—संगरिया शहर की जनता मांग रही अंडरपास —रेल की शुरुआत से बसा शहर अब रेल लाईन पार करना ही हुआ परेशानी —2013 में हुआ था शिलान्यास
संगरिया. रेलवे स्टेशन की स्थापना से बसा यह शहर वर्तमान में उसी रेल लाइन के कारण दो भागों में विभाजित हो गया। इसे समय के साथ आबादी का विस्तार कहां जाए या प्रशासन तंत्र की नाकामी, जिससे दोनों भागों को जोडऩे का जो समुचित प्रयास अब तक होना चाहिए था वह नहीं हो पाया। रेलवे फाटक सी-51 पर 2012-13 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण करवा कर शहर को रेलवे फाटक पर लगने वाली गाडिय़ों के आवागमन के समय जाम से राहत प्रदान की। परंतु जैसे-जैसे आबादी बढ़ी उसके अनुरूप यह अपर्याप्त लगने लग गया। इसका निर्माण शहर के पुराने विहार सिनेमा से शुरू होकर दक्षिण दिशा की ओर डीआर स्कूल तक किया गया है परंतु इससे सबसे अधिक प्रभाव रेलवे ओवरब्रिज से नीचे की ओर से डबवाली रोड की आबादी जिसमें वर्तमान में वार्ड नंबर 28 से 33 तक की आबादी निवास करती है। वर्ष 2012-13 में नगरपालिका मंडल में पालिकाध्यक्ष प्रदीप बेनीवाल के नेतृत्व में अंडरपास बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
27 सितंबर 2013 में तत्कालीन विधायक डॉ.परम नवदीप द्वारा स्वामी केशवानंद चौक के नजदीक रेलवे अंडरपास का शिलान्यास कर दिया गया तब से लेकर आज तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं हो पाया। शिलान्यास पत्थर के आगे एक ईंट भी राज्य सरकार व रेलवे किसी के द्वारा नहीं रखी जा सकी। जिससे क्षेत्र की जनता को इस रेल लाइन को पार करने का सुगम मार्ग प्राप्त हो सके। इस सब में कोढ़ में खाज का कार्य रेलवे द्वारा किया गया रेलवे लाइन के दोनों और स्लीपर खड़े कर ऊंची दीवार बना दी गई। वर्तमान में स्थिति ऐसी है की रेल लाइन पार के लोगों को बाजार आना और बाजार के लोगों को रेल लाईन पार जाना दोनों ही एक बहुत बड़ी समस्या हो गई है। सैकड़ों दुकानदार, विद्यार्थी, कर्मचारी, शिक्षक आदि नित्य प्रति रेल लाइन के इस पार से उस पार जाते हैं उन्हें समस्या का सामना करना पड़ रहा है।(नसं.)
निरंतर हो रही मांग
2013 में राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार थी। उसके बाद पांच साल तक भाजपा की वसुंधरा सरकार रही और वर्तमान में करीब सवा दो साल से कांग्रेस की गहलोत सरकार शासन में है परंतु जनता अभी तक इसकी बाट देख रही है कि इस अंडरपास का निर्माण कब होगा और कब आमजन को रेल लाइन पार करने का एक सुगम मार्ग मिल सकेगा। जिससे सुविधाजनक रूप से वह रेल लाइन के इस पार से उस पार जा सकेगा। इस सम्बंध में आवागमन के मार्ग का निर्माण रेलवे अधिकारी राज्य सरकार का मामला बताते है। 2015 के रेलवे महाप्रबंधक दौरे के समय संगरिया में अंडरपास के निर्माण की सहमति दी गई थी। जिसके बदले में रेलवे फाटक सी-50 को बंद करने की बात कही गई थी परंतु इस प्रस्ताव पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।(नसं.)
नहीं है कोई वैकल्पिक मार्ग
वर्तमान में बड़े वाहनों के लिए शहर में प्रवेश का एकमात्र मार्ग रेलवे ओवरब्रिज है व उस पर किसी भी प्रकार का अवरोध होने पर शहर में प्रवेश करने के सभी मार्ग ठप्प हो जाते हैं। ऐसा अनेक बार बड़े ट्राले के रेलवे ओवरब्रिज पर फंस जाने के कारण देखने को भी मिला है। ग्रामोत्थान विद्यापीठ क्षेत्र में बना रेलवे फाटक सी-50 छोटे वाहनों के लिए उपयोग किया जा रहा है परंतु उस मार्ग में भी आवासीय गली होने के चलते वह आमजन के लिए परेशानी वाला ही है(नसं.)
अभी तक हो रहे हैं सिर्फ वादे ही वादे
ऐसा नहीं कि पिछले आठ साल से अंडरपास को लेकर किसी ने बात नहीं की या कोई वादा नहीं किया बल्कि इस सम्बंध में वादे ही वादे किए गए। पालिका अध्यक्ष प्रदीप बेनीवाल रहे या नत्थूराम सोनी रहे या अभी नवनिर्वाचित पालिकाध्यक्ष सुखबीर सिंह सिद्धू हों, यह मामला दर्जनों बार नगर पालिका के पटल पर प्रस्तुत हुआ, पास भी किया गया परंतु निर्माण के संदर्भ में प्रगति अभी तक नहीं देखने को नहीं मिली है। ऐसी ही स्थिति विधायक डॉ परम नवदीप और उसके बाद कृष्ण कड़वा के कार्यकाल के दौरान रही। दोनों ने ही दावा किया कि निर्माण शीघ्र करवाया जाएगा परंतु निर्माण नहीं हो पाया। वर्तमान में गुरदीप सिंह शाहपीनी यह दावा कर रहे हैं कि 8 करोड़ से अधिक लागत का यह अंडरपास शीघ्र ही शुरू हो जाएगा। परन्तु अभी तक तो जनता को इसका इंतजार है।(नसं.)
