https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. नोहर-सिद्धमुख परियोजना से जुड़ी नहरों के आसपास पानी चोरी करने वाले किसानों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं।
चोरी रोकने से कतरा रहा सरकारी सिस्टम, 354 मामलों में आबपासी के बिना कार्रवाई अटकी
-सिद्धमुख नोहर परियोजना की नहरों में धड़ल्ले से हो रहा है पानी चोरी
-टेल के किसानों को नहीं मिल रहा हक का पानी
हनुमानगढ़. नोहर-सिद्धमुख परियोजना से जुड़ी नहरों के आसपास पानी चोरी करने वाले किसानों के हौसले लगातार बुलंद हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि नहरों से धड़ल्ले से पानी चोरी होने के बावजूद इसको रोकने को लेकर सरकारी तंत्र अब भी गंभीरता नहीं बरत रहा। जयपुर मुख्यालय तक शिकायत पहुंचने पर यदा-कदा स्थानीय सरकारी सिस्टम में कुछ हलचल जरूर होती है। लेकिन परिणाम वही ढाक के तीन पात ही नजर आते हैं।
ताजा स्थिति यह है कि कुछ दिन पहले जिला प्रशासन स्तर पर पानी चोरी रोकने को लेकर टीमें भी गठित की गई। इसके बाद निगरानी दल ने पानी चोरी वाले स्थानों पर जाकर कई प्वाइंट भी चिन्हित किए। इसमें नोहर व भादरा क्षेत्र में पानी चोरी से संबंधित ३५४ मामले चिन्हित किए गए हैं। जल संसाधन विभाग ने इन पानी चोरों के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर जिला प्रशासन को आबपासी रिपोर्ट बनवाने को लेकर अवगत भी करवाया। इस रिपोर्ट के आधार पर ही संबंधित चोरों की जमीन का पता लगाकर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी थी। लेकिन अब राजस्व विभाग के पटवारियों ने आबपासी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी जल संसाधन विभाग के पटवारियों की मानते हुए आबपासी रिपोर्ट जल संसाधन विभाग को ही तैयार करने की बात कही है। इसमें राजस्व विभाग की टीम रिकॉर्ड आदि उपलब्ध करवाने को तैयार है। ऐसे में अब हालात ऐसे बन गए हैं कि पानी चोरी रोकने को लेकर बिना आबपासी रिपोर्ट के ३५४ मामलों में कार्रवाई अटकती हुई नजर आ रही है। इस स्थिति में अफसर जब तक टाल-मटोल की नीति नहीं छोड़ेंगे, तब तक पानी चोरों को सबक सिखाना संभव नहीं है।
आबपासी रिपोर्ट में क्या
आबपासी रिपोर्ट में संबंधित किसान का रिकॉर्ड होता है। इस रिकॉर्ड के बिना संबंधित किसान के खिलाफ कार्रवाई करने में कानूनी अड़चने आती है। लेकिन नोहर व भादरा में स्थिति यह है कि साढ़े तीन सौ मामलों में आबपासी रिपोर्ट ही तैयार नहीं हो रही। भादरा के तहसीलदार जय कौशिक के अनुसार आबपासी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी जल संसाधन विभाग की है। राजस्व पटवारी केवल इसमें सहयोग कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि हमारी पूरी टीम पानी चोरी रोकथाम को लेकर निगरानी कर रही है। जहां भी सहयोग की जरूरत पड़ती है, हमारी टीम जल संसाधन विभाग के साथ खड़ी नजर आती है। लेकिन जो मूल काम जिस विभाग का होगा, काम तो उसी को करना होगा। वहीं जल संसाधन विभाग नोहर खंड के अधीक्षण अभियंता महेंद्र सिंह कुलहरि का कहना है कि हमारे पास दो-तीन ही पटवारी हैंं। ऐसे में आबपासी रिपोर्ट बनाने का काम प्रभावित हो रहा है।
...फैक्ट फाइल....
-निगरानी दल ने नोहर व भादरा में ३५४ प्वाइंट पानी चोरी के किए चिन्हित।
- सिद्धमुख-नोहर परियोजना की लंबाई ६०३ किमी है।
-इस परियोजना से १२७०२२ हेक्टेयर को सिंचित करने की योजना।
-जिला कलक्टर ने १९ अक्टूबर २०२० को पानी चोरी रोकने को लेकर पांच निगरानी दलों का गठन किया।
......वर्जन.....
हमारी टीम तैयार
पानी चोरी मामले में जल संसाधन विभाग के अधिकारी सही स्थिति नहीं बता रहे हैं। जिला प्रशासन की टीम हमेशा चोरी रोकने को मुस्तैद है। आबपासी रिपोर्ट का जहां तक मामला है, हमारी टीम सहयोग कर रही है।
-जाकिर हुसैन, कलक्टर हनुमानगढ़
रिकॉर्ड ही नहीं
बिना आबपासी के संबंधित किसान के खिलाफ कार्रवाई करना संभव नहीं। हमारे विभाग ने पानी चोरी वाले स्थान चिन्ह्ति कर प्रशासन को सौंप दिए। अब संबंधित जगह किस किसान की है, इसका रिकॉर्ड तो राजस्व विभाग ही दे सकता है। क्योंकि अभी वहां नहरी सिस्टम के रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुए हैं। निगरानी के लिए पुलिस जाब्ता भी मांग के अनुसार नहीं मिल रहा।
-विनोद मित्तल, मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग हनुमानगढ़