https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. केंद्र सरकार की ओर से कृषि संबंधी बिल पास करने के बाद से किसानों में गुस्सा देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में संसद से पास हुए तीन कृषि विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार को किसानों ने सड़कों पर उतरकर जगह-जगह चक्काजाम कर अपना गुस्सा जाहिर किया।
हनुमानगढ़ में बिल के खिलाफ धरतीपुत्रों में रोष, किया चक्काजाम
-गांव मक्कासर व धोलीपाल के पास रोका रास्ता
-कृषि अध्यादेशों को वापस लेने की मांग
हनुमानगढ़. केंद्र सरकार की ओर से कृषि संबंधी बिल पास करने के बाद से किसानों में गुस्सा देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में संसद से पास हुए तीन कृषि विधेयकों के खिलाफ शुक्रवार को किसानों ने सड़कों पर उतरकर जगह-जगह चक्काजाम कर अपना गुस्सा जाहिर किया। कई जगह किसानों ने किसान व श्रमिक संगठनों के बैनर तले चक्काजाम किया। चक्काजाम में कांग्रेस कार्यकर्ता भी शामिल हुए।
किसानों के जाम लगाकर विरोध-प्रदर्शन करने से सड़कों के दोनों तरफ वाहनों की लम्बी कतारें लग गई। इससे यातायात बाधित हो गया। आपातकालीन व जरूरी सेवाओं को जाम के दौरान नहीं रोका गया। आंदोलन को देखते हुए जाम स्थल के आसपास पुलिस जाब्ता तैनात रहा।
हनुमानगढ़ तहसील में किसानों ने सूरतगढ़ फोरलेन पर गांव मक्कासर व अबोहर मार्ग पर गांव धोलीपाल के पास चक्काजाम किया। गांव मक्कासर में लगाए गए जाम में काफी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुई। इस दौरान कुछ किसान व प्रदर्शनकारी सड़क पर भी लेट गए। मक्कासर में जाम के दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने केन्द्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने विधेयकों पर किसानों की सहमति नहीं ली। कृषि से जुड़े यह काले कानून वर्तमान में विश्व भर में महामारी का रूप धारण कर चुकी कोरोना से भी बड़ी बीमारी है। केन्द्र के इस बिल से न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और कृषि क्षेत्र बड़े पूंजीपतियों के हाथों में चला जाएगा। नया कृषि कानून किसानों को गुलाम बना देगा। किसानों से एमएसपी छीन ली जाएगी। उन्हें कांट्रेक्ट फार्मिंग के जरिए पूंजीपतियों का गुलाम बनने पर मजबूर किया जाएगा। हालात ऐसे बन जाएंगे कि किसान अपने ही खेत पर मजदूर बन जाएगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पहले ही सब कुछ अपने चहेतों को दे चुकी है और अब किसानों को बेचने की कोशिश कर रही है। आज सरकारी मंडियों में सरकार की नाक के नीचे एमएसपी होने के बाद भी किसान की फसल एमएसपी से नीचे के दामों पर बिकती है और सरकार व्यापारियों पर कोई अंकुश नहीं लगा पाती तो फिर आने वाले समय में इस नए कृषि कानून के बाद क्या गारंटी रहेगी कि किसान को उसकी फसल का लागत मूल्य भी मिल पाएगा। इसलिए अब किसानों का यह आंदोलन रूकने वाला नहीं है। साथ ही कहा कि आज का भारत बंद किसी एक संगठन का बंद नहीं होकर देश भर के किसानों का बंद है। देश भर के किसान काले कृषि कानून के विरोध में सड़क पर उतरे हैं। वक्ताओं ने कहा कि तीनों विधेयक वापस लिए जाने तक वह इसके खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। इसके खिलाफ पूरे देश का अन्नदाता आंदोलन तेज करेगा। किसान संगठनों ने केन्द्र सरकार से इन विधेयकों को किसान विरोधी और कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने वाले विधेयक करार देते हुए इन्हें वापस लेने और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देने के लिए कानूनी प्रावधान करने की मांग की।
बंद को समर्थन
गांव मक्कासर में सुबह नौ से दोपहर बारह बजे तक जबकि धोलीपाल में पौने आठ बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक जाम रहा। हनुमानगढ़ के अलावा संगरिया, पीलीबंगा, गोलूवाला, कैंचियां, नोहर सहित अन्य जगहों पर मुख्य मार्गांे पर अवरोधक लगाकर किसानों ने मार्ग अवरूद्ध कर रोष जताया। धानमंडी के व्यापारियों ने भी भारत बंद का समर्थन करते हुए अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।
यह हुए शामिल
गांव मक्कासर में जाम लगाने वाले किसानों की अगुवाई विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने की। इस दौरान माकपा नेता रामेश्वर वर्मा, रघुवीर वर्मा, कांग्रेस नेता सौरभ राठौड़, रणवीर सिहाग, गुरमीत सिंह चंदड़ा, उम्मेद सिंह राजावत, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष महेन्द्र शर्मा, मनीष गोदारा, रायसिंह जाखड़, अमरजीत गोदारा, लक्ष्मीनारायण, सुखचैन सिंह, विक्रम, सरपंच बलदेव सिंह मक्कासर, सुरेंद्र शर्मा, चंद्रकला वर्मा, सरबजीत कौर, शेरसिंह शाक्य, आत्मा सिंह, रामेश्वर चंावरिया, जगजीत सिंह जग्गी, वेद मक्कासर आदि शामिल हुए। वहीं गांव धोलीपाल में अबोहर रोड स्थित मम्मडख़ेडा वितरिका पुल पर किसान नेता कुलविन्द्र सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में लगाए गए जाम के दौरान प्रगट सिंह, राजवीर माली, अमृतपाल, सतीश, देवीलाल, लखवीर सिद्धू, अजायब सिंह, बलजीत गिल आदि शामिल हुए। गुरुद्वारा सेवादार हरप्रीत सिंह की ओर से जाम स्थल पर लंगर-पानी की व्यवस्था की गई।