
मनोज कुमार गोयल
हनुमानगढ़. सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के निर्माण कार्य कितने गुणवत्तापूर्ण होते हैं, इसकी बानगी देखनी हो तो जंक्शन में राजीव चौक से अग्रसेन चौक तक फोरलेन मार्ग का जायजा लिया जा सकता है। करीब चार किलोमीटर लम्बे मार्ग पर करीब तीन माह पहले दो करोड़ अस्सी लाख रुपए खर्च कर डामरीकरण किया गया था और यह सड़क महज एक से डेढ़ माह में ही कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई। नतीजा यह हुआ है कि पीडब्ल्यूडी को करीब एक दर्जन स्थानों पर पेचवर्क करना पड़ गया है जबकि निर्माण कार्य के शिलान्यास के समय पीडब्ल्यूडी अभियंताओं ने गुणवत्ता को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे।
गुणवत्ताहीन निर्माण की बानगी इस मार्ग पर आईडीबीआई बैंक, वाल्मिकी चौक, अम्बेडकर चौक, लाल चौक, ट्रक यूनियन, औद्योगिक क्षेत्र के पास देखी जा सकती है। जहां नवनिर्मित सड़क पर कई पेचवर्क किए हुए नजर आ रहे हैं।
फोरलेन मार्ग के दोनों तरफ सड़क पर कई स्थानों पर पेचवर्क किया हुआ है। कुछ जगह तो पेचवर्क फिर से दरक भी गया है। खास बात यह है कि इस मार्ग में बस स्टैण्ड से एसबीआई बैंक मोड तक करीब चार सौ मीटर क्षेत्र में सड़क को डामरीकरण की बजाए सीसी किया गया था। यह सीसी सड़क भी इजी-डे के सामने क्षतिग्रस्त हो गई है, जिसे तारकोल डाल कर छिपाने का प्रयास किया गया है।
उल्लेखनीय है कि जंक्शन में राजीव चौक से बस स्टैण्ड, रोडवेज डिपो, अम्बेडकर चौक, लाल चौक, ट्रक यूनियन रेलवे फाटक से औद्योगिक क्षेत्र के आगे से होते हुए श्रीगंगानगर बाइपास पर स्थित महाराजा अग्रसेन चौक तक चार किलोमीटर फोरलेन मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त था और जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे पड़े हुए थे। वर्षों से नागरिक सड़क के पुनर्निर्माण की मांग कर रहे थे। इस पर पीडल्यूडी ने मई-जून माह में इस मार्ग का डामरीकरण करवाया था।
पाइप लाइन लीकेज से बना गड्ढा
सड़क के नीचे जलदाय विभाग पाइप लाइन बिछी हुई है। यह अक्सर वाहनों के दबाव से लीकेज हो जाती है। सड़क के डामरीकरण के समय नागरिकों ने पाइप लाइन को शिफ्ट करने की मांग भी उठाई थी लेकिन जलदाय विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग ने बजट के अभाव में लाइन शिफ्ट करने में असमर्थता जताई थी। इसको लेकर 'राजस्थान पत्रिका ने भी समाचार प्रकाशित कर चेताया था। हाल ही में वाहनों के दबाव से वाल्मिकी चौक के पास सड़क के बीचों-बीच पेयजल पाइप लाइन लीकेज हो गई थी। जलदाय विभाग ने लीकेज तो ठीक कर दिया लेकिन नवनिर्मित सड़क के बीचों बीच बना गड्ढा वाहन चालकों की परेशानी का सबब बना हुआ है।
सैन्टर लाइन और बॉर्डर लाइन करवाना भूले
पीडब्ल्यूडी ने सड़क की गुणवत्ता का तो ध्यान रखा ही नहीं बल्कि सड़क और यातायात नियमों के अनुसार आवश्यक लाइनिंग करवाना भी भूल गया। फोरलेन मार्ग पर सैन्टर लाइन, बॉर्डर, जैबरा क्रॉसिंग आदि भी नहीं करवाया गया है। नियमानुसार यह होना अति आवश्यक है। इसके अलावा सड़क के दोनों तरफ एक एक मीटर के हार्ड शोल्डर गायब हैं। सड़क के बीच में डिवाइडर क्षतिग्रस्त ही पड़ा है। कई स्थानों पर तो यह गायब ही हो गया है। एसबीआई बैंक के पास खतरनाक मोड है लेकिन वहां डिवाइडर का नमोनिशान ही नहीं है।
प्रभारी मंत्री की बैठक में भी उठा मुद्दा
सड़क के गुणवत्ताहीन होने का मुद्दा जिला प्रभारी मंत्री डॉ. बीडी कल्ला की बैठक में भी उठा। बैठक में सार्वजनिक निर्माण विभाग के एक अभियंता विभागीय कार्यों और गुणवत्ता का बखान कर रहे थे। इस दौरान अभियंता ने कहा कि जिले में सड़क बहुत बन नहीं हैं। इस पर सभापति गणेशराज बंसल ने कहा कि सड़कें बन रही हैं लेकिन उनकी गुणवत्ता ठीक नहीं होती है। उन्होंने जिला प्रभारी मंत्री के समक्ष हनुमानगढ़ जंक्शन में श्रीगंगानगर मार्ग पर राजीव चौक से अग्रसेन चौक तक के क्षेत्र की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। इस पर मंत्री ने कार्य ठीक करने के निर्देश दिए।
फैक्ट फाइल....
