- हनुमानगढ़ से चौधरी थे प्रबल दावेदार- वर्ष 1993 से 1998 के दौरान रहे सर्वाधिक पांच मंत्री - दो दशक में एक से ज्यादा को कभी नहीं मिला मौका
हनुमानगढ़./श्रीगंगानगर. राज्य की अशोक गहलोत सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार रविवार को हो गया। लेकिन, इसमें श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले को प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया। ऐसे में दोनों जिलों में कांग्रेसियों में निराशा रही। हालांकि श्रीकरणपुर विधायक गुरमीत सिंह कुन्नर और हनुमानगढ़ विधायक चौधरी विनोद कुमार मंत्रिमंडल में जगह पाने के प्रबल दावेदार थे। लेकिन तवज्जो नहीं मिली। श्रीगंगागर जिले में छह विधानसभा सीटें है। इसमें सादुलशहर और श्रीकरणपुर से कांग्रेस विधायक है जबकि श्रीगंगानगर के निर्दलीय विधायक का गहलोत सरकार को समर्थन है। वहीं अनूपगढ़, रायसिंहनगर और सूरतगढ़ में भाजपा के विधायक है।
पंजाबी कोटे की भी अनदेखी
श्रीगंगानगर जिला पंजाबी बाहुल्य क्षेत्र के कारण भी मंत्रिमंडल में एक मंत्री के लिए अब तक अघोषित कोटा रहा है। पिछली वसुंधरा सरकार में श्रीकरणपुर से सुरेन्द्रपालसिंह टीटी राज्य मंत्री रहे। इससे पहले कुन्नर भी राज्य मंत्री रह चुके हैं। वर्तमान सरकार के गठन के साथ ही कुन्नर को फिर से मंत्री बनाने के कयास लगाए जाने लगे। लेकिन, ये फिलहाल कयास ही है। गौरतलब है कि श्रीकरणपुर सीट से भाजपा के कुंदनलाल मिगलानी व संगरिया से गुरजंट सिंह बराड़ भी मंत्री रह चुके हैं। पंजाबी चेहरे के रूप में किसी न किसी सरकार में इलाके का प्रतिनिधित्व रहा है लेकिन वर्तमान गहलोत सरकार नेयह सिलसिला बरकरार नहीं रखा। दूसरी तरफ, हनुमानगढ़ जिले की पांच विधानसभा सीटों में से हनुमानगढ़ और नोहर से कांग्रेस के विधायक हैं। भादरा में माकपा, संगरिया व पीलीबंगा से भाजपा के विधायक हैं।
१९९३ में बने थे सर्वाधिक पांच मंत्री
हनुमानगढ़ वर्ष 1993 से 1998 के पांच वर्ष के भाजपा सरकार के कार्यकाल में सर्वाधिक भाग्यशाली रहा। तब छह विधानसभाओं में से पांच विधायकों को राज्य मंत्रीमंडल में स्थान मिला। इसके अलावा कभी एक से ज्यादा विधायकों को राज्य मंंत्रिमंडल में सहभागिता का अवसर नहीं मिला। वर्ष 1993 से 1998 के मध्य तत्कालीन भाजपा की भैरोंसिंह शेखावत सरकार में भादरा से निर्दलीय विधायक ज्ञान सिंह, पीलीबंगा से निर्दलीय विधायक रामप्रताप कासनिया, टिब्बी से निर्दलीय विधायक शशिदत्ता और हनुमानगढ़ से भाजपा विधायक डॉ. रामप्रताप मंत्री मंडल में शामिल किए गए थे। वर्ष 1993 में श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ संयुक्त जिला था। इसनाते सादुलशहर- संगरिया संयुक्त विधानसभा से निर्दलीय विधायक गुरंजट सिंह भी मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे। वर्ष 1994 में हनुमानगढ़ जिला बना और इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों के बाद बनी राज्य सरकारों में मंत्री बनने का अवसर बहुत कम विधायकों को मिला। वर्ष 1998 से 2003 की गहलोत सरकार में सादुलशहर-संगरिया से कांग्रेस विधायक केसी बिश्रोई को राज्यमंत्री बनने का मौका मिला।
वर्ष 2003 से 2008 के मध्य भाजपा की प्रचण्ड बहुमत से वसुंधरा राजे के नेतृत्व में सरकार बनी लेकिन मंत्रिमंडल में हनुमानगढ़ जिले से किसी विधायक को शामिल होने का मौका नहीं मिला। हालांकि, हनुमानगढ़ से पूर्व विधायक व वरिष्ठ नेता डॉ. रामप्रताप को इंदिरा गांधी नहर मंडल का अध्यक्ष बना कर केबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। वर्ष 2008 में राज्य में पुन: अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी और पहले ढाई साल किसी को मंत्री बनने का मौका नहीं मिला। इसके बाद हुए फेरबदल में हनुमानगढ़ विधायक चौधरी विनोद कुमार को राज्यमंत्री बनाया गया। इस दौरान भादरा से निर्दलीय विधायक जयदीप डूडी संसदीय सचिव रहे। वर्ष 2013 से २०18 में पुन: भाजपा की वसुंधरा राजे के नेतृत्व में सरकार बनी और हनुमानगढ़ से विधायक डॉ. रामप्रताप केबिनेट मंत्री बने। इसके बाद वर्ष 2018 में राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी लेकिन अभी तक किसी विधायक को मंत्री बनने का मौका नहीं मिला। वर्ष 1993 से पूर्व हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय की विधानसभा हनुमानगढ़ से महज एक बार बृजप्रकाश गोयल को कुछ समय के लिए मंत्री बनने का अवसर मिला था। इसी तरह जिले की अन्य विधानसभाओं से इक्का-दुक्का विधायक मंत्री बनते रहे।