हरदा

अपने फायदे के लिए ईंट भट्टा संचालक नादियों का प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ रहे

नदियों से मिट्टी निकालकर अवैध रूप से बनाई जा रही ईंटें, ईंट भट्टा संचालक बिगाड़ रहे नदियों का स्वरूप

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Jun 28, 2018
अपने फायदे के लिए ईंट भट्टा संचालक नादियों का प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ रहे

खिरकिया. ईंटों के निर्माण के लिए नदियों को छलनी किया जा रहा है। नदियों की मिट्टी निकालकर अवैध रूप से भट्टे लगाकर ईंटों का निर्माण किया जा रहा है। नदियों पर अवैध उत्खनन से अवैध ईंट निर्माण के लिए निकाली जा रही मिट्टी से शासन को लाखों रुपए की खनिज संपदा के रूप में हानि पहुंचाई जा रही है। वहीं नदियों में अवैध खुदाई से उनका प्राकृतिक स्वरूप को भी बिगाड़ा जा रहा है। जिससे नदियों का अस्तित्व खतरे में है। जानकारी के अनुसार राजमार्ग स्थित नदियों सहित विकासखंड के गांवों की नदियों से कीमती मिट्टी और मुरूम निकालकर परिवहन किया जा रहा है। साथ ही नदियों के किनारे बड़े बड़े ईंट भट्टों का संचालन किया जा रहा है, जिसे राजमार्ग से भी देखा जा सकता है। लेकिन इस ओर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

50 से अधिक भट्टों पर बनाई जा रही है ईंट-
विकासखंड में करीब आधा सैकड़ा से अधिक भट्टों पर अवैध रूप से ईंटों का निर्माण किया जा रहा है। स्टेट हाईवे स्थित माचक नदी के दोनों छोर पर एवं मुख्य मार्ग से लगभग दो-तीन किमी अंदर तक अवैध ईंट भट्टे संचालित हो रहे है। वहीं चारूवा नदी पर लाखों रुपए की अवैध ईंट का निर्माण कार्य राजस्व विभाग की आंखों धूल झोंककर किया जा रहा है। इसके अलावा पहटकलां, सोनपुरा, रूनझून, सक्तापुर आदि गांवों में भी नदी के पास ईंट भट्टे संचालित हो रहे है। नगर की बात करे तो चौकड़ी मार्ग एवं छीपाबड़ में भी खुलेआम ईंटों का निर्माण अवैध रूप से किया जा रहा है।

भट्टों के संचालन के लिए सख्त है नियम -
शासन ने ईंट भट्टों के संचालन के लिए सख्त नियम बनाए है, लेकिन क्षेत्र में इन नियमों की खुले आम धज्जियां उड़ाई जा रही है । पुराने नियम 31 मई 2014 को समाप्त कर दिए हैं। इसके बाद अब नए नियम लागू किए गए हैं। इन नियमों के लागू होने के बाद कारोबार करने वाले अब कहीं भी ईंट भट्टा नहीं लगा सकेंगे। इसके साथ ही उनको ईंट भट्टा लगाने से पहले लीज लेना पड़ती है। पहले कुम्हार जाति के लिए ईंट निर्माण की छूट थी। अब कुम्हार और अनुसूचित जाति को भी खनिज विभाग से लीज लेना जरुरी है। सिर्फ उनको 10 हजार तक की सीमा में रायल्टी की छूट रखी गई है। इसके ऊपर कारोबार करने पर उनको भी रायल्टी देना अनिवार्य है।

टे्रक्टर ट्रालियों से करते है अवैध परिवहन -
नदियों से मिट्टी के अवैध परिवहन के लिए टे्रक्टर ट्रालियों का सहारा लिया जाता है। मांदला नदी के अंदर तक कच्चे रास्ते से वाहन पहुंचाएं जाते है। साथ ही मजदूरों एवं जेसीबी मशीन से भी ट्रालियां भराई जाती है इसके बाद उसका अवैध परिवहन किया जाता है। जो कि स्टेट हाईवे से आवागमन के दौरान के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं देखकर निकल जाते है। अवैध उत्खनन कारोबारियों ने इसे अपना धंधा बना लिया गया है। बाणगंगा नदी पर कालधड़ के समीप कच्चा रास्ता बनाकर इन अवैध कारोबारियों ने नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर बिगड़ दिया। अलसुबह से ट्रालियों के माध्यम से अवैध मिट्टी का परिवहन शुुरू हो जाता है।

बनती है बाढ़ की स्थिति -
नदियों पर हो रहे बेतहाशा अवैध उत्खनन से बारिश के दौरान बाढ़ की स्थिति बनती है। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। गत वर्ष बारिश के दौरान आई बाढ़ से मांदला के ग्रामीणों को भारी नुकसाना उठाना पड़ा था। इतना ही नहीं नदी का पानी गांव में भराने से लगभग आधा गांव डूब चुका था। जिसका कारण नदी में जगह जगह अवैध उत्खनन माना गया। खुदाई वाले स्थानों से पानी अपना रास्ता बदलकर गांव तक पहुंच जाता है, जिससे भारी नुकसान होता है। नदियों को क्षति पहुंचाएं जाने से प्रकृति का तालमेल भी बिगड़ता है।

इनका कहना है
पटवारियों से ईंट भट्टों की जगह चिन्हित कराकर निरीक्षण किया गया। अवैध ईंट भट्टे पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बीपी सिंह, तहसीलदार, खिरकिया

Published on:
28 Jun 2018 08:00 am
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