
फाइल फोटो पत्रिका
Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर में सांगानेर एयरपोर्ट विस्तार के लिए 51 वर्ष पहले अवाप्त जमीन के मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण को राहत दी है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अवाप्तशुदा जमीन के बदले 25 प्रतिशत जमीन देने के एकलपीठ के आदेश को खारिज कर दिया। न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह व न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने जयपुर विकास प्राधिकरण की अपील मंजूर कर ली।
प्राधिकरण ने कहा कि हाईकोर्ट की एकलपीठ ने जिस मामले में जमीन के बदले 25 प्रतिशत विकसित जमीन देने का आदेश दिया, उसमें अवाप्तशुदा भूमि का मुआवजा कोर्ट में जमा कराया जा चुका है और उस जमीन पर 2017 में कब्जा लेकर फेंसिंग कराई जा चुकी है। इस तथ्य को याचिकाकर्ता काश्तकार ने छिपाया और उसके आधार पर एकलपीठ ने विकसित जमीन देने का आदेश दिया।
इसके विपरीत काश्तकार रणजीत सिंह मीना के उत्तराधिकारियों की ओर से कहा गया कि अवााप्ति 2005 से पहले की है, अत: एकलपीठ का आदेश सही है। न काश्तकारों को मुआवजा मिला है और न ही कब्जा लिया गया है। इस मामले में अवाप्तशुदा जमीन के बदले 25 प्रतिशत विकसित जमीन देने की राज्य सरकार की गाइडलाइन लागू होती हैं।
सांगानेर के चैनपुरा में एयरपोर्ट विस्तार के लिए 1969 में प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें याचिकाकर्ता से संबंधित 13 बीघा भूमि भी शामिल है। मई 1975 में अवाप्ति का अवार्ड जारी हो गया।
अवाप्ति को काश्तकारों ने वर्ष 1974 में याचिका के जरिए चुनौती दी, जिसे हाईकोर्ट ने मई 1975 में खारिज कर दिया। 1975 में फिर याचिका दायर की गई, जो मार्च 1978 में निस्तारित कर दी गई। विवाद अदालत में लंबित होने के कारण जेडीए ने 1979 में मुआवजा राशि कोर्ट में जमा करवा दी।
2010 में काश्तकार रणजीत सिंह मीना की ओर से याचिका दायर की गई, जो अगस्त 2012 में खारिज कर दी गई। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी भी खारिज कर दी। 2015 में फिर याचिका, जो अप्रेल 2017 में खारिज। इसके खिलाफ 2017 में अपील, जो 2023 में खारिज।
इसी बीच 2022 में फिर याचिका, जो नवंबर 2022 में खारिज हो गई। वर्ष 2023 में फिर याचिका, जिसके आधार पर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मार्च 2026 में काश्तकार के परिवार को 20 प्रतिशत आवासीय व 5 प्रतिशत वाणिज्यिक विकसित जमीन देने का आदेश दिया।
Updated on:
23 Apr 2026 08:33 am
Published on:
23 Apr 2026 08:33 am
