हनुमानगढ़

जानिए हनुमानगढ़ में किस कारण से बस्ते का बोझ धरतीपुत्रों पर पड़ सकता है भारी

https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. गेहूं उत्पादन में पूरे राजस्थान में सिरमौर रहने वाले हनुमानगढ़ जिले में अबकी बार फसल कटाई प्रयोग पर असमंजस के बादल मंडरा रहे हैं। इसके कारण गेहूं उत्पादक किसानों को आगे प्रधानमंत्री फसल बीमा क्लेम लेने में दिक्कत आ सकती है। वर्तमान में जिले के कई पटवार मंडल ऐसे हैं, जहां पटवारियों ने फसल कटाई प्रयोग करने से इनकार कर दिया है।  

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जानिए हनुमानगढ़ में किस कारण से बस्ते का बोझ धरतीपुत्रों पर पड़ सकता है भारी

जानिए हनुमानगढ़ में किस कारण से बस्ते का बोझ धरतीपुत्रों पर पड़ सकता है भारी
-प्रदेश में गेहूं उत्पादन में सिरमौर हनुमानगढ़ जिले में आवंटित लक्ष्य के मुकाबले पूरे नहीं हो रहे फसल कटाई प्रयोग
-बीमा क्लेम जारी करने में कंपनी कर सकती है क्लेश, कंपनी सरकार के फसल कटाई प्रयोग को पहले ही दे चुकी है चुनौती
पुरुषोत्तम झा. हनुमानगढ़. गेहूं उत्पादन में पूरे राजस्थान में सिरमौर रहने वाले हनुमानगढ़ जिले में अबकी बार फसल कटाई प्रयोग पर असमंजस के बादल मंडरा रहे हैं। इसके कारण गेहूं उत्पादक किसानों को आगे प्रधानमंत्री फसल बीमा क्लेम लेने में दिक्कत आ सकती है। वर्तमान में जिले के कई पटवार मंडल ऐसे हैं, जहां पटवारियों ने फसल कटाई प्रयोग करने से इनकार कर दिया है।
हालत यह है कि अपने हल्के के अतिरिक्त दूसरे पटवार मंडल का कार्य देख रहे इन पटवारियों ने इन पटवार मंडलों के बस्ते भी संबंधित तहसील कार्यालयों में जमा करवा दिए हैं। इस स्थिति में चालू रबी सीजन में गेहूं व सरसों के फसल कटाई प्रयोग कैसे संपादित होंगे, इस पर संशय बना हुआ है। हालांकि जिला प्रशासन ने अब रबी २०२०-२१ सीजन में भू अभिलेख निरीक्षकों को मोबाइल एप के जरिए फसल कटाई प्रयोग को संपादित करने का निर्देश जारी किया है। लेकिन अभी इसके नतीजे आने बाकी है। इस हालात में किसानों की बेचैनी लाजमी ही है। जो माहौल इस वक्त बना हुआ है उसमें बस्ते का बोझ धरतीपुत्रों पर भारी पड़ सकता है।
जिले की बात करें तो बीते रबी सीजन में ओलावृष्टि से प्रभावित हजारों किसान अभी तक क्लेम के लिए चक्कर काट रहे हैं। खरीफ सीजन २०१९ में नोहर व भादरा के १२ पटवार मंडलों के करीब सात हजार किसान बीमा क्लेम के लिए अब तक भटक रहे हैं। फसल कटाई प्रयोग को चुनौती देते हुए बीमा कंपनी ने हजारों किसानों को क्लेम देने से मना कर दिया है।
कृषि विभाग स्तर पर जांच में यह साफ कर दिया गया है कि बीमा कंपनी प्रभावित किसानों को जल्द क्लेम जारी करे। मगर बीमा कंपनी की हठ के चलते अब तक प्राकृतिक आपदा से पीडि़त किसानों को राहत नहीं मिली है। ऐसे में चालू रबी सीजन में जब फसल कटाई प्रयोग ही संपादित नहीं होंगे तो किसानों को कैसे क्लेम मिल सकेगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जिला प्रशासन के अधिकारी बताते हैं कि पीएम फसल बीमा योजना गिरदावरी आधारित है। बिना गिरदावरी के फसल कटाई प्रयोग करना मुमकिन नहीं। इस स्थिति में जब तक गिरदावरी रिपोर्ट नहीं आएगी, फसल उत्पादन का मूल्यांकन नहीं हो सकेगा।

