https://www.patrika.com/hanumangarh-news/ हनुमानगढ़. जिले में जाता मानसून खरीफ फसलों के लिए मुसीबत बन रहा है। सावन में जिस वक्त फसलों को सिंचाई पानी की जरूरत थी, उस समय बरसात नहीं हुई। अब जब नरमा चुगाई का वक्त आ गया है, ऐसे में लगातार हो रही बारिश से सिंचित क्षेत्र के किसानों में मायूसी है।
फसलों के लिए मुसीबत बनी बारिश, हनुमानगढ़ में खरीफ फसलों को 30 प्रतिशत तक नुकसान
-बरसात से सर्वाधिक नुकसान नरमा-कपास में
-जिले में खरीफ फसलों को वर्षा से 30 प्रतिशत तक नुकसान
हनुमानगढ़. जिले में जाता मानसून खरीफ फसलों के लिए मुसीबत बन रहा है। सावन में जिस वक्त फसलों को सिंचाई पानी की जरूरत थी, उस समय बरसात नहीं हुई। अब जब नरमा चुगाई का वक्त आ गया है, ऐसे में लगातार हो रही बारिश से सिंचित क्षेत्र के किसानों में मायूसी है। पिछले सप्ताह हुई बरसात से जिले में खरीफ फसलों को तीस प्रतिशत तक नुकसान होने की बात अधिकारी कह रहे हैं। हालांंकि समान रूप से सभी तहसीलों में बरसात नहीं होने के कारण खराबे का क्षेत्रफल अधिक नहीं है। लेकिन फिर भी जहां-जहां बरसात हो रही है, वहां खरीफ फसलों को नुकसान हो रहा है। जानकारी के अनुसार जिले में चालू खरीफ सीजन में बरसात से सर्वाधिक नुकसान नरमा-कपास की फसल में हुआ है। हनुमानगढ़ जिले में चालू खरीफ सीजन में कुल 158700 हेक्टैयर में नरमा-कपास, 268670 हेक्टेयर में ग्वार, 44810 हैक्टेयर में बाजरा, 34710 हेक्टैयर में धान, 101800 हेक्टैयर में मूंग, 55970 हेक्टेयर में मोठ की बिजाई हुई है। सिंचित व असिंचित क्षेत्रों को मिलाकर करीब सात लाख हेक्टैयर क्षेत्र में जिले में बिजाई की गई है। सिंचित क्षेत्र में इन दिनों हो रही बारिश फसलों के लिए बैरन बनी हुई है।
किसान दें सूचना
जहां-जहां बरसात से खरीफ फसलों को नुकसान हो रहा है, वहां के किसान बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर खराबे की शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। इसमें खराबे की दिनांक, किसान का नाम, फसल का नाम, तहसीलव पटवार मंडल आदि की सूचना भी देनी होगी। साथ में फसल बीमा पॉलिसी संख्या भी बतानी होगी। इसके अलावा सरकार ने खरीफ सीजन में फसल बीमा करवाने वाले किसानों को मौका देते हुए फसल बीमा का पोर्टल २७ सितम्बर से नौ अक्टूबर तक फिर से खोलने का निर्णय लिया है। इसे लेकर निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस अवधि में समस्त फसल बीमा के डाटा पोर्टल पर अपडेट किए जा सकेंगे।
......वर्जन....
जिले में इन दिनों लगातार हुई बरसात से सर्वाधिक नुकसान नरमा-कपास को हो रहा है। खराबे का सर्वे करने को लेकर फील्ड स्टॉफ को कहा गया है। एक साथ बड़े क्षेत्र में बरसात नहीं होने से नुकसान भी बड़े क्षेत्र में नहीं कह सकते हैं। मगर जहां-जहां बरसात हो रही है, वहां सिंचित क्षेत्र में नुकसान भी तय है।
-दानाराम गोदारा, उप निदेशक, कृषि विभाग हनुमानगढ़