
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक घटना सामने आई है। हनुमानगढ़ जिले के संगरिया क्षेत्र के गांव नगराना स्थित आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब कक्षा 11 में पढ़ाई के दौरान अचानक छत से घूमता हुआ पंखा नीचे आ गिरा। इस हादसे में कक्षा में पढ़ाई कर रही दो छात्राएं गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनमें से एक छात्रा की आंख की पलक पर गहरा घाव लगने के बाद टांके लगाने पड़े हैं। सुबह करीब 11.15 बजे हुई इस घटना के समय कमरे में करीब 25 विद्यार्थी मौजूद थे, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना के बाद घायल छात्राओं को तुरंत हनुमानगढ़ जिला अस्पताल भेजा गया, जबकि दूसरी ओर ग्रामीणों और परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही बरतने और समय पर इलाज न दिलाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
नगराना के आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल में मंगलवार की सुबह अन्य दिनों की तरह सामान्य तरीके से पढ़ाई चल रही थी। सुबह करीब 11.15 बजे कक्षा 11 के छात्र-छात्राएं कमरे में बैठकर हिंदी विषय की पढ़ाई कर रहे थे। उस समय कमरे में लगभग 25 विद्यार्थी मौजूद थे।
अचानक से चलता हुआ छत का पंखा अपने पाइप से टूटकर सीधे नीचे बैठे विद्यार्थियों पर आ गिरा। तेज आवाज और चीख-पुकार के साथ कक्षा में भगदड़ मच गई।
इस हादसे में छात्रा कोमल की आंख की पलक पर पंखा लगने से गहरा कट लग गया, जबकि दूसरी छात्रा पूजा नायक के सिर पर चोट आई। राहत की बात यह रही कि दोनों छात्राओं की आंखें सुरक्षित बच गईं, लेकिन घाव गहरा होने के कारण कोमल की आंख की पलक पर टांके लगाने पड़े।
घटना की जानकारी फैलते ही घायल छात्राओं के परिजन और गांव के लोग बड़ी संख्या में स्कूल परिसर में एकत्र हो गए और रोष व्यक्त किया। ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद घायल छात्राओं को फर्स्ट एड या अस्पताल नहीं ले जाया गया। आरोप के अनुसार, स्कूल प्रशासन ने परिजनों के पहुंचने का इंतजार किया और उनके आने के बाद ही छात्राओं को इलाज के लिए भेजा गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गर्मी की छुट्टियों के बाद भी स्कूलों में बिजली के उपकरणों और जर्जर पंखों की सही से जांच नहीं की जा रही है, जिससे बच्चों की जान जोखिम में पड़ रही है।
स्कूल प्रशासन पर उठे सवालों के बाद विद्यालय की प्रधानाचार्य संगीता ने आरोपों को पूरी तरह से निराधार और गलत बताया है। प्रधानाचार्य ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों के खत्म होने के बाद स्कूल के सभी पंखों और बिजली फिटिंग की जांच कराई गई थी और आवश्यक मरम्मत भी पूरी की गई थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जांच में पंखा खराब या ढीला नहीं मिला था, बल्कि अचानक उसका लोहे का पाइप की कमजोरी के कारण टूट गया, जिससे यह दुर्घटना हुई।
प्रधानाचार्य संगीता ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि घटना के तुरंत बाद स्कूल के दो कर्मचारियों और पीटीआई (PTI) को छात्राओं के साथ हनुमानगढ़ अस्पताल रवाना किया गया था। साथ ही परिजनों को भी तत्काल फोन से सूचना दी गई और आंख विशेषज्ञ डॉक्टर से वीडियो कॉल के जरिए तुरंत चिकित्सीय परामर्श लिया गया। एहतियात के तौर पर विद्यालय में लगे सभी अन्य पंखों और स्कूल भवन के भौतिक ढांचे की दोबारा गहराई से जांच करवाई जा रही है।
डॉक्टरों के अनुसार दोनों छात्राओं की हालत खतरे से बाहर है और उनकी आंखों की रोशनी पर कोई असर नहीं पड़ा है। घटना के बाद क्षेत्र के अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि हनुमानगढ़ जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में लगे पुराने पंखों, झूलते तारों और जर्जर भवनों का सेफ्टी ऑडिट कराया जाए ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान पर न बन आए।