनवीर चौधरी ने मंगलवार को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
लोक अभियोजक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि 22 अक्टूबर 2021 को रावतसर निवासी महावीर पुत्र खेमाराम बाजीगर ने टाउन थाने में दामाद के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था। पुलिस को रिपोर्ट दी थी कि उसकी पुत्री रुकमा देवी की शादी करीब 12 वर्ष पहले आत्माराम उर्फ लाभा पुत्र मंगूराम बाजीगर निवासी वार्ड नौ, गांव अराईयांवाली से हुई थी। शादी के बाद से ही आरोपी आत्माराम पत्नी को परेशान करता था। वह पत्नी के चरित्र पर शक करता था और नशे का आदी है।
समझाइश के लिए कई बार पंचायत भी हुई थी। वारदात से तीन दिन पहले ही आत्माराम पत्नी रुकमा देवी को लेकर घर लौटा था। इसके बाद 22 अक्टूबर को सूचना मिली कि उसकी पुत्री की हत्या कर दी गई है। जब मौके पर पहुंचे तो रुकमा देवी का शव घर के कमरे में पड़ा मिला, जिसके सिर पर चोट के निशान थे। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और जांच कर चालान पेश किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आत्माराम को सजा सुनाई।
वहीं श्रीगंगानगर के घड़साना में लगभग पौने चार साल पहले 281 हैड में बरसाती पानी निकासी के मामूली विवाद के बाद पड़ोसी वृद्ध की हत्या के एक मामले में अदालत ने मंगलवार को दोषी युवक को आजीवन कारावास सुनाया। वहीं, दोषी के पिता के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने बरी कर दिया। अपर सेशन न्यायालय न्यायाधीश ऋषिकुमार ने यह फैसला खुली अदालत में सुनाया।
अपर लोक अभियोजक महीराम सुथार ने बताया कि 10 जुलाई 2022 को घड़साना थाने में कपूर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसका पिता दीवानसिंह बरसात होने के बाद घर की पीछे की दीवार संभालने गया था। इस दौरान पड़़ोसी गुरमेल सिंह का पूरा परिवार दीवानसिंह के साथ झगड़ा करने लगा।
विवाद के दौरान धारदार हथियारों से हमला कर दीवानसिंह की हत्या कर दी गई। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने गुरमेल सिंह, उसके 26 वर्षीय पुत्र राजूसिंह सहित कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच की। पुलिस ने पिता-पुत्र को दोषी मानते हुए न्यायालय में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान 45 दस्तावेजी साक्ष्य और 21 गवाह पेश किए गए। अदालत ने इनके आधार पर राजूसिंह रायसिख को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास सुनाया। वहीं, उसके पिता को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
Updated on:
22 Apr 2026 01:58 pm
Published on:
22 Apr 2026 01:57 pm
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