हनुमानगढ़

धान की सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों को 51 करोड़ रुपए प्रति वर्ष हो रहा नुकसान

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. जिला मुख्यालय पर सोमवार को भाजपा पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर परमल धान की सरकारी खरीद करने की मांग की। धान की पराली जमीन में मिलने के लिए पंजाब, हरियाणा व यूपी की तर्ज पर कृषि यंत्रों पर अनुदान दिलाने बाबत जिलाध्यक्ष बलवीर बिश्नोई के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा। इसमें बताया कि हनुमानगढ़ तथा गंगानगर जिलों में 42 हजार हैक्टेयर क्षेत्रफल में धान की बुवाई होती है।  

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धान की सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों को 51 करोड़ रुपए प्रति वर्ष हो रहा नुकसान

धान की सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों को 51 करोड़ रुपए प्रति वर्ष हो रहा नुकसान
-17.85 लाख क्विंटल धान का होता है उत्पादन
-सरकारी खरीद की मांग को भाजपा पदाधिकारियों ने कलक्टर को सौंपा ज्ञापन

हनुमानगढ़. जिला मुख्यालय पर सोमवार को भाजपा पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर परमल धान की सरकारी खरीद करने की मांग की। धान की पराली जमीन में मिलने के लिए पंजाब, हरियाणा व यूपी की तर्ज पर कृषि यंत्रों पर अनुदान दिलाने बाबत जिलाध्यक्ष बलवीर बिश्नोई के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपा। इसमें बताया कि हनुमानगढ़ तथा गंगानगर जिलों में 42 हजार हैक्टेयर क्षेत्रफल में धान की बुवाई होती है। इसमें पचास प्रतिशत क्षेत्रफल में परमल धान की औसतन उपज 85 क्विंटल प्रति हैक्टेयर होती है। अत: कुल 17.85 लाख क्विंटल धान का उत्पादन होता है। परमल धान को सरकारी रेट पर खरीदने का प्रावधान है। राज्य सरकार अनुशंषा कर दे तो केन्द्र सरकार धान की खरीद शुरू कर दे। राज्य सरकार एक तरफ तो किसानों की हिमायत की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ अनुशंषा नहीं करने पर किसानों की धान की खरीद नहीं हो पा रही है। इसके कारण किसानों को मजबूरन 1600 रुपए निर्धारित है। इस प्रकार 281 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से दोनों जिलों के किसानों को 51 करोड़ रुपए प्रति वर्ष आर्थिक नुकसान होता है। अत: निवेदन है कि परमल धान की एमएसपी पर सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए। धान की पराली जलाने के कारण हो रहे प्रदूषण की एक विकट समस्या है। एनजीटी के निर्देशों की अनुपालना में जिला प्रशासन के द्वारा पराली को जलाने से रोकने के लिए किसानों पर जुर्माना लगाकर एफआईआर दर्ज करवाई जाती है। पराली को नहीं जलाने के लिए पराली की जुताई करके जमीन में मिलाना ही एकमात्र उपाय है, इसके लिए आधुनिक कृषि यंत्रों जैसे सुपरसिडर, चैपर, रोटावेटर व एस. एम.एस तथा बड़े ट्रैक्टर की जरूरत होती है। जिन पर औसतन 12 लाख रुपए एक किसान को खर्च करने पड़ते हैं, जो कि किसाने के सामथ्र्य से बाहर है। भारत सरकार की विशेष स्कीम प्रमोटियोन ऑफ एग्रीकल्चर मैक्नीशियन फॉर न सीटू मैनेटजमेंट ऑफ क्रॉप रिसडयूज के अंतर्गत इन कृषि यंत्रों पर पंजाब, हरियाणा, यूपी. तथा एनसीआर दिल्ली के किसानों को 80 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है। परंतु राजस्थान राज्य इस स्कीम में शामिल नहीं है, इसके कारण किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर धान की खरीद राजस्थान सरकार द्वारा नहीं करने के कारण किसानों को अपनी धान की फसल ओने-पोने दामों पर बेचनी पड़ी। इससे किसानों को वित्तीय नुकसान हुआ। भारतीय जनता पार्टी ने ज्ञापन देकर मुख्यमंत्री से परमल धान की फसल समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए राजस्थान सरकार अतिशीघ्र केन्द्र सरकार को अनुशंषा कर एम. एस. पी. पर सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग की है। इस मौके पर जिलाध्यक्ष बलवीर बिश्नोई, किसान मोर्चा नगरअध्यक्ष भगवान सिंह खुड़ी, युवा नेता अमित सहू, पूर्व कृउमंस अध्यक्ष अरूण खिलेरी, जिला उपाध्यक्ष कविंद्र सिंह शेखावत, जिला मीडिया प्रभारी दीपक खाती व अन्य भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे।

Published on:
29 Jun 2021 08:11 am
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