- जंक्शन में राजीव चौक से बस स्टैण्ड, रोडवेज डिपो, अम्बेडकर चौक, लाल चौक, ट्रक यूनियन रेलवे फाटक से महाराजा अग्रसेन चौक तक हुआ सड़क का डामरीकरण। चार किलोमीटर है दूरी, २.८० करोड़ रुपए से हुआ डामरीकरण।
जांच करके, होनी चाहिए सख्त कार्रवाई
&यह शहर की प्रमुख सड़क है। ऐसे में इस के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान रखा जाना चाहिए था। सड़क बनते ही क्षतिग्रस्त होनी शुरू हो गई है। ऐसे में इसकी जांच होनी चाहिए और जांच के बाद संबंधित पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।
- प्यारे लाल बंसल, अध्यक्ष, व्यापार मंडल, हनुमानगढ़।
सड़क बनी अच्छी बात, लेकिन गुणवत्ता नहीं
&श्रीगंगानगर मार्ग की हालात बहुत ज्यादा खराब थी। बरसात के समय स्थिति बहुत विकट हो जाती थी। ऐसे में सड़क बन गई है, अच्छी बात है, मगर गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है, तभी तो बनते ही टूट रही है।
- कपिल कुमार, व्यापारी, हनुमानगढ़।
गुणवत्ता का रखना चाहिए ध्यान
&हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर मार्ग पर राजीव चौक से अग्रसेन चौक तक निर्मित सड़क की गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है। वह कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है। जिला प्रभारी मंत्री डॉ. बीडी कल्ला की बैठक के दौरान अभियंताओं ने सड़कों का मुद्दा उठाया था तो मैने बताया था कि सड़कें बन रही हैं लेकिन गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
- गणेशराज बंसल, सभापति, नगर परिषद, हनुमानगढ़।
ठीक करवा दी है, रोक रखा है भुगतान
&बरसात आ गई थी, इससे कुछ जगह सड़क क्षतिग्रस्त हो गई थी, पेचवर्क करवा दिया गया है। ठेकेदार का भुगतान रोका हुआ है। भुगतान करने से पहले एक बार फिर सड़क को चैक कर लेंगे।
- गुरनाम सिंह, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी, हनुमानगढ़।
भ्रष्टाचार का जींवत उदाहरण
राज्य सरकार और उसके मुखिया निर्माण कार्य गुणवत्ता पूर्ण और भ्रष्टाचार मुक्त करने को लेकर भले ही बड़े-बड़े दावे करते हों लेकिन सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कार्य करने की अपनी एक 'शैलीÓ है। इसी शैली का उदाहरण है हनुमानगढ़ जंक्शन में राजीव चौक से अम्बेडकर चौक तक नवनिर्मित फोरलेन मार्ग। महज तीन महीने में ही एक दर्जन से अधिक स्थानों पर पेचवर्क के टुकड़े नजर आने लगे हैं।
दुखद बात यह है कि इस कार्य को लेकर ठेकेदार से लेकर जिम्मेदार अभियंताओं पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। किसी जेईएन, एईएन अथवा एक्सईएन को कोई चार्जशीट नहीं थमाई गई है। नवनिर्मित सड़क का तत्काल ही क्षतिग्रस्त हो जाना स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार का जींवत उदाहरण है।
खास बात यह है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग में कार्य की गुणवत्ता जांचने के लिए लम्बा चौड़ा लवाजमा है। जिसमें क्वालिंटी कंट्रोल लैब से लेकर कार्य को जांचने के लिए अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता तक नियुक्त हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यह सब क्या करते हैं। इन सब के होने के बावजूद जिला मुख्यालय पर ही निर्माण गुणवत्ताहीन हो रहा है तो दूरदराज की सड़कों का तो सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। हनुमानगढ़ में तो गुणवत्ताहीन सड़क का दंश जनता पहले ही भुगत रही है। हनुमानगढ़-सूरतगढ़ फोरलेन मार्ग पर भारी भरकम टोल वर्षों से लग रहा है और सड़क के हालात कैसे हैं, हम सब जानते हैं। अब समय आ गया है जब आमजन को स्वयं सक्रिय हो कर गुणवत्ताहीन निर्माण के खिलाफ आवाज उठानी होगी और निर्माण पर निगरानी रखनी होगी।