हरदा.जिले में सड़कों की हालात खस्ताहाल है। यहां से गुजरने वाले नेशनल और स्टेट हाइवे के साथ साथ शहर की आंतरिक सड़कों में भी कई जगह गडढे हो गए हैं। कुछ जगहों पर तो इनकी गहराई आधा फीट या इससे ज्यादा भी है। ऐसे गडढे मरम्मत के अभाव में अंजान वाहन चालकों के लिए रात में मौत का कारण बनने लगे हैं। बारिश लगभग विदा हो चुकी है,इसके बाद भी विभाग इनकी मरम्मत नहीं करा रहा है। इस बार तेज,ज्यादा व लगातार बारिश नहीं हुई,जिससे इसका दोषारोपण उस पर किया जा सके।
केस-1
हरदा से खिरकिया के बीच करीब 4 माह पहले स्टेट हाइवे का सुदृढ़ीकरण कराया गया।इस पर करीब 9.26 करोड़ रुपए खर्च किए।निर्माण के दौरान इंजीनियरों ने गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा। जैसे जैसे निर्माण करते हुए ठेकेदार आगे बढ़ता गया,वैसे वैसे ही घटिया निर्माण और रोड की परत उखड़ने की शिकायतें भी मीडिया की सुर्खियां बनने लगीं,लेकिन जिम्मेदारों ने न तो ध्यान दिया और न ही ठेकेदार पर कार्रवाई की। बीते माह इन गडढों से जब हादसे बढ़ने लगे तो इनमें पेबर ब्लाक लगा दिए गए।
केस-2
इंदौर बैतूल नेशनल हाइवे पर चारखेड़ा में पुलिया के मोड़ पर आधा फीट से ज्यादा गहरा गडढा हो गया है। मरम्मत के अभवाव में यह धीरे धीरे बढ़ रहा है। यहां से दिनभर में 150 से ज्यादा सवारी बसें और अन्य सभी तरह के भारी वाहन गुजरते हैं। कई बार दूसरे राज्यों या भारी वाहन ट्रक या अन्य वाहन चालक हाइवे की गुणवत्ता पर बिना शंका किए तेजी से गुजरते हैं,ऐसे में गडढे में टायर जाने से वाहन असंतुलित होकर पलटने की आशंका बढ़ जाती है। यह स्थिति महीनों से है,लेकिन सुधार नहीं हुआ।
केस-3
शहर की अंदरुनी सड़कों में भी कई जगह खतरनाक गडढे हैं। सेंट मेरी स्कूल के पास मंडी,पुरानी गल्ला मंडी बस स्टैंड,रेलवे स्टेशन पहुंच चौक पर करीब 9 इंच गहरा व काफी चौड़ा गडढा हो गया है। यहां से हजारों ट्रॉली,सैकड़ों ट्रक,4 हजार स्कूली बच्चे विभिन्न विभागों के अप डाउन करने वाले अधिकारी कर्मचारी और अन्य लोग रोज गुजरते हैं। दिन में कई बार वाहन चालक यहां अनियंत्रित होकर गिरते हैं। यह दिनोंदिन जानलेवा साबित हो रहा है। फिर भी नपा,मंडी प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा है।
लोग बोले...
कायाकल्प में नपा ने 2.35 करोड़ से सड़कों का काम कराया। सड़कों पर केवल डामर की परत डाली गई। सड़कों की गारंटी 3 व 5 साल बताई गई। सच्चाई यह है कि पहली बारिश होते ही यह डामर उखड़ गया। पुराने गडढे उभर आए,जिनमें दोबारा बजरी डाली।
-शैलेंद्र जोशी,एडवोकेट
स्कूल में कई बच्चे साइकल व स्कूटी लेकर आते हैं। दिन में अनेक महिलाएं वाहन लेकर निकलती हैं। मंडी व स्कूल गेट पर बीचोंबीच गहरा गड़ढा है। बाजू में रोड लेवल में नहीं है।यहां रोड की उंचाई ज्यादा व गडढा गहरा होने से आए दिन हादसे होते हैं।
-जीएल सेजकर,कर्मचारी
टापिक एक्सपर्ट कमेंटस
ड्राइविंग के दौरान रोड़ ठीक होना चाहिए। रोड की खराब हालत से वाहन का बार-बार गियर बदलना पडता़ है।गडढों के कारण बाइक जब इनसे होकर गुजरती है तो इसका असर पीठ पर पड़ता है,जो रीढ़ व पीठ दर्द का कारण बनता है। लंबे समय तक ऐसी खराब सड़कों से आवागमन करना किसी गंभीर बीमारी का कारण भी बन सकता है। इसके अलावा वाहनों में टूट फूट होती है,जिससे मेंटेनेंस खर्च बढ़ता है। खराब सड़कों पर अपेक्षित से कम गति होने से ईंधन ज्यादा खर्च होता है,समय भी लगता है।
-डॉ.मनीष शर्मा,सिविल सर्जन,हरदा
इनका कहना है
आप जहां का बता रहे हैं,वहां की जानकारी लेकर उसकी मरम्मत कराई जाएगी। अब बारिश भी थम चुकी है,यदि कहीं कोई दिक्कत है तो उसकी जल्द ही मरम्मत कराएंगे,जिससे लोगों का आवागमन में असुविधा न हो।
-भूपेंद्र कापसे,एसडीओ,एनएच
शहर के गडढों की मरम्मत कराएंगे। बारिश में जहां भी कहीं ऐसी स्थिति बनी है,उसे प्राथमिकता से ठीक कराया जाएगा।
-भारती कमेडिया,नपाध्यक्ष हरदा