धार्मिक स्थल व शिक्षण संस्थान सभी प्रभावित
रेलवे अंडरपास के नहीं होने से रेल लाइन के और पास उस पार बसे लोगों को हर छोटी मोटी जरूरत के लिए बाजार आने वाले बाजार आने में होने वाली परेशानी तो है ही है साथ ही मुख्य बाजार क्षेत्र के लोगों को उस पार स्थित स्वामी केशवानंद महाविद्यालय, मानव मंगल महिला शिक्षा महाविद्यालय, गुरु जंभेश्वर मंदिर, गणेश मंदिर सहित अनेक शिक्षण संस्थान व धार्मिक संस्थान में जाने में भी नियमित परेशानी का सामना करना पड़ता है।(नसं.)
दर्जनों संगठन कर रहे हैं संघर्ष
अंडरपास के निर्माण के लिए स्वामी केशवानंद संघर्ष समिति सहित शहर के दर्जनभर से अधिक संगठन नियमित पत्राचार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, उच्च नेताओं के समक्ष मांग करके इस मामले को उठा रहे हैं। अंडर पास निर्माण के लिए 2014 में हस्ताक्षर अभियान, धरना प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम 35 फुट लंबा ज्ञापन, इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, रेल मंत्री, प्रभारी मंत्री, सांसद, जिला कलेक्टर, रेलवे महाप्रबंधक, डीआरएम सहित अनेकों जनप्रतिनिधि व अधिकारियों को इस संदर्भ में अब तक ज्ञापन दिया जा चुका है।(नसं.)
पुलिस व चिकित्सा सबसे प्राथमिक आवश्यकता
अंडरपास के अभाव में टिब्बी बस स्टैण्ड क्षेत्र में आवश्यकता होने पर चिकित्सा एवं पुलिस पहुंचने में ही सबसे बड़ी दुविधा का सामना करना पड़ता है। अब तो रास्ते की परेशानी के चलते गुरुनानक नगर के लोग पृथक कल्याण भूमि तक की मांग करने लगे हैं।(नसं.)
नगर पालिका के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालते ही प्रथम कार्य रेलवे अंडरपास के निर्माण व रेलवे फुट ओवरब्रिज के निर्माण के संबंध में पत्र तैयार करवाए हैं। प्रभारी मंत्री के आने पर उनसे मुलाकात कर इस कार्य को शीघ्रता से पूर्ण करवाने का प्रयास किया जाएगा।
- सुखबीर सिंह सिद्धू अध्यक्ष नगर पालिका संगरिया
विधायक बनने के बाद पहले दिन से अंडर पास का लक्ष्य लेकर चल रहा हूं। पूर्व में बनाई गई डीपीआर में लागत में बदलाव होने पर अब नई डीपीआर तैयार की गई है जिसमें आठ करोड़ की लागत से पूर्ण शैड वाला अंडरपास बनाने का प्रस्ताव है। संभावना है कि कुछ दिनों में इसकी मंजूरी मिल जाएगी व निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
- गुरदीप सिंह शाहपीनी, विधायक संगरिया
नियमित रूप से दुकान से घर आने व घर से दुकान जाने के लिए दिन में तीन से चार चक्कर लगाने पड़ते हैं व प्रति चक्कर में 2 से 3 किलोमीटर की अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ती है। वर्तमान में पेट्रोल का रेट एक सौ रुपए की सीमा को पार कर गया है। ऐसे में सरकार को चाहिए आमजन की दुविधा को देखते हुए शीघ्र अंडरपास के निर्माण को स्वीकृति प्रदान करें जिससे शहर के अतिरिक्त प्रदूषण पर रोक लगे व ईंधन की बचत भी हो।
- महेश जेसवानी व्यापारी
—प्लस फोटो:
एसएन22०२के१: संगरिया में प्रस्तावित अंडरपास के स्थान को पार करते आमजन।
एसएन22०२के2: संगरिया में प्रस्तावित अंडरपास के स्थान पर रेलवे द्वारा बनाई गई दीवार।
एसएन२२०२के३: संगरिया में अंडरपास का 2013 का शिलान्यास पत्थर गुमनामी के अंधेरे में।
एसएन२२०२के४: संगरिया के नगरपालिकाध्यक्ष सुखबीर सिंह सिद्धू।
एसएन२२०२के५: संगरिया के विधायक गुरदीप सिंह शाहपीनी।
एसएन२२०२के६: संगरिया के गुरुनानक नगर निवासी महेश जेसवानी।
एसएन२२०२के७: संगरिया के स्वामी केशवानंद संघर्ष समिति के सदस्य।