- मंदे के बीच भगवान की मार से किसान के माथे चिंता की लकीरें
संगरिया. उपखंड के अनेक गांवों में बरसात से जहां फसलों को जीवनदान मिला है वहीं चने व बेर के आकार की ओलावृष्टि ने किसानों के माथे पर चिंताओं की लकीरें खींच दी हैं। बारिश के बाद बढ़ी ठंड से बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहे। बाजार में भी रौनक कम रही। ग्राम पंचायत मोरजंडसिखान के चक 9,10,11 एमजेडी व 13,1४ एएमपी में ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों व चने की फसल को भारी नुकसान हुआ है। जिससे किसान को मंदे की मार व पिछले तीन वर्ष से केसीसी लोन से बीमा के नाम पर हो रही सरकारी लूट के साथ अब कुदरती मार झेलने को मजबूर होना पड़ रहा है।
पूर्व नहर अध्यक्ष हरचरणसिंह, किसान हरफूल सलवारा, गुरसाब सिंह दंदीवाल, सुखदेव नेहरा, जलंधर सरां, हरपाल सिंह व अन्य ग्रामीणों ने मंगलवार दोपहर आक्रोश जताया। वे बोले अब तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या कर्मचारी प्रभावित किसानों की सुध लेने नहीं आया। सरकारी मदद तो मिलना दूर की बात जहां प्रशासनिक मुखिया ना हो तो वे किसके भरोसे उम्मीद रखें। यदि मौके पर फसलों का आकंलन हो तो राहत की कुछ तो आस रहती। उधर, उप तहसील गांव ढाबां के स्टेशन समीप एक पेड़ पर सोमवार शाम आसमानी बिजली गिर गई।
शहीद भगतसिंह क्लब अध्यक्ष दारासिंह गिल ने बताया कि इससे पेड़ अनेक जगह से टूट कर बिखर कर झुलस गया। सुबह से हो रही बारिश के कारण घरों में दुबके होने से जनहानि नहीं हुई। हालांकि पास के कुछ घरों में बिजली के इनवर्टर जल गए। मावठ की बारिश से गांव की खेती में कोई नुकसान नहीं है। गौरीशंकर झोरड़ के अनुसार नुकेरा, मालारामपुरा, कीकरवाली गांवों में ओलावृष्टि से अधिकांश फसलों को नुकसान पहुंचा है। शराबबंदी संयोजक विक्र्रम कलहैरी ने कहा कि गांव भाखरांवाली में जोरदार बारिश हुई। आरोप लगाया कि किसानों को २०१५ कीनरमा फसल का मुआवजा सरकार से अभी तक नहीं मिला।