https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. वैद्यजी से सरकार सर्जरी करवाना चाहती है। चिकित्सक इस मिक्सपैथी/खिचड़ीपैथी के विरोध में खड़े हो गए हैं। दरअसल, केन्द्र सरकार जल्द ही आयुर्वेद पद्धति से इलाज करने वाले आयुष चिकित्सकों को एलोपैथी की तर्ज पर सर्जरी की अनुमति देने जा रही है।
वैद्यजी से सर्जरी पर डॉक्टर बिफरे, खिचड़ीपैथी से बता रहे जान का खतरा
- आयुष चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति का एलोपैथी चिकित्सकों में भारी विरोध
- सरकारी अस्पतालों में कार्य का बहिष्कार
हनुमानगढ़. वैद्यजी से सरकार सर्जरी करवाना चाहती है। चिकित्सक इस मिक्सपैथी/खिचड़ीपैथी के विरोध में खड़े हो गए हैं। दरअसल, केन्द्र सरकार जल्द ही आयुर्वेद पद्धति से इलाज करने वाले आयुष चिकित्सकों को एलोपैथी की तर्ज पर सर्जरी की अनुमति देने जा रही है। इस पर महाभारत शुरू हो चुकी है। एलोपैथी चिकित्सकों ने देश भर में केन्द्र सरकार के इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। इसके तहत आईएमए तथा राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ ने शुक्रवार को कार्य का बहिष्कार कर रोष जताया।
आयुष चिकित्सक सरकार के इस फैसले को जनहित में बता रहे हैं। उनका दावा है कि इससे देश में चिकित्सकों की कमी संबंधी समस्या दूर होगी। साथ ही वर्षों तक सर्जरी की पढ़ाई करने वाले आयुष चिकित्सकों को भी बेहतर ढग़ से सेवा देने का मौका मिल सकेगा। वहीं आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में पारंगत चिकित्सकों से एलोपैथी के अनुसार शल्य चिकित्सा कराने को एलोपैथी चिकित्सक मिक्सपैथी, क्रॉसपैैथी और खिचड़ीपैथी बता रहे हैं। इससे पैदा होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं।
गंभीर खतरे
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति सबका अभिमान है। सरकार का यह निर्णय ना केवल एलोपैथी व आमजन बल्कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के लिए भी हानिकारक है। इससे जन साधारण के स्वास्थ्य संंबंधी गंभीर खतरे पैदा होंगे। कोरोना महामारी में चिकित्सक व पैरा मेडिकल स्टाफ अपनी जान खतरे में डालकर आधुनिक चिकित्सा पद्धति से ही कोविड-19 संक्रमितों का इलाज कर रहे हैं। पिछले पांच दशक में एलोपैथी चिकित्सा विज्ञान में बहुत विकास हुआ है। देश के एलोपैथिक चिकित्सकों, वैज्ञानिकों व पैरामेडिकल स्टाफ ने कड़ी मेहनत से विश्व में नाम कमाया है। अत: सरकार की गलत नीतियों से इसे व्यर्थ होते नहीं देखा जा सकता।
पीजी को ही अनुमति
आयुष चिकित्सक संघ की माने तो सर्जरी का अधिकार केवल उनको दिया जाएगा जिनके पास पीजी की डिग्री होगी। आयुष चिकित्सक को साढ़े पांच साल में स्नातक की डिग्री मिलती है। इसके बाद तीन साल में पीजी की डिग्री होती है। सर्जरी, ईएनटी आदि में पीजी की डिग्री होती है। सर्जरी का अधिकार इन्हीं पीजी की डिग्री करने वाले आयुष चिकित्सकों को दिया जाएगा। इसमें भी चुनिंदा सर्जरी ही शामिल होगी।
कार्य का बहिष्कार जताया रोष
आयुष चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति देने संबंधी केन्द्र सरकार के फैसले के विरोध में जिले के चिकित्सकों ने शुक्रवार को कार्य का बहिष्कार किया। राजकीय अस्पतालों में सुबह छह से शाम छह बजे तक ओपीडी में रोगियों को परामर्श नहीं दिया गया। हालांकि आपातकालीन सेवाओं में चिकित्सक ड्यूटी पर रहे। इसके अलावा कोविड संबंधी कार्य को भी बहिष्कार से दूर रखा गया। जिला चिकित्सालय में ट्रोमा सेंटर के बाहर रोष जताया गया। अपनी मांगों के संबंध में चिकित्सकों ने जिला कलक्टर को प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजा। विरोध प्रदर्शन में डॉ. रविशंकर शर्मा, डॉ. शंकरलाल सोनी आदि शामिल रहे।
रहेगा जान का खतरा
प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति विश्व को भारत की देन है। इस पर भारतीय भरोसा करते हैं। इसलिए आयुष चिकित्सक आयुर्वेद पद्धति से ही इलाज करे। क्षार सूत्र वगैरह जो भी है, करे। मगर चाकू का इस्तेमाल ना करे। क्योंकि रोगी को सर्जरी के दौरान जड़ी-बूटी सुंघाकर बेहोश नहीं किया जा सकता। आयुष चिकित्सकों को सर्जरी का अधिकार देना खिचड़ी पैथी साबित होगा। इसका सबसे ज्यादा नुकसान आमजन को होगा। क्योंकि सर्जरी में जरा सी भी गड़बड़ जान ले सकती है। इसलिए आईएमए इस निर्णय का देश भर में विरोध कर रहा है। - डॉ. निशांत बतरा, अध्यक्ष आईएमए हनुमानगढ़।
अनुमति से आमजन को लाभ
स्नातक की डिग्री वाले आयुष चिकित्सकों को सर्जरी का अधिकार नहीं दिया जा रहा है। पीजी की डिग्री सर्जरी में करने वाले आयुष चिकित्सकों को यह अनुमति दी जा रही है। उनको पाइल्स नासूर, गांठ सहित माइनर सर्जरी की ही अनुमति मिलेगी। यह बहुत जरूरी भी है। इससे आमजन को लाभ ही होगा। - डॉ. धर्मेन्द्र वर्मा, जिलाध्यक्ष राजस्थान आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी संघ।