हनुमानगढ़. महामारी के विकट हालात में संक्रमण से बेखौफ होकर सेवा देने वाले कोविड स्वास्थ्य सहायक अब अनदेखी की मार झेल रहे हैं। रोजगार की आस में कोरोना की परवाह ना करते हुए टीकाकरण, रोगियों के सैंपल, सर्वे व दवा वितरण जैसे कार्य अंजाम देने वाले कोविड सहायक फिलहाल खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
महामारी में सेहत संभालने वालों पर अनदेखी की मार
- जिले में किसी भी ब्लॉक में कोविड स्वास्थ्य सहायकों को नहीं मिला पूरा मानदेय
- कहीं छह तो कहीं तीन व चार माह की पगार बकाया
अदरीस खान @ हनुमानगढ़. महामारी के विकट हालात में संक्रमण से बेखौफ होकर सेवा देने वाले कोविड स्वास्थ्य सहायक अब अनदेखी की मार झेल रहे हैं। रोजगार की आस में कोरोना की परवाह ना करते हुए टीकाकरण, रोगियों के सैंपल, सर्वे व दवा वितरण जैसे कार्य अंजाम देने वाले कोविड सहायक फिलहाल खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। क्योंकि विकट परिस्थितियों में सेवा के बावजूद उनको मानदेय भुगतान के लिए धरना-प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है।
सरकारी अफसरों और नेताओं ने कोविड में बेहतर कामकाज का श्रेय खूब लूटा है। मगर फिल्ड में हजारों चिकित्सकों, नर्सिंगकर्मियों, लैब तकनीशियनों आदि के साथ कोविड स्वास्थ्य सहायकों व अन्य कर्मिकों की अच्छी मेहनत से यह सब संभव हुआ। इस स्थिति के बावजूद जब मानदेय भुगतान के लिए कोविड सहायकों को महीनों प्रतीक्षा करनी पड़े तो सरकार व उसके अफसरों की कार्यशैली व संवेदनशीलता पर सवाल खड़े होना लाजिमी है। बढ़ती महंगाई के बीच अल्प मानदेय पर कार्य कर रहे कोविड स्वास्थ्य सहायक पगार के भुगतान के लिए ब्लॉक व जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक ज्ञापन वगैरह सौंप चुके हैं। अब तक उनको आश्वासन तो जोरदार मिले हैं। मगर आश्वासन के हिसाब से राहत नहीं मिली है।
कई मामाओं के भाणजे जैसे
जानकारी के अनुसार कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान प्रदेश भर में नर्सिंगकर्मियों, लैब तकनीशियनों आदि के सहयोग के लिए संविदा पर कोविड स्वास्थ्य सहायक रखे गए थे। जिले में करीब 710 कोविड स्वास्थ्य रखे गए थे। इनका मानदेय 7900 रुपए तय किया गया था। खास बात यह कि कोविड सहायकों की निगरानी तो चिकित्सा विभाग को दे दी गई। मगर इनको मानदेय का भुगतान नगरीय निकाय व पंचायतों को करना होता है। शहरी क्षेत्र के सहायकों को नगर पालिका तथा ग्रामीण क्षेत्र के सहायकों को पंचायत के जरिए भुगतान किया जा रहा है। इस तरह कोविड स्वास्थ्य सहायकों की हालत 'कई मामाओं के भाणजेÓ जैसी हो गई है।
मानदेय भुगतान की यह स्थिति
जिले में जो कोविड स्वास्थ्य सहायक ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत हैं, उन सबको तो अब तक तीन माह का मानदेय दिया जा चुका है। हालांकि उनका छह माह का मानदेय बकाया है। जबकि शहरी क्षेत्र में नगरीय निकाय के हिसाब से स्थिति अलग-अलग है। जिले में सबसे ज्यादा चार माह का भुगतान केवल हनुमानगढ़ में नगर परिषद क्षेत्र में कार्यरत कोविड स्वास्थ्य सहायकों को किया गया है। जबकि भादरा नपा क्षेत्र में तीन माह का भुगतान हो चुका है।
यहां हालत ज्यादा खराब
रावतसर, नोहर व पीलीबंगा नगरपालिका क्षेत्र में कार्यरत कोविड सहायकों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। यहां उनको अब तक एक भी दिन की पगार नहीं दी गई है। इसी तरह संगरिया नपा क्षेत्र में लगे सहायकों की हालत भी ज्यादा ठीक नहीं है। वहां उनको केवल 26 दिन का मानदेय अब तक दिया गया है।
बजट के अभाव में दिक्कत
शहरी क्षेत्र में कार्यरत कोविड सहायकों का मानदेय स्वायत्त शासन विभाग तथा ग्रामीण क्षेत्र के सहायकों को ग्राम पंचायत के एसआरएफ से जारी होता है। पीलीबंगा, रावतसर व नोहर क्षेत्र में बजट के अभाव में मानदेय भुगतान नहीं हुआ है। जल्दी ही भुगतान की संभावना है। कोविड सहायकों ने ज्ञापन वगैरह के जरिए समस्या बताई थी, वह उच्चाधिकारियों को बता दी गई।
- डॉ. नवनीत शर्मा, सीएमएचओ।