किसको कितने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले में गेहूं के फसल कटाई प्रयोग को लेकर १२१२ प्रयोग करने का लक्ष्य आवंटित किया गया है। यह कार्य राजस्व विभाग को दिया गया है। इसी तरह जौ के ३२० व तारामीरा के ३६ फसल कटाई प्रयोग भी राजस्व विभाग को आवंटित किया गया है। जबकि सरसों के १२१२ व चने ७७६ फसल कटाई प्रयोग के लक्ष्य कृषि विभाग को आवंटित किए गए हैं। परंतु जिले के ४८ पटवार मंडल ऐसे हैं जहां पर पटवारियों के पास अपने हल्के के अतिरिक्त अन्य का चार्ज भी है। इन अतिरिक्त चार्ज वाले पटवार मंडलों के बस्ते जमा करवाकर पटवारियों ने गिरदावरी करने से इनकार कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि फसल कटाई प्रयोग गिरदावरी आधारित होने के कारण सरसों के फसल कटाई प्रयोग भी प्रभावित हो रहे हैं। क्योंकि कृषि विभाग की टीम को जो लक्ष्य आवंटित किए गए हैं, उन्हें भी कार्य पूर्ण करने के लिए गिरदावरी की जरूरत पड़ेगी।

कब तक होना था पूरा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत निर्धारित कैलेंडर के अनुसार जिला प्रशासन की ओर से फसल कटाई प्रयोग करने वाले कार्मिकों को फरवरी में ट्रेनिंग देने का कार्य पूर्ण कर लिया जाता है। खेत का चयन करने के बाद २८ फरवरी तक गिरदावरी रिपोर्ट तैयार कर ली जाती है। इसके बाद पांच से दस मार्च के बीच फसल कटाई प्रयोग कार्य शुरू कर दिए जाते हैं।

......फैक्ट फाइल.....
-रबी २०२०-२१ सीजन में २८ फरवरी तक गिरदावरी रिपोर्ट तैयार होनी थी, लेकिन ४८ पटवार मंडलों में यह कार्य अधूरा है।
-चालू रबी सीजन में जिले में गेहूं में फसल कटाई प्रयोग को लेकर १२१२ लक्ष्य आवंटित किए गए हैं।
-रबी सीजन २०१९-२० में ओलावृष्टि से करीब नौ हजार किसानों के खेत में फसलें बर्बाद हुई। इसमें छह हजार किसान अब तक क्लेम के लिए चक्कर काट रहे हैं।
-खरीफ सीजन २०१९ में नोहर व भादरा के १२ पटवार मंडलों के करीब सात हजार किसान भी बीमा क्लेम के लिए भटक रहे हैं।
-चालू रबी सीजन में नौ मार्च २०२१ को ओलावृष्टि से नोहर के आसपास के गांवों में ८० प्रतिशत तक फसलें खराब हो गई है।

........वर्जन.....
कटाई प्रयोग में देरी
जिले के ४८ पटवार मंडलों के बस्ते जमा करवा दिए गए हैं। बिना गिरदावरी के फसल कटाई प्रयोग नहीं हो सकती। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है। गिरदावरी के अभाव में गेहूं, जौ, सरसों सहित अन्य फसलों के फसल कटाई प्रयोग में देरी हो रही है।
-विनोद गोदारा, सहायक निदेशक, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग हनुमानगढ़

Published on:
19 Mar 2021 08:52 am
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