हनुमानगढ़

बाजार भाव उठने की उम्मीद, मंडी में फसल लाने से बच रहे किसान

-हनुमानगढ़ टाउन व जंक्शन मंडी में सरसों व चने की सरकारी खरीद अब तक शुरू नहीं हुईहनुमानगढ़. जिले में एमएसपी पर सरसों व चना बेचने के प्रति किसान रुचि नहीं दिखा रहे हैं। स्थिति यह है कि हजारों किसानों ने फसल बेचने के लिए पंजीयन जरूर करवा लिया है। लेकिन खरीद की तारीख देने के […]

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संगरिया: धान मंडी में बिकने के लिए पहुंची सरसों फसल।

-हनुमानगढ़ टाउन व जंक्शन मंडी में सरसों व चने की सरकारी खरीद अब तक शुरू नहीं हुई
हनुमानगढ़. जिले में एमएसपी पर सरसों व चना बेचने के प्रति किसान रुचि नहीं दिखा रहे हैं। स्थिति यह है कि हजारों किसानों ने फसल बेचने के लिए पंजीयन जरूर करवा लिया है। लेकिन खरीद की तारीख देने के बावजूद कोई किसान खरीद केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे। हनुमानगढ़ टाउन मंडी की स्थिति यह है कि चने व सरसों के लिए खरीद की तारीख लगातार किसानों को दी जा रही है।

लेकिन कोई किसान क्रय विक्रय सहकारी समिति में फसल बेचने के लिए नहीं पहुंच रहे। प्रबंधक सुभाष श्योराण के अनुसार टाउन व जंक्शन मंडी में काफी संख्या में किसानों ने फसल बेचने को पंजीयन करवाया है। लेकिन अब तक कोई किसान फसल बेचने के लिए यहां नहीं पहुंचा है। हनुमानगढ़ जिले में समर्थन मूल्य पर सरसों एवं चने की खरीद के लिए क्रय विक्रय सहकारी समिति एवं ग्राम सेवा सहकारी समिति स्तर पर 25 खरीद केंद्र बनाए गए है। जिनमें 11 केंद्र क्रय विक्रय सहकारी समिति स्तर पर एवं 14 ग्राम सेवा सहकारी समिति स्तर पर बनाए गए हैं।

भारत सरकार की ओर से इस बार सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6,200 रुपए प्रति क्विंटल एवं चना का समर्थन मूल्य 5,875 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। राज्य में सरसों की 13.78 लाख मीट्रिक टन एवं चने की 5.53 लाख मीट्रिक टन खरीद की सीमा निर्धारित की गई है। एक किसान से 40 क्विंटल सरसों व चना सरकार खरीदेगी। बताया जा रहा है कि किसानों को उम्मीद है कि दोनों फसलो के बाजार भाव आने वाले समय में उछलेंगे। इसलिए किसान अभी फसल को मंडी लाने में जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं।

तेजी की आस में किसान नहीं ला रहे फसल
संगरिया. क्षेत्र में सरसों-चना की समर्थन मूल्य पर खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बावजूद इसके अपेक्षित आवक नहीं हो रही। हालात यह हैं कि मंडियां सूनी नजर आ रही हैं। बड़ी मात्रा में सरसों की फसल अभी तक खेतों में पड़ी है। जो फसल कट चुकी, उसकी मंडलियां खेतों में रखी हैं। वहीं जिन किसानों ने सरसों निकाल ली है और जिन्हें तत्काल पैसों की जरूरत नहीं उन्होंने उपज घरों में ही सुरक्षित रख ली है। किसान नेता ओम जांगू के अनुसार मौजूदा बाजार भाव किसानों की अपेक्षाओं से कम है।

इसके चलते किसान उपज रोक कर बैठे हैं। वर्तमान में सरसों भाव करीब 6200 से 6700 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहा है। तेल की मात्रा के आधार पर किसानों को लगभग 2500-2600 रुपए का लाभ मिल रहा है। साथ ही व्यापारियों को प्रति सैंकड़ा 2 से 2.25 रुपए आढ़त मिल जाती है। जबकि सरकारी समर्थन मूल्य 6250 रुपए प्रति क्विंटल है और इसमें आढ़त का प्रावधान नहीं है। पूर्व के वर्षों में समर्थन मूल्य पर बिक्री करने वाले किसानों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, जिससे किसानों का भरोसा कम हुआ है। दूसरी ओर, कोटा जैसे बाजारों में उच्च गुणवत्ता की सरसों 7000 रुपए प्रति क्विंटल तक बिकने से किसानों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। किसानों को विश्वास है कि आने वाले समय में सरसों के भाव 9000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच सकते हैं।

इसी कारण वे फिलहाल बिक्री से बच रहे हैं। स्थिति ये है कि अभी तक क्षेत्र की एक तिहाई फसल मंडियों तक नहीं पहुंची। चना का समर्थन मूल्य 5850 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है। बाजार भाव 4800 से 5000 रुपए हैं। व्यापारी के यहां जरुरतमंद किसान ही सरसों बेचने आ रहे हैं। कुल मिलाकर बेहतर भाव की उम्मीद और पिछले भुगतान अनुभव, मौजूदा बाजार की अनिश्चितता के चलते किसान उपज रोककर बैठे हैं। संगरिया क्रय विक्रय सहकारी समिति के खरीद प्रभारी दीपेंद्र पूनियां ने बताया कि सरसों चना खरीद शुरू है तथा पंजीकृत किसानों को तिथियां आवंटित हो चुकी हैं। बहुत कम किसान मंडियों में आ रहे हैं। गांव बोलांवाली के एक किसान सुनील को 28 मार्च आवंटित है। हैंडलिंग-परिवहन के लिए द्वितीय टेंडर प्रक्रिया प्रस्तावित है।

Updated on:
28 Mar 2026 10:58 am
Published on:
28 Mar 2026 10:57 am
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