
हाथरस। शहर में फिर से एक वार मानवता शर्मसार हुई है। यहां प्राइवेट क्लीनिक में उपचार के दौरान मरीज की मौत होने पर स्टाफ ने शव को क्लीनिक से निकाल कर सड़क पर डाल दिया। यह वाक्या उस समय हुआ, जब मृतक का पुत्र किसी काम के लिए क्लीनिक से बाहर गया था। इस घटना के बाद क्लीनिक पर हंगामा खड़ा हो गया। मामले की सूचना पर थाना हाथरस गेट पुलिस पहुंच गयी और मामले को शांत कराया। करीब दो से तीन घण्टे तक शव कूड़े के ढेर के पास पड़ा रहा, लेकिन क्लीनिक के किसी भी शख्स का दिल नही पसीजा।
थाना चंदपा क्षेत्र के रहने वाले भीष्म सिंह का इलाज करीब 6 माह से अलीगढ रोड स्थित डॉ. आर पी गुप्ता के क्लीनिक से चल रहा था। भीष्म सिंह को बार बार बुखार आने की समस्या थी, जिसके चलते लंबे समय से वह डॉ. आरपी गुप्ता से इलाज ले रहे थे। गुरूवार की दोपहर भीष्म सिंह का पुत्र टिंकू उन्हें इलाज के लिए आर पी गुप्ता के क्लीनिक पर लेकर आया और उपचार के लिए भर्ती करा दिया। इस दौरान वह किसी काम के सिलसिले में क्लीनिक से बाहर चला गया। इसी बीच भीष्म सिंह की मौत हो गई तो स्टाफ ने उसके पुत्र टिंकू आने का इंतजार भी नहीं किया और भीष्म सिंह के शव को सड़क पर निकाल कर डाल दिया।
पुत्र टिंकू जब वापस लौटा और पिता का शव सड़क पर देखा तो उसका पारा चढ़ गया। इसके आने के बाद क्लीनिक के इस कृत्य को देखकर अच्छा खासा हंगामा खड़ा हो गया। हंगामे को बढ़ता देख डॉ. और अन्य स्टाफ क्लीनिक से नदारद हो गए। पुत्र का आरोप है कि उसने डॉक्टर से पहले ही पूछा था कि पिता की स्थिति यदि गंभीर हो तो उसे अलीगढ़ या आगरा रेफर कर दें। लेकिन डॉक्टर ने मना कर दिया और कहा यहीं इलाज हो जाएगा। पुत्र का आरोप है कि गलत इलाज के चलते उसके पिता की मौत हुई है। हंगामे की सूचना पर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गयी और मामले की जांच कर कार्रवाई का दिलासा दिया। उसके बाद मामला शांत हुआ। किये जाने की बात पर मामला शांत हो सका।