हनुमानगढ़. गिरदावरी बिन मूंग की सरकारी खरीद अटक गई है। जिले की मंडियों में उक्त फसल की आवक लगातार बढ़ रही है।
-जिले की मंडियों में एमएसपी की तुलना में मूंग उत्पादक किसानों को मिल रहा काफी कम भाव
-पांच दिन बाद भी एक भी किसान का नहीं हुआ पंजीयन
हनुमानगढ़. गिरदावरी बिन मूंग की सरकारी खरीद अटक गई है। जिले की मंडियों में उक्त फसल की आवक लगातार बढ़ रही है। इस बीच सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों को प्रति क्विंटल करीब दो से तीन हजार रुपए का नुकसान हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिले में 27 सितम्बर से ऑनलाइन पंजीयन का कार्य शुरू कर दिया गया है। परंतु गिरदावरी नहीं मिलने की वजह से अब तक एक किसान भी पंजीयन नहीं करवा सका है। इस वजह से किसानों की फसल औसतन पांच हजार रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से व्यापारी खरीद रहे हैं। इससे पहले मौसम की मार के चलते फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी। अब गिरदावरी के पेच के चलते किसान परेशान हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने पंजीयन का काम शुरू करवा दिया है। लेकिन सरकारी खामियों के चलते खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। जिले में हनुमानगढ़ जंक्शन, हनुमानगढ़ टाउन, रावतसर, पल्लू, भादरा, नोहर, पीलीबंगा, गोलूवाला, संगरिया व टिब्बी आदि क्रय विक्रय सहकारी समितियों को खरीद केंद्र बनाया गया है। एडीएम उम्मेदीलाल मीणा ने बताया कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि जल्द से जल्द गिरदावरी पूरी हो। इसके लिए हमारी टीम लगी हुई है। पंद्रह अक्टूबर तक इस कार्य को पूर्ण करने का लक्ष्य है। किसानों से अपील की गई है कि वह पंजीयन के दौरान अपना बैंक खाता भी अपडेट करवा लें। ताकि खरीद के बाद समय पर उनको भुगतान मिल सके।
मंडियों में यह लग रहे भाव
हनुमानगढ़ जंक्शन मंडी में इस समय मूंग व्यापारी 5000 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। हनुमानगढ़ टाउन में 6500, रावतसर में 5500, नोहर में 6200, संगरिया में 6000, पीलीबंगा में 6312 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से व्यापारी फसल खरीद रहे हैं। केंद्र सरकार ने इस बार मूंग का एमएसपी 8768 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
क्या करें, मजबूरी है
जंक्शन मंडी में मूंग बेचने आए किसान नंदराम ने बताया कि अच्छी आमदनी की आस में इस फसल को खेत में लगाया था। लेकिन पहले बारिश की वजह से दाने काले पड़ गए। जो फसल ठीक है, उसकी खरीद भी सरकार एमएसपी पर नहीं कर रही है। इसलिए व्यापारी जो भाव दे रहे हैं, उसमें संतोष करना पड़ रहा है।