हनुमानगढ़

…ताकि सुरक्षित रहे पर्यावरण और धर्म-संस्कृति

- गोबर के सुदपयोग के लिए लगाया गो काष्ठ सयंत्र -प्रति वर्ष हो सकेगी दो हजार क्विंटल तक लकड़ी की बचत - टाउन कल्याण भूमि नंदी शाला में आज आरंभ होगा सयंत्र

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...ताकि सुरक्षित रहे पर्यावरण और धर्म-संस्कृति

मनोज कुमार गोयल
हनुमानगढ़. विश्व में लगातार पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है, वन कम हो रहे हैं, पेड़ जिस गति से कम हो रहे हैं, उस अनुपात में नए पेड़ पनप नहीं रहे हैं। ऐसे में हर वर्ग चिङ्क्षतत है। हर वर्ग और संस्थाएं अपने अपने तरीके से पर्यावरण संरक्षण में जुटी हैं।

इसी कड़ी में हनुमानगढ़ टाउन की श्री गोशाला समिति एवं श्री नंदी गोाशाला कल्याण भूमि समिति ने पर्यावरण संरक्षण और धर्म-संस्कृति के क्षेत्र में एक अभिनव प्रयास किया है। गोशाला समिति ने गो काष्ठ प्रोजेक्ट नंदी गोशाला परिसर में लगाया है। इस प्रोजेक्ट के तहत गोबर से लकड़ी तैयार की जाएगी। ताकि लकड़ी की जरूरत के लिए पेड़ नहीं काटने पड़े। खास बात यह है कि गोबर से तैयार होने वाली लकड़ी से एक पंथ दो काज किए जाएंगे।

गोबर से तैयार लकड़ी को पेड़ों की लकड़ी की जगह जलाने में इस्तेमाल करके पर्यावरण संरक्षण में सहयेाग दिया जाएगा। दूसरी तरफ गोबर से तैयार होने वाली लकड़ी से धर्म संस्कृति के अनुरूप शव के अंतिम संस्कार में इस्तेमाल किया जाएगा।

प्रतिदिन बनेगी बनेगी 35 से 40 क्विंटल लकड़ी
श्रीगोशाला समिति और श्री नंदी गोशाला कल्याण भूमि समिति ने टाउन स्थित कल्याण भूमि में गो काष्ठ प्रोजेक्ट स्थापित किया है। इसका विधिवत शुभारंभ रविवार को किया जाएगा। प्रथम चरण में दो गो काष्ठ मशीनें लगाई गई हैं। यह दोनों मशीनें प्रतिदिन 35 से 40 क्विंटल लकड़ी तैयार करेंगी। इन मशीनों से लगभग एक क्विंटल गोबर से 40 किलो गो काष्ठ (गोबर की लकड़ी) तैयार होगी। गोबर से तैयार लकड़ी तीन से चार दिन में सूख कर तैयार हो जाएगी। श्री गोशाला समिति के अध्यक्ष मनोहर लाल बंसल एवं श्री नंदी गोाशाला कल्याण भूमि समिति के अध्यक्ष विजय कुमार रौंता के अनुसार गो काष्ठ प्रोजेक्ट के लिए कल्याण भूमि परिसर में अलग से कार्यशाला तैयार की गई है। इसमें मशीनें लगा कर गो काष्ठ सूखाने के लिए विशाल शैड स्थापित किया गया है। यह सभी कार्य जनसहयोग से हो रहा है।

धर्म संस्कृति से हो अंतिम संस्कार
गोसेवक मनोहर लाल बंसल व विजय कुमार रौंता के अनुसार सनातन धर्म ओर धर्म ग्रंथों के अनुसार मनुष्य के अंतिम संस्कार स्थल पर गाय के गोबर का लेप होना चाहिए। अंतिम संस्कार के समय पहली अग्नि गाय के गोबर के उप्पले की दी जानी चाहिए। अंतिम संस्कार में लकड़ी के साथ गाय के गोबर के उप्पले भी लगाए जाने चाहिए। गाय के गोबर को हरदृष्टि से पवित्र माना गया है। ऐसे में गोबर से गो काष्ठ तैयार कर उससे अंतिम संस्कार का विधि सम्मत्त होगा। इसी सोच के अनुसार कल्याण भूमि परिसर में गो काष्ठ तैयार की जा रही है। गो सेवक रौंता व बंसल के अनुसार गो काष्ठ को लागत मूल्य पर विक्रय किया जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण में इसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो सके। गो काष्ठ का इस्तेमाल स्वैच्छिक होगा। अंतिम संस्कार में लकड़ी के स्थान पर गो काष्ठ को जो भी इस्तेमाल करना चाहेंगे, उन्हें गो काष्ठ उपलब्ध करवाई जाएगी।

सौ वर्ष पहले स्थापित हुई थी गोशाला
टाउन में नेहरू चिल्ड्रन स्कूल के सामने स्थित श्री गोशाला की स्थापना रियासत काल में सितम्बर 1914 में हुई थी। कालान्तर में इसका विस्तार हुआ और मेगा हाइवे पर गांव कोहला के पास इसकी एक शाखा लगभग चार दशक पहले खोली गई। दोनों स्थानों पर लगभग 2200 गोवंश का पालन पोषण किया जा रहा है। इसी क्रम में वर्ष 2018 में टाउन स्थित कल्याण भूमि परिसर में नंदीशाला भी शुरू की गई। जिसमें वर्तमान में लगभग छह सौ नंदी का पालन-पोषण किया जा रहा है। श्री गोशाला समिति में सचिव रमेश जुनेजा व कोषाध्यक्ष कश्मीरी लाल हैं, वहीं श्री नंदी गोशाला कल्याण भूमि समिति में सचिव रमेश काठपाल व कोषाघ्यक्ष राकेश बंसल हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में समाज सेवी भी जुड़े हुए हैं।

हर वर्ष लगती है दो हजार क्विंटल लकड़ी
बंसल व रौंता के अनुसार टाउन कल्याण भूमि में प्रतिवर्ष औसतन दो हजार क्विंटल लकड़ी अंतिम संस्कार में इस्तेमाल होती है। हमारा उद्देश्य है कि इस लकड़ी के स्थान पर गो काष्ठ का इस्तेमाल हो। उनके अनुसार गो काष्ठ का इस्तेमाल पूरी तरह धर्म-संस्कृति के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि धर्म-संस्कृति से जुड़े हुए लोगों और समाज के प्रबुद्ध वर्ग को गो काष्ठ का अधिकाधिक इस्तेमाल करने के लिए पे्ररित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तीनों संस्थाओं में प्रतिदिन लगभग 50 टन गोबर होता है। वर्तमान में गोबर का कृषि खाद के रूप में उपयोग हो रहा है। हमारा उद्देश्य है कि गोबर से गो काष्ठ तैयार हो, ताकि गोशाला संचालन में आर्थिक सम्बल भी मिले।

& पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़- पौधों की कटाई को रोकना बहुत जरूरी है। ऐसे में हमने प्रयास किया है कि गो काष्ठ का इस्तेमाल लकड़ी के विकल्प के रूप हो। इसी कड़ी में हमने गो काष्ठ प्रोजेक्ट स्थापित किया है। हम हर वर्ग के लोगों को गो काष्ठ इस्तेमाल के लिए पे्ररित करेंगे, ताकि मुहिम सार्थक हो।
- मनोहर लाल बंसल, अध्यक्ष, श्री गोशाला समिति, हनुमानगढ़ टाउन

& गो काष्ठ का इस्तेमाल धर्म संस्कृति के अनुरूप है। गोवंश के गोबर को पवित्र माना गया है। इसका उपयोग हर धर्म-संस्कृति में है। अंतिम संस्कार में गोबर का इस्तेमाल वर्षों से हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए गो काष्ठ हानिकारक नहीं है।
- विजय कुमार रौंता, अध्यक्ष, श्रीनंदी गोशाला कल्याण भूमि समिति।

& सनातन धर्म के अनुसार गाय के गोबर को पवित्र माना गया है। अंतिम संस्कार स्थल को गाय के गोबर से लीपा जाता है। गोबर के उप्पले से अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है। पर्यावरण संरक्षण के लिए गो काष्ठ का इस्तेमाल होना चाहिए।
- पंडित रतन लाल शास्त्री, हनुमानगढ़।

& धर्म संस्कृति में गाय के गोबर को बहुत पवित्र माना गया है। सनातन धर्म के अनुसार हर कार्य से पूर्व गोबर से लिपाई की जाती है। गाय के गोबर से बनने वाले गो काष्ठ का पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वैच्छिक इस्तेमाल किया जा सकता है।
- पंडित बृजकिशोर तिवाड़ी, हनुमानगढ़।

Published on:
26 Jan 2021 07:24 pm
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