26 अक्टूबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जयपुर में भाई-बहन की हत्या का आरोपी बरी, हाईकोर्ट ने मृतकों के माता-पिता को चश्मदीद गवाह मानने से किया इनकार

जयपुर के चर्चित भाई-बहन दोहरे हत्याकांड में राजस्थान हाईकोर्ट ने अधीनस्थ अदालत का फैसला पलटते हुए आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मृतकों के माता-पिता को चश्मदीद गवाह नहीं माना जा सकता। जांच में हत्या में प्रयुक्त चाकू पर फिंगरप्रिंट नहीं लिए गए और रक्त जांच रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश नहीं की गई।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Arvind Rao

•

Updated: 7 Jun 2026, 9:48 AM IST

Jaipur Double Murder Case

जयपुर डबल मर्डर, राजस्थान हाईकोर्ट फैसला (पत्रिका फाइल फोटो)

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब 14 साल पहले नाहरगढ़ रोड थाना इलाके में घर के भीतर हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने अधीनस्थ कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें 15 दिसंबर 2017 को विजय सिंह को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। न्यायाधीश महेंद्र कुमार गोयल और न्यायाधीश भुवन गोयल की खंडपीठ ने आरोपी की अपील को स्वीकार करते हुए उसे तुरंत बरी करने के आदेश दिए हैं।

खंडपीठ ने आदेश में पुलिस अनुसंधान की गंभीर कमियों को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रकरण में पुलिस की ओर से जब्त किए गए चाकू पर से न तो फिंगरप्रिंट लिए गए और न ही उस पर मृतकों का रक्त लगे होने के संबंध में कोई ठोस रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की गई। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले में मृत बच्चों के माता-पिता को 'चश्मदीद गवाह' मानने से भी इनकार कर दिया।

कोर्ट में दी गईं दलीलें

राजस्थान हाईकोर्ट में अपील के दौरान विजय सिंह के अधिवक्ता राजेश गोस्वामी ने दलील दी कि बच्चों की मां ने अपने बयानों में स्वीकार किया है कि जब वह घर पहुंची, तो दरवाजा खुला था, चारों तरफ खून फैला था और बेटा-बेटी लहूलुहान पड़े थे। इससे साफ है कि मां चश्मदीद साक्षी न होकर वारदात के बाद मौके पर पहुंची थी।

वहीं, पिता ने भी गवाही में माना कि जब वह घर पहुंचा तो पुलिस बच्चों को अस्पताल ले जा रही थी। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पुलिस ने इन दोनों को जानबूझकर चश्मदीद गवाह बनाकर पेश किया, जबकि वे इस श्रेणी में आते ही नहीं है।

अगस्त 2012: भाई-बहन की हुई थी हत्या

नाहरगढ़ रोड थाने में 14 अगस्त 2012 को परिवादी मंजीत सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह दोपहर ढाई बजे जब अपनी पत्नी के साथ घर के अंदर गया, तो आरोपी विजय सिंह उनके बेटे के सीने पर चाकू मार रहा था।

जब उनकी बेटी भाई को बचाने कूदी, तो आरोपी ने उस पर भी चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए और दोनों को धक्का देकर मौके से भाग गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर चालान पेश किया था, जिस पर अधीनस्थ